पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे नहीं रहे

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नयी दिल्ली,18 मई, केन्द्रीय वन,पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनिल माधव दवे का आज सुबह यहां दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 60 वर्ष के थे। श्री दवे को सुबह अचानक तबीयत बिगड़ जाने पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ले जाया गया जहां दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। पर्यावरण मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार श्री दवे का आज ही विमान से कोयम्बटूर जाने का कार्यक्रम था। लेकिन इसी बीच सुबह उन्होंने बैचेनी की शिकायत की जिसपर उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्री दवे के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा, “मैं कल शाम को अनिल दवे जी के साथ था। उनके साथ नीतिगत मुद्दों पर चर्चा कर रहा था। उनका निधन मेरी निजी क्षति है। दवे जी के रूप में मैने अपना एक मित्र और एक आदर्श व्यक्ति खो दिया है। उन्हें लोग जुझारू लोक सेवक के तौर पर याद रखेंगे। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उनका सक्रिय सहयोग हमेशा याद रखा जाएगा।” केन्द्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू, सुरेश प्रभु, और स्मृति ईरानी सहित कई केन्द्रीय मंत्रियों ने भी श्री दवे के निधन पर शोक व्यक्त किया है। श्री दवे के सम्मान में आज राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अलावा सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों की राजधानियों के सभी सरकारी भवनों और कार्यालयों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका दिया गया है। श्री दवे के पार्थिव शरीर को आज शाम को पांच बजे सेना के विशेष विमान भोपाल ले जाया जायेगा। अंतिम संस्कार कल सुबह होशंगाबाद जिले के बांद्रा भान स्थित शिवनेरी आश्रम में किया जायेगा। जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते का भारत की ओर से अनुमोदन किये जाने में श्री दवे ने अहम भूमिका निभाई थी। प्रधानमंत्री की पर्यावरण से जुडी योजनाओं में वह एक प्रमुख नीतिकार और सलाहकार थे। एक साल से भी कम समय के अपने छोटे से कार्यकाल में उन्होंने जलवायु परिवर्तन पर आयेाजित विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में भारत का प्रभावी नेतृत्व किया और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भारत के हिताें की पुरजोर वकालत करने के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भूभिका का खाका भी पेश किया। मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद श्री दवे पर्यावरण मंत्री बनने से पहले ही पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न अभियानों अरसे से सक्रिय रहे थे। समाचार एजेंसी यूनीवार्ता को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, ‘पर्यावरण उनकी निजी रुचि का विषय है ऐसा नहीं है कि पर्यावरण मंत्री बनने पर मुझे पर्यावरण की चिंता है बल्कि यह शुरू से मेरे जीवन का हिस्सा रहा है। मुझे इसमें बहुत सुकुन मिलता है।” उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए जमीन से जुड़कर काम करने की वकालत करते हुए कहा था कि एयर कंडीशनर कमरों में बैठक नीतियां भर बनाने से काम नहीं चलेगा इसके लिए जमीन में उतरना पड़ेगा स्थानीय लोगों से जुड़ना होगा तभी बात बनेगी। 

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