कुमार ने पत्र में आरोप लगाया, ‘‘एक ओर गृह मंत्री अमित शाह के अधीन दिल्ली पुलिस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बढ़ते आंदोलन को दबाने के लिए कठोर कार्रवाई की है, वहीं यह खबर चौंकाने वाली है कि कॉजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ अतिक्रमण की शिकायत आपकी पार्टी जद(यू) ने दर्ज कराई।’’ भाकपा नेता ने सात, जंतर-मंतर रोड के ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह स्थान 1947 से 1969 तक अविभाजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का मुख्यालय रहा और दशकों से जद(यू) का पता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की जा रही है, छात्रों को हिरासत में लिया जा रहा है और एक राज्यसभा सदस्य पर सुरक्षाकर्मियों ने हमला किया। उन्होंने दिल्ली आने वाली कुछ ट्रेनों को रद्द किए जाने का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य लोगों की आवाजाही रोकना था। संदोष कुमार ने नीतीश कुमार के 1970 के दशक के छात्र आंदोलन से जुड़ाव को याद करते हुए उनसे लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में खड़े होने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपसे जद(यू) को सीजेपी नेताओं के खिलाफ शिकायत वापस लेने और शांतिपूर्ण विरोध के अपराधीकरण के खिलाफ मजबूती से खड़े होने का निर्देश देने का आग्रह करता हूं। साथ ही भाजपा के साथ अपने राजनीतिक गठबंधन पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करता हूं।’’
नई दिल्ली। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के सांसद पी. संदोष कुमार ने शुक्रवार को जनता दल (यूनाइटेड) से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ अपने गठबंधन पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया और आरोप लगाया कि भाजपा सुनियोजित तरीके से संविधान को कमजोर कर रही हैं। भाकपा के राष्ट्रीय सचिव एवं राज्यसभा सदस्य कुमार ने जद(यू) अध्यक्ष नीतीश कुमार को लिखे पत्र में उनसे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेताओं के जंतर-मंतर में प्रवेश को लेकर दर्ज कराई गई शिकायत वापस लेने का भी अनुरोध किया। कुमार ने कहा कि वह इस बात से स्तब्ध हैं कि जद(यू) ने कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका और 12 अन्य लोगों के खिलाफ 12 अक्टूबर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर जाने और राष्ट्रीय ध्वज लहराने को लेकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित किए जाने के खिलाफ असहमति के अधिकार की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति की हुई थी।

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