एक बार फिर बिहार के विशेष राज्य की मांग. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

एक बार फिर बिहार के विशेष राज्य की मांग.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के लिए केंद्र सरकार से 20 हजार करोड़ रुपये के खास पैकेज की मांग की है। साथ ही, कुमार ने केंद्र से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को भी दोहराया है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के साथ मुलाकात के दौरान 13वें वित्त आयोग की सिफारिशों में सूबे के घटते हिस्से का मुद्दा भी उठाया।

नीतीश कुमार ने मंगलवार को नई दिल्ली में वित्त मंत्री से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने वित्त मंत्री को बिहार की मांगों से संबधित एक ज्ञापन सौंपा। अपने ज्ञापन में कुमार ने कहा कि, 'बिहार में प्रति व्यक्ति आय वित्त वर्ष 2007-08 में 9,617 रुपये थी, जो इस साल 12,618 रुपये रहने की उम्मीद है। हालांकि, हम अब भी 25,494 रुपये के राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय के औसत से काफी पीछे हैं। इसे बढ़ाने के लिए हमें निजी निवेश के साथ-साथ सरकारी निवेश में भी इजाफा करने की जरूरत है। इसीलिए हमें पिछड़ा क्षेत्र सहायता कोष (बीआरजीएफ) से 12वीं योजना के तहत केंद्र सरकार से हर साल 4,000 करोड़ रुपये की जरूरत है। उन्होंने कहा कि, 'राज्य में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए हमें विशेष राज्य के दर्जे की दरकार है। इससे निवेशक बिहार की तरफ आकर्षित होंगे। साथ ही, सरकार के कंधों से वित्तीय बोझ भी कम होगा। बिहार के मुख्यमंत्री ने अगले वित्त वर्ष में केंद्र सरकार से बिहार के लिए बीआरजीएफ की खास योजना के तहत 3,100 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आबंटन की भी मांग की।

यह योजना झारखंड के बंटवारे के बाद केंद्र सरकार ने बिहार के विकास के लिए शुरू की थी, जो अगले वित्त वर्ष में खत्म होने वाली है। उन्होंने कहा है कि, 'अगला वित्त वर्ष इस खास योजना का आखिरी साल होगा। हालांकि, इस योजना के तहत चालू वित्त वर्ष तक के पूरे भुगतान के बावजूद हमें अगले वित्त वर्ष में कम से कम 3,145 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आबंटन की जरूरत होगी। इसीलिए इस रकम का भी आबंटन जल्द से जल्द होना चाहिए।
कुमार ने 13वें वित्त आयोग की सिफारिशों में सूबे के घटते हिस्से का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बिहार काफी पिछड़ा इलाका है, फिर भी वित्त आयोग ने राज्य सरकार के हिस्से को कम कर दिया। यह काफी चिंताजनक बात है।

उधर योजना आयोग ने बिहार के लिए अगले वित्त वर्ष में 24 हजार करोड़ रुपये के योजना आकार को हरी झंडी दिखा दी है। मंगलवार को नई दिल्ली में सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया की बैठक में इस बारे में फैसला लिया गया।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि, 'आयोग के बिहार के लिए इस बार 24000 करोड़ रुपये के योजना आकार को अपनी मंजूरी दे दी है। यह रकम चालू वित्त वर्ष के योजना आकार से 20 फीसदी ज्यादा है। इस योजना आकार में 41 फीसदी रकम (करीब 10 हजार करोड़ रुपये) राज्य सरकार अपने स्रोतों से, 32 फीसदी (7723 करोड़ रुपये) रकम केंद्रीय सहायता से और बाकी की 27 फीसदी रकम (6342 करोड़ रुपये) बाजार से कर्ज के रूप में प्राप्त करेगी। उन्होंने कहा कि, 'बीते कुछ सालों में हम अपने बूते पर खड़े होने की कोशिश कररहे हैं। इसी का नतीजा है कि 2004-05 में जहां राज्य के योजना आकार का 70 फीसदी हिस्सा केंद्रीय सहायता के रूप में आता था, वहीं अब यह हिस्सा घटकर 32 फीसदी रह गया है। वहीं, हमारे स्रोतों की योजना आकार में हिस्सेदारी 2005-06 के करीब 10 फीसदी से बढ़कर अगले वित्त वर्ष में 41 फीसदी हो जाएगी।'

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