केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) पीजे थॉमस ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा उठाए गए सवाल पर कहा कि एक लंबित मामला उनकी नियुक्ति रद्द नहीं करा सकता। थॉमस के वकील केके वेणुगोपाल ने दलील दी कि 153 सांसदों (28 फीसदी) के खिलाफ कोर्ट में मामले चल रहे हैं, लेकिन वे पद पर बने हुए हैं।
वेणुगोपाल ने कहा कि एक लंबित मामले के कारण थॉमस की नियुक्ति पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। सीवीसी की नियुक्ति के लिए बनाए गए नियमों में इस तरह का प्रावधान भी नहीं है।
पामोलीन घोटाले में आरोपी बनाए गए थॉमस ने कहा कि उनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एक उच्चधिकार प्राप्त समिति ने की थी, ऐसे में उसकी समीक्षा कोर्ट नहीं कर सकती। इस पर चीफ जस्टिस एसएच कपाड़िया की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि यदि किसी उच्च पदस्थ व्यक्ति ने महत्वपूर्ण जानकारी की अनदेखी की है, तो क्या इसकी समीक्षा नहीं होनी चाहिए? कोर्ट अपनी समीक्षा के साथ संवैधानिक संशोधन को रद्द कर सकती है, लेकिन संवैधानिक नियुक्ति को नहीं?
अटार्नी जनरल जीई वाहनवती ने जानकारी दी थी कि थॉमस के खिलाफ आरोप की फाइल सीवीसी नियुक्ति पैनल के सामने नहीं लाई गई। इस पर जस्टिस केएस राधाकृष्णन और स्वतंत्र कुमार ने कहा कि नियुक्ति पेनल के एजेंडा पत्र के साथ इस तरह की फाइल का होना जरूरी है। लेकिन क्या वजह थी कि इस जानकारी को पेनल के समक्ष नहीं लाया गया? वेणुगोपाल ने जवाब दिया कि इसके लिए थॉमस दोषी नहीं हैं। जजों ने कहा कि महत्वपूर्ण जानकारी को नियुक्ति पेनल के सामने नहीं लाया जाना ही चिंता का कारण है।

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