बिहार के बैंक किसानों को देेते हैं कम ऋण : जदयू

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पटना 22 जून, बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन के प्रमुख घटक जनता दल यूनाईटेड (जदयू) ने पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के किसानों का ऋण माफ करने के बयान पर पलटवार करते हुये आज कहा कि पूर्व में वित्तमंत्री रहे श्री मोदी को यह नहीं पता कि राज्य के बैंक किसानों को बहुत कम ऋण देते हैं। जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने यहां कहा कि पूर्व में वित्त मंत्री रहे श्री मोदी को यह समझ नहीं आ रहा कि केंद्र के बैंक बिहार के किसानों को पहले ही बहुत कम पैसे कर्ज के रुप में देते है। वैसे भी राज्य के किसानों के जो हालात वह बता रहे हैं, वैसा नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों को यहां बैंक से बहुत कम रकम कर्ज के रुप में मिलती है। राज्य के पैसे से दूसरे राज्य विकसित हो रहे हैं। इस कारण यह है कि यहां के बैंकों में जमा होने वाली राशि को बैंक आम लोगों की ऋण के रूप में आर्थिक सहायता देने या जन कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च नहीं कर रहे हैं। श्री सिंह ने कहा कि जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों में किसान आंदोलन कर रहे हैं और आत्महत्या कर रहे हैं तो श्री मोदी बिहार के किसानों को भी भड़का रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह पर निशाना साधते हुये कहा कि वह हवाई जहाज से सीधे मोतिहारी में लैंड करते हैं। लगता है कि बिहार में और कोई दूसरा जिला है ही नहीं। उन्होंने कभी राष्ट्रीय बैंकों को निर्देश नहीं दिया कि बिहार के किसानों और यहां के आम लोगों को आसानी से ऋण उपलब्ध करायें। जदयू प्रवक्ता ने कहा कि वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान नकद जमा अनुपात 44.99 प्रतिशत था। बिहार के बैंकों में जमा हुए रुपये यहां तो खर्च नहीं हो पा रहे हैं लेकिन दूसरे राज्यों खासकर विकसित राज्यों में बड़े स्तर पर खर्च हो रहे हैं। इसी का नतीजा है कि विकसित राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्र प्रदेश, हरियाणा समेत अन्य राज्यों के बैंकों का यह अनुपात 100 प्रतिशत से भी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, तमिलनाडु जैसे कुछ राज्यों में तो यह 150 प्रतिशत से भी ज्यादा है।

श्री सिंह ने कहा कि इन राज्यों में नकद जमा अनुपात से अधिक ऋण बांटे जा रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि बिहार जैसे गरीब राज्यों में जो लोग पैसे जमा करते हैं, उनका उपयोग बैंक वाले विकसित राज्यों में कर रहे हैं। तभी तो बिहार और इन राज्यों के जमा अनुपात में दो गुना से ज्यादा का अंतर है। उन्होंने कहा कि राज्य में मौजूद बैंक ऋण देने में सबसे ज्यादा कोताही बरतते हैं, जिसकी वजह से रुपये बैंकों में पड़े रहते हैं। जदयू प्रवक्ता ने कहा कि वित्त वर्ष 2016-17 में राज्य के सभी बैंकों में दो लाख 80 हजार 370 करोड़ रुपये जमा हुए, जिसमें महज एक लाख 23 हजार 191 करोड़ रुपये ही ऋण के रूप में बांटे गये। बैंक शेष राशि को दूसरे राज्यों में वितरित करते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के बैंकिंग कारोबार में पिछले 12 साल में 65 से 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने के बावजूद यहां का नकद जमा अनुपात में सुधार नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि श्री मोदी बताएं कि इन बैंको पर केंद्र सरकार का अधिकार है या नहीं। शहरों में तो कुछ लोगो को बैंक ऋण दे देते है लेकिन गांव के किसानों के सामने बैंक इतनी समस्या खड़ी कर देते हैं कि किसान बेचारे मायूस हो जाते हैं। 

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