भ्रष्टाचार के खिलाफ जन आंदोलन का नेतृत्व करने के बाद समाज सुधारक अन्ना हजारे चुनावों में पैसे के प्रभुत्व और राजनीति के अपराधीकरण के खिलाफ आंदोलन शुरू कर सकते हैं। सख्त लोकपाल विधेयक के समर्थन में अभियान चलाने में अहम भूमिका निभाने वाले इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के प्रमुख संचालक ने बताया कि चुनावों में पैसे, बाहुबल और माफियाओं का प्रभुत्व जनता में चिंता का विषय है। मेरा मानना है कि अन्ना और उनके साथी इस विषय पर गंभीरता से ध्यान दे रहे हैं।
अन्ना हजारे ने कहा कि चुनाव सुधार का मुद्दा कई दशकों से राष्ट्रीय विमर्श में शामिल रहा है लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अब चुनाव आयोग तंत्र को स्वच्छ बनाने के प्रयास कर रहा है। यह प्रासंगिक विषय है। शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने एक सम्मेलन में कहा था कि आम लोगों का मानना है कि चुनावों में उम्मीदवार वैध सीमा से ज्यादा पैसा खर्च करते हैं। कुरैशी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति सांसद बनने के लिए 10 करोड़ रुपए खर्च करता है तो वह सांसद बनकर 20 करोड़ रुपए कमाना चाहेगा।
कुरैशी ने कहा कि अन्ना हजारे का अनशन दुर्भाग्यपूर्ण था और आक्रोश का विस्फोट रोकने के लिए यदि तंत्र को सुधारने के लिए सेफ्टी वॉल्व मौजूद हों तो इससे बचा जा सकता है। उन्होंने अन्ना हजारे के अनशन से शुरू हुए जनआंदोलन को प्रेशर कुकर के फटने जैसी घटना बताया। सामाजिक कार्यकर्ता और लोकपाल विधेयक के मुद्दे पर नागरिक समाज की ओर से सरकार से बातचीत करने वाले तीन प्रतिनिधियों में से एक स्वामी अग्निवेश ने कहा कि अन्ना हजारे के लिए लोगों का समर्थन काफी उत्साहजनक रहा। हमें सरकार से हुए समझौते और लोगों से इसके लिए समर्थन में उम्मीद से ज्यादा परिणाम प्राप्त हुए।
आंदोलन को बड़ी कामयाबी मिलने के बावजूद इसमें शामिल लोगों में मतभेदों को उन्होंने किसी भी संगठन के लिए सामान्य बताया। अग्निवेश ने कहा कि मतभेद को लेकर प्रकाशित हुए समाचार अत्यधिक अतिशयोक्तिपूर्ण हैं। जब कोई आंदोलन लोगों का समर्थन प्राप्त करता है तो उससे सभी तरह के लोग जुड़ते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि वह आंदोलन को अपने कब्जे में कर रहे हैं। इसका एक उदाहरण जंतर-मंतर पर देखने को मिला जब अग्निवेश कार्यकर्ताओं को पानी दे रहे थे तब दो लोगों ने एक बैनर प्रदर्शित किया जिसमें उनके खिलाफ नारे लिखे गए थे, इसमें लिखा गया था कि मैं भारतीय सेना को प्यार करता हूं, अग्निवेश और प्रशांत भूषण ने सेना के खिलाफ जनहित याचिका क्यों दायर की?

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