सम्पूर्ण सृष्टि में आतंरिक चेतना केवल परमपिता परमेश्वर
ही है| संतति सदैव माँ प्रकृति, जो ओम की अद्रश्य
सृजनात्मक शक्ति है, के गर्भ में निहित है| प्रकृति के
रहस्य से बाहर आने पर ही सर्व व्यापी ईश्वर आपके
सामने असीम प्रेम और ज्ञान का आश्चर्य प्रकट करता है|
(श्री परमहंस योगानंद)
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