प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मंगलवार को दो दिवसीय यात्रा पर ढाका जा रहे हैं जहां वे बांग्लादेश के साथ पुराने संबंधों को जीवंत करने की कोशिश करेंगे। हालांकि इस दौरे में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत पांच राज्यों (पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम) के मुख्यमंत्रियों के भी जाने का कार्यक्रम हैं पर ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री के साथ बांग्लादेश जाने से इंकार कर दिया है।
सूत्रों ने बताया कि भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी जल बंटवारा संधि के मसौदे पर ममता को आपत्ति है। ममता बनर्जी ने इस बाबत प्रधानमंत्री कार्यालय को अपनी शिकायत भी दर्ज करा दी है। उन्होंने अपनी शिकायत में पीएमओ को कहा है कि संधि की जो शर्तें उन्हें बतायी गईं थीं उनसे अंतिम मसौदे का स्वरूप एकदम अलग है। बांग्लादेश को ज्यादा जल दिए जाने का प्रावधान हैं इससे बंगाल को नुकसान होगा। बनर्जी के एक नजदीकी सूत्र ने कहा कि राज्य सरकार 25,000 क्यूसेक जल साझा करने पर सहमत हुई थी, लेकिन अंतिम मसौदे में 33,000 से 50,000 क्यूसेक की बात की गई है। उन्होंने कहा कि बनर्जी का मानना है कि यह पश्चिम बंगाल की जनता के हित में नहीं है।
राजनीति के गलियारे में इसे घरेलू राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। केंद्र सरकार को समर्थन दे रही ममता बर्नजी तिस्ता जल बंटवारा संधि के बहाने बंगाल के आर्थिक मदद की नए सिरे से दबाव बना रही है। केंद्र ने बंगाल को विशेष आर्थिक पैकेज दिया है, लेकिन उसे अप्रर्याप्त बताते हुए बाढ़ राहत और ग्रामीण विकास के मद में और धन चाहती है।
सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मंगलवार को शुरू होने वाली बांग्लादेश की यात्रा से जहां दोनों देशों के संबंधों को एक नया मुकाम मिलने की उम्मीद है। उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री की इस यात्रा में दोनों देशों के बीच सीमा से संबंधित लम्बित विवादों को सुलझाने के लिए बात हो सकती है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच तीस्ता और फेनी नदियों के जल बंटवारे को लेकर भी वार्ता होने की उम्मीद है। यात्रा में दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए भी बात हो सकती है। वर्ष 2010-11 में भारत ने बांग्लादेश को 3.84 अरब डॉलर का निर्यात किया था, जबकि आयात 40.63 करोड़ डॉलर का था।

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