11 सितंबर, 2001 को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के टावरों पर हुए आतंकवादी हमले की नौवीं बरसी कई विवादों के बीच अमेरिका में मनाई जा रही है। अल कायदा के इस हमले में तबाह हुए वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की साइट पर मौजूद ग्राउंड जीरो के पास मस्जिद बनाए जाने की योजना को लेकर 9/11 की बरसी के मौके पूरे अमेरिका में बहस जारी है। वहीं, इस दिन कुरान जलाने की धमकी देने के बाद आखिरकार अपने फैसले से पलटने वाला पादरी न्यूयॉर्क पहुंच गया है।
9/11 की बरसी के मौके पर पूरे अमेरिका में कई प्रार्थना सभाएं, रैलियां आयोजित की जा रही हैं। न्यूयॉर्क में इस हमले में मारे गए लोगों के नाम ग्राउंड जीरो के पास पढ़े जाएंगे। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जोसेफ बाइडेन न्यूयॉर्क में होने वाले कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा पेंटागन में मेमोरियल सर्विस में मौजूद रहेंगे। पेंसिलवेनिया में भी इस मौके पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
ब्रिटिश मीडिया ने इस साल की बरसी को सबसे ज़्यादा विवादास्पद माना है। इस मौके पर ग्राउंड जीरो के पास मस्जिद बनाने के पक्ष में जो लोग हैं वे भी रैली की योजना बना चुके हैं। जबकि मस्जिद के विरोधी लोगों ने भी 9/11 के मौके पर लोगों की भावनाओं का फायदा उठाकर अपनी मुहिम को तेज करने की योजना बनाई है। गौरतलब है कि इससे पहले 9/11 के मौके पर इतने विवाद कभी सामने नहीं आए थे, जितने इस बार हो रहे हैं।
गौरतलब है कि 11 सितंबर, 2001 को आतंकवादी संगठन अल कायदा के द्वारा चार अपहृत विमानों के द्वारा किए गए हमले में करीब 2, 975 लोगों की जानें गई थीं। इसमें वे 19 लोग शामिल नहीं हैं, जिन्होंने विमानों का अपहरण किया था। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दो टावरों में दो विमानों की टक्कर हुई थी। जबकि अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन में एक विमान जाकर टकराया था। चौथा विमान पेंसिलवेनिया के खेतों में जाकर हादसे का शिकार हो गया था।
न्यूयॉर्क शहर के तकरीबन सभी पूजास्थलों पर भारतीय समय के मुताबिक शाम 6.14 पर घंटी बजाई जाएगी। गौरतलब है कि आज से नौ साल पहले तकरीबन इसी समय पर अमेरिका में आतंकवादी हमले हुए थे। पेंसिलवेनिया में इस हमले में मारे गए लोगों की याद में होने वाले आधिकारिक कार्यक्रम में ओबामा की पत्नी मिशेल ओबामा और पूर्व राष्ट्रपित जॉर्ज बुश की पत्नी लॉरा बुश शिरकत करेंगी। इन हमलों के पीछे अल कायदा के आतंकवादी ओसामा बिन लादेन का नाम सामने आया था। लेकिन कई युद्धों और कोशिशों के बावजूद लादेन अमेरिका के हाथ नहीं लग सका है।
ग्राउंड जीरो पर मस्जिद बनाए जाने के विवाद पर 9/11 के हमले में मारे गए लोगों के परिवार वालों का कहना है कि ऐसी जगह पर जहां इतने सारे लोग मारे गए हों, वहां इस्लाम की याद दिलाना सही नहीं है। वहीं, कुछ परिवारों का कहना है कि इससे दुनिया भर में यह संदेश जाएगा कि अमेरिका में सभी धर्मों के प्रति सम्मान और स्वतंत्रता की भावना है। अमेरिका में हुए सर्वे में भी ज्यादातर लोगों ने ग्राउंड जीरो पर मस्जिद बनाए जाने का विरोध किया है।
शनिवार, 11 सितंबर 2010
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