
कर्नाटक हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष के. जी. बोपैय्या के उस फैसले पर सोमवार को अपनी मुहर लगा दी, जिसमें उन्होंने पांच निर्दलीय विधायकों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य ठहराया था। निर्दलीय विधायकों में चार येदयुरप्पा सरकार में मंत्री थे।
जस्टिस मोहन शांतानागौदर, जस्टिस एस. अब्दुल नजीर और जस्टिस एस. एस. बोपन्ना की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। इससे पहले बेंच ने एक फरवरी को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
मुख्यमंत्री बी.एस. येदयुरप्पा के खिलाफ अविश्वास जताने वाले इन पांच निर्दलीय विधायकों को बोपैय्या ने अयोग्य ठहरा दिया था। इसके बाद इन विधायकों ने विधानसभाध्यक्ष के फैसले को अदालत में चुनौती दी थी। येदियुरप्पा ने पिछले साल पहले 11 अक्टूबर को ध्वनिमत से विश्वास मत जीता था। फिर 13 अक्टूबर को विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने के बाद येदियुरप्पा ने फिर से बहुमत साबित किया था।
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