अब आठवीं कक्षा तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का क़ानून लागू !! - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

गुरुवार, 1 अप्रैल 2010

अब आठवीं कक्षा तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का क़ानून लागू !!



भारत में ऐतिहासिक शिक्षा का अधिकार क़ानून गुरुवार से लागू हो रहा है. इसके तहत आठवीं कक्षा तक मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है.
अनिवार्य शिक्षा अधिकार विधेयक पिछले साल संसद से पारित हो गया था और इसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी भी मिल चुकी है.
इसके तहत छह से चौदह साल तक के सभी बच्चों को शिक्षा मुहैया कराना संवैधानिक अधिकार बना दिया गया है.
इससे भारत के आठ करोड़ से ज़्यादा बच्चों को फायदा होने की उम्मीद है और यह प्राथमिक शिक्षा के प्रसार में मील का पत्थर साबित हो सकती है.
इस क़ानून में शिक्षा की गुणवत्ता, सामाजिक दायित्व, निजी स्कूलों में आरक्षण और स्कूलों में बच्चों के प्रवेश को नौकरशाही से मुक्त कराने का प्रावधान भी शामिल है.
इस क़ानून के लागू होने के बाद कोई निर्धारित उम्र सीमा के भीतर अगर किसी बच्चे को शिक्षा का अवसर नहीं मिलता है, तो इसे सुनिश्चित करना सरकार की ज़िम्मेदारी होगी.
कोई भी अभिभावक अपने बच्चे को मुफ़्त शिक्षा दिलाने के लिए अदालत तक का दरवाज़ा खटखटा सकता है. 

कोई टिप्पणी नहीं: