कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस सौमित्र सेन को हटाने का प्रस्ताव राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत से पास हो गया। जस्टिस सेन को हटाने के पक्ष में 189 सदस्यों ने वोट दिए, वहीं विरोध में 17 पड़े।
बुधवार को राज्यसभा में कलकत्ता हाई कोर्ट के जज सौमित्र सेन के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही के साथ इतिहास रचा गया। राज्यसभा में पहली बार किसी जज के खिलाफ महाभियोग चलाने की कार्यवाही के लिए सदन को अदालत में बदल दिया गया। राज्यसबा में करीब 2 घंटे तक अपने बचाव में सेन ने न्याय की गुहार की थी।
मार्क्सवादी नेता सीताराम येचुरी और विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने इस बारे में सदन में प्रस्ताव पेश किए जिसके बाद कार्यवाही शुरू की गई। सुप्रीम कोर्ट के जज बी. सुदर्शन रेड्डी की अध्यक्षता वाली जांच कमिटी ने सेन को कदाचार का दोषी ठहराया था। समिति ने उन्हें एक मामले में अदालत द्वारा नियुक्त रिसीवर के तौर पर धन के दुरुपयोग का दोषी ठहराया था।
मामला 1983 में एक विवाद में सेल से जुड़े धन का है। प्रस्ताव में जस्टिस सेन को हटाने की मांग की गई। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत लगभग सभी 245 सदस्य सदन में मौजूद थे और सभापति हामिद अंसारी ने जस्टिस सेन को विशेष रूप से बनाए गए बार में बुलाया। जैसे ही कार्यवाही शुरू होने वाली थी अंसारी ने मार्शलों से कहा, 'क्या जस्टिस सेन मौजूद हैं? उन्हें सदन के बार में लाया जाए।' प्रस्ताव के बाद जस्टिस सेन को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था। सेन ने अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि वह पूरी तरह निर्दोष हैं, इसलिए अपने मुकदमे की पैरवी करने वह खुद आए।
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