जीएम सरसों की खेती पर नीतीश का विरोध जारी, कहा- नहीं बना सकते राज्यों पर दबाव

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पटना 17 मई, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जीन संवर्द्धित (जीएम) सरसोंं की वाणिज्यिक खेती को लेकर जीएम फसल नियामक की सिफारिश का विरोध करते हुये कहा कि कृषि के राज्य सूची का विषय होने से इसकी खेती के लिए राज्यों पर दबाव नहीं बनाया जा सकता है। श्री कुमार ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनिल माधव दवे को लिखे पत्र की प्रति आज यहां जारी की। पत्र में कहा गया है कि मीडिया के माध्यम से ऐसी जानकारी मिली है कि जेनेटिक इंजीनियरिंग ऐप्रेजल कमेटी (जीईएसी) ने देश में जीएम सरसोंं की वाणिज्यिक कृषि शुरू करने की सिफारिश की है और इस आवेदन पर अब श्री दवे को स्वीकृति देने या नहीं देने का निर्णय लेना शेष है। उन्होंने इस खबर के हवाले से जीएम सरसों के खिलाफ विरोध जताते हुये कहा कि कृषि के राज्य सूची का विषय होने के कारण राज्यों पर इसकी खेती के लिए दबाव नहीं बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा, “मैंने इस संदर्भ में इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी पत्र लिखा है। जीएम सरसोंं की खेती के लिए प्रस्ताव पर हमारी चिंता और विरोध के बावजूद इस मुद्दे का समाधान नहीं निकल सका। मैने पहले भी यह मुद्दा उठाया है कि यदि केंद्र सरकार इसकी मंजूरी दे देती है तो इसके घातक परिणाम झेलने के लिए राज्यों पर कैसे दबाव बनाया जा सकता है जबकि कृषि राज्य सूची का विषय है।” श्री कुमार ने कहा कि बहुराष्ट्रीय बीज कंपनियाें द्वारा जीएम तकनीक आधारित सरसों का व्यावसायीकरण करने की आशंका है। इससे बीज कंपनियों का एकाधिकार तो स्थापित होगा ही साथ ही लाखों किसानों का भविष्य इन कंपनियों के पास गिरवी रखने जैसी स्थिति हो जाएगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा बीज अधिनियम में भी इन कंपनियों के लिए न तो उत्तरदायित्व निर्धारित किया गया है और न ही जीएम सरसों बीज का इस्तेमाल करने पर नुकसान होने से किसानों के लिए क्षतिपूर्ति का ही प्रावधान किया गया है। यह एक जोखिमपूर्ण तकनीक है जो किसानों के साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके अलावा अभी भी यह मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को जीएम सरसों पर कोई भी फैसला करने से पहले उच्च्तम न्यायालय में अपना पक्ष रखना जरूरी है। श्री कुमार ने कहा, “जीएम सरसों को आवेदन को तत्काल खारिज किया जाना चाहिए। आगे भी जीएम फसलों पर जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए क्योकिं इससे किसानों के साथ ही पूरे देश के लोगों को नुकसान हो सकता है।” 

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