सुप्रसिद्ध नृत्यांगना और भारतीय सिनेमा की बेहतरीन अदाकारा हेमा मालिनी ने अपनी दोनों बेटियों के साथ खजुराहो नृत्य उत्सव के उदघाटन समारोह में अपनी पुष्पांजलि और अर्धनारेश्वर की प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया.
हेमामालिनी ने कहा कि उनकी खजुराहो नृत्य महोत्सव के इस प्रतिष्ठित मंच पर प्रस्तुति की चाहत बहुत पुरानी थी जो तीन दशक बाद जाकर पूरी हुई. उन्होंने कहा कि उनकी बेटियां ज्यादा खुशकिस्मत निकलीं जिन्होंने तीन साल पहले ही इस मंच पर आने का मौका मिला. खजुराहो नृत्य महोत्सव की शुभारम्भ संध्या में भरतनाट्यम और ओडिसी भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों की खूबियों का भरपूर अहसास कराने के बाद सिने तारिका हेमामालिनी दर्शकों से भी रूबरू हुई. उन्होंने कहा कि देश की सारी जानी मानी शास्त्रीय नृत्यांगनाएं पहले ही इस उत्सव में प्रस्तुति का गौरव पा चुकी हैं. मेरे भीतर यह टीस सालती रही कि मैं इससे क्यों वंचित रह गई.
हेमामालिनी ने सबके सामने खुले दिल से माना कि भारतीय शास्त्रीय और लोक कलाओं की हिफाजत और बढ़ावा मौजूदा दौर की अहम जरुरतों में खास तौर पर शुमार है लेकिन मध्यप्रदेश ने इस कसौटी पर पूरी तरह खरा उतरने की मिसाल कायम कर रखी हैं, यह एक सफेद सच्चाई है. उन्होंने उम्मीद भी जताई कि यहां यह सिलसिला कभी थमने नहीं दिया जायेगा.
हेमामालिनी ने सबके सामने खुले दिल से माना कि भारतीय शास्त्रीय और लोक कलाओं की हिफाजत और बढ़ावा मौजूदा दौर की अहम जरुरतों में खास तौर पर शुमार है लेकिन मध्यप्रदेश ने इस कसौटी पर पूरी तरह खरा उतरने की मिसाल कायम कर रखी हैं, यह एक सफेद सच्चाई है. उन्होंने उम्मीद भी जताई कि यहां यह सिलसिला कभी थमने नहीं दिया जायेगा.

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