कुलकर्णी एवं भाजपा के दो और सांसद रिहा. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

कुलकर्णी एवं भाजपा के दो और सांसद रिहा.


वोट के लिए नोट मामले में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सलाहकार रह चुके सुधींद्र कुलकर्णी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो पूर्व सांसदों सहित चार आरोपियों को गुरुवार को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया। भाजपा नेताओं के अलावा राज्यसभा सांसद अमर सिंह के पूर्व सहयोगी संजीव सक्सेना और कथित राजनीतिक कार्यकर्ता सुहैल हिन्दुस्तानी भी तिहाड़ से रिहा हुए। 

तीनों नेता जैसे ही तिहाड़ जेल से बाहर आए,बड़ी संख्या में वहां पहुंचे भाजपा कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया और ढोल नगाड़ों की थाप पर वे जमकर थिरकें। रिहाई के बाद कुलकर्णी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा,"आज मुझे जेल से आजादी मिल गई। न्यायपालिका पर हमें पूरा भरोसा है।" उन्होंने कहा, "लेकिन इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आना अभी बाकी है। हमारा संघर्ष जारी रहेगा।"

कुलकर्णी ने समर्थन देने के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी व पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी को धन्यवाद दिया। जेल से बाहर आने के बाद भगोरा ने संवाददाताओं से कहा कि भविष्य में भी वह भ्रष्ट लोगों के खिलाफ मोर्चा थामे रहेंगे। उन्होंने कहा, "मैं पार्टी और सच के लिए लड़ रहा हूं। इसमें कोई निजी एजेंडा नहीं है।"

नेताओं की रिहाई पर भाजपा ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की ओर से 2008 में संसद में विश्वासमत से पूर्व वाकई वोट खरीदने का प्रयास किया गया था। पार्टी का रुख दोहराते हुए भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने कहा कि इस मामले में पार्टी के जिन पूर्व सांसदों को गिरफ्तार किया गया था, वे केवल 'सचेतक' थे। उन्होंने संवाददाताओं से कहा,"कांग्रेस-नीत संप्रग सरकार वाकई संसदों को खरीदने का प्रयास कर रही थी। इन सांसदों की रिश्वत लेने की कोई मंशा नहीं थी..इसलिए बहुत स्पष्ट है कि वे सचेत करने के अभियान में शामिल थे।"

सीतारमन ने कहा कि इस पूरे अभियान की जानकारी एक मीडिया प्रतिष्ठान को थी, जिससे साबित है कि यह कोई षड्यंत्र नहीं था।  कुलकर्णी, कुलस्ते एवं महाबीर सिंह भगोरा, सक्सेना व हिंदुस्तानी को दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को जमानत दे दी थी। उच्च न्यायालय ने इस मामले के एक अन्य आरोपी निवर्तमान भाजपा सांसद अशोक अर्गल को भी अंतरिम जमानत दी थी।

22 जुलाई 2008 को अर्गल, कुलस्ते एवं भगोरा ने विश्वासमत से कुछ ही घंटे पूर्व लोकसभा में नोटों की गड्डियां लहराई थीं। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह धन उन्हें मनमोहन सिंह सरकार के पक्ष में मत देने के लिए दिया गया था। सक्सेना पर आरोप है कि उन्होंने संप्रग सरकार की ओर से इन तीनों को एक-एक करोड़ रूपए दिए थे। 


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