दोहे और उक्तियाँ !! - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 4 अप्रैल 2010

दोहे और उक्तियाँ !!



देख के उनको डर लगे, भूल गये जो नाम।

 ढेरों दुख पायें यहां, आगे न कोइ मक़ाम।।


(शेख़ फरीद)


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