उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने असहमति की आवाज दबाने के लिए हिंसा का इस्तेमाल किया। घोष ने कहा कि उन्हें लगी चोटें अन्य छात्रों को आई चोटों की तुलना में मामूली हैं। अपने चोट के निशान दिखाते हुए उन्होंने कहा, ‘‘छात्रों को जिस तरह की चोटें आई हैं, उनकी तुलना में यह कुछ भी नहीं है।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के हाथ-पैर में चोटें आई हैं और हिरासत में लेने के बाद उन्हें वैन के अंदर पीटा गया। एसएफआई की दिल्ली इकाई की अध्यक्ष नादिया ने बताया कि हिरासत में लिए जाने के बाद एक वाहन के अंदर महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें घेर लिया और उनके साथ मारपीट की। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘छह महिला पुलिसकर्मी मेरी दोस्त को वीडियो बनाने से रोकने की कोशिश कर रही थीं, जबकि पांच ने मुझे घेर रखा था।’’ नादिया ने कहा कि एक पुलिसकर्मी ने उनके हाथ पर मारा, जबकि दूसरी ने उनके बाल खींचे। उन्होंने आरोप लगाया कि एक पुलिस अधिकारी उनकी उंगली भी मरोड़ने की कोशिश कर रहा था, जिससे उन्हें काफी दर्द हुआ। एसएफआई की एक सदस्य ने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए जाने के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों को यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘‘जब मुझे बस में धकेला जा रहा था, तो एक पुलिस अधिकारी ने मेरा कुर्ता उठा दिया।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि जिस बस में महिला प्रदर्शनकारियों को तंग जगह में रखा गया था, उसमें पुरुष पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। एसएफआई के प्रदर्शनकारियों ने बताया कि केरल के एक प्रदर्शनकारी, जिनकी पहचान साथी प्रदर्शनकारियों ने फिदेल के रूप में की, को कथित तौर पर दाहिने कान पर कई बार थप्पड़ मारे गए, जिससे उनकी सुनने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई।
उन्होंने बताया कि फिदेल को राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल ले जाया गया। प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गईं माकपा नेता वृंदा करात ने दिल्ली में अपने दशकों के अनुभव में पुलिस की इस कार्रवाई को ‘‘अभूतपूर्व’’ बताया। उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली की सड़कों पर दशकों से सक्रिय रहने के अपने अनुभव के आधार पर मैं कह सकती हूं कि आज जो हो रहा है, वह अभूतपूर्व है।’’ करात ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को डराने-धमकाने के लिए पुलिसकर्मियों को बिना किसी रोक-टोक के कार्रवाई करने दी जा रही है। करात ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ अनुचित तरीके से छूने और यौन उत्पीड़न की घटनाएं हुईं। उन्होंने कहा, ‘‘आज वर्दीधारियों द्वारा यौन उत्पीड़न असहमति की आवाज को दबाने का एक जरिया बन गया है।’’ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) महासचिव एम ए बेबी ने कहा कि वामपंथी दल इन पाबंदियों के खिलाफ लोगों को गोलबंद करना जारी रखेंगे और इसके लिए नागरिक संगठनों, बुद्धिजीवियों तथा सांस्कृतिक जगत के साथ मिलकर काम करेंगे। बेबी ने कहा, ‘‘आप बैरिकेड लगा सकते हैं, लेकिन किसी भी दमनकारी ताकत से लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को दबाया नहीं जा सकता।’’ ये प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया और दिल्ली में प्रदर्शनों पर लगाई गई पाबंदियों के विरोध में किए गए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। छात्र समूहों और विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि जब प्रदर्शनकारी राजधानी में अलग-अलग जगहों पर इकट्ठा होने की कोशिश कर रहे थे, तो पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया।

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