अमेरिका, भारत को एक उभरती हुई वैश्विक और क्षेत्रीय शक्ति के तौर पर देखता है तथा वह वैश्विक स्तर पर भारत को महत्वपूर्ण भूमिका में देखने को इच्छुक है।
दक्षिण और दक्षिण—पूर्व एशिया के लिए उप सहायक रक्षा मंत्री राबर्ट सचेर ने कल एक प्रेस वार्ता में कहा कि विश्व में भारत की भूमिका को लेकर हम बहुत प्रसन्न हैं। हम देख रहे हैं कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका बढ़ रही है। हम समझते हैं कि उभरती और विश्वसनीय शक्ति के तौर पर उसकी कुछ भूमिकाएं है। उस पर वैश्विक समुदाय का हिस्सा बनने की जवाबदेही है।
श्री सचेर ने कहा कि मुक्षे लगता है कि आप इसे संयुक्त राष्ट्र, जी—20 में देख सकते हैं। उन्होंने कहा कि रणनीतिक भागीदारी के तहत क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के समाधान के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति (बराक) ओबामा और प्रधानमंत्री (मनमोहन) सिंह ने एक साथ काम करने के संबंध में बातचीत की है। निश्चित रूप से यह रक्षा सहयोग से अलग है, लेकिन अफ्रीका में हम विकास से जुड़े कुछ मुददों पर सहयोग कर रहे हैं। यदि आप शांति से जुड़े अभियानों पर नजर दौड़ाएं तो भारत ने अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों के प्रति जबर्दस्त प्रतिबद्धता दर्शाई है। आप इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते। वह रचनात्मक भूमिका अदा कर रहा है।
राबर्ट सचेर ने कहा, मुक्षे लगता है कि उसके पास इससे अधिक क्षमता है। यही वजह है कि हम उसके साथ क्षेत्रीय और वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए बेहतर काम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध ओबामा प्रशासन और रक्षा मंत्रलय की प्राथमिकता में शामिल है क्योंकि हमारा मानना है कि सशक्त द्विपक्षीय संबंध दोनों देशों के हित में हैं और इनसे दोनों को लाभ पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों में तेजी से बदलाव आया है। कभी अपरिचित रहे दोनों देश के बीच अपरिपक्व संबंध थे जो कि अब एशिया में दो प्रमुख शक्तियों के बीच वास्तविक भागीदारी में तब्दील हो चुके हैं।
सचेर ने कहा कि आज, अमेरिका-भारत रक्षा संबंध मजबूत हैं और विकास कर रहे हैं। पिछले दस साल में हमारे बीच लगातार सैन्य स्तर पर जुड़ाव बढ़ा है। अब इसमें सशक्त बातचीत, सैन्य अभ्यास, रक्षा व्यापार, व्यक्तिगत आवाजाही और सैन्य सामग्री सहयोग शामिल हैं।

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