29 रुपये खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब नहीं. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 20 मार्च 2012

29 रुपये खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब नहीं.


सरकार की मानें तो देश में गरीबी कम हो रही है। सोमवार को योजना आयोग ने इस संबंध में आंकड़े जारी किए। नए आंकड़ों के मुताबिक, रोजाना 28.65 रुपये खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब नहीं है और साल 2009-10 में देश में गरीबी का अनुपात घटकर 29.8 पर्सेंट हो गया। 

आयोग ने विवादास्पद तेंडुलकर कमिटी की प्रणाली पर आधारित अपना ताजा आकलन पेश किया है। इसके मुताबिक, शहरी क्षेत्र में 859.60 रुपये प्रति महीने और ग्रामीण क्षेत्र में 672.80 रुपये प्रति महीने खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब नहीं है। योजना आयोग ने इस आकलन में गरीबी रेखा को प्रति व्यक्ति 32 रुपये प्रतिदिन (शहरी क्षेत्र) और 26 रुपये प्रतिदिन (ग्रामीण क्षेत्र) की उस सीमा से भी नीचे रखा है, जिसे आयोग ने पिछले साल पेश किया था। जून 2011 की कीमतों पर आधारित इस आंकड़े के कारण खासा विवाद पैदा हो गया था। 

आयोग ने कहा कि 2009-10 में भारत की गरीबी का अनुपात 29.8 फीसदी रहा। 2004-05 में देश में 37.2 फीसदी लोग गरीब थे। सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया कि 2004-05 से 2009-10 के बीच शहरी इलाकों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी का अनुपात तेजी से घटा है। वित्त वर्ष 2009-10 में देश में गरीबों की कुल संख्या 37.47 करोड़ रही, जो कि 2004-05 में 40.72 करोड़ थी। 

आधिकारिक बयान के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी का अनुपात 8 फीसदी घटकर 41.8 फीसदी की जगह 33.8 फीसदी पर और शहरी इलाकों में गरीबी 4.8 फीसदी घटकर 20.9 फीसदी पर आ गई, जो पांच साल पहले 25.7 फीसदी थी। हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, सिक्किम, तमिलनाडु कर्नाटक और उत्तराखंड में गरीबों का अनुपात 10 फीसदी से भी ज्यादा गिरा। इसी दौरान पूर्वोत्तर राज्यों में असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड में गरीबी बढ़ी है। 

बिहार, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश जैसे अपेक्षाकृत बड़े राज्यों में गरीबी के अनुपात विशेष तौर पर ग्रामीण इलाकों में गरीबी में कमी तो आई है पर यह कमी बहुत ज्यादा नहीं है। गरीबी के आकलन के दौरान भोजन में कैलरी की मात्रा के अलावा परिवारों द्वारा स्वास्थ्य और शिक्षा पर किया जाने वाला खर्च भी गौर किया गया है। धार्मिक समूहों के आधार पर की गई गणना में सिख आबादी में गरीबों का अनुपात ग्रामीण इलाकों में 11.9 फीसदी रहा। शहरी इलाकों में ईसाइयों में गरीबों का अनुपात 12.9 फीसदी रहा जो शहरी इलाकों में अन्य धार्मिक समूहों की तुलना में सबसे कम है। शहरी इलाकों में अखिल भारतीय स्तर पर मुसलमानों में गरीबी का अनुपात सबसे अधिक 33.9 फीसदी है। 

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