कृषि पर आधारित भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण दक्षिण-पश्चिमी मानसून ने मंगलवार को केरल में दस्तक दे दी और रिमझिम बरसती बूंदों से किसानों को राहत मिली। भारतीय मौसम विभाग के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार मानसून केरल पहुंच गया।
केरल में आम तौर पर मानसून की बारिश एक जून से होती है लेकिन वैज्ञानिकों ने कहा कि परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि पूर्वानुमानों के अनुसार, मौसमी बारिश की प्रक्रिया अच्छी है।
राष्ट्रीय जलवायु केंद्र के निदेशक और मानसून का पूर्वानुमान जताने वाले मुख्य अधिकारी ने बताया अभी तक मानसून की स्थिति बहुत अच्छी है और केरल तथा दक्षिणी कर्नाटक के हिस्सों में अगले दो तीन दिनों तक बारिश होगी। उन्होंने कहा कि मानसून के अन्य इलाकों में बढ़ने के लिए अनुकूल स्थिति है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि तूफान मवार की वजह से मानसून के आने में विलंब हुआ। मवार तूफान फिलिपीन के तट पर पश्चिमी प्रशांत महासागर में सक्रिय है।
भारतीय मौसम विभाग ने ऐसे समय में केरल में मानसून के आने की घोषणा की जबकि राज्य और लक्षद्वीप द्वीपसमूह के 14 पर्यवेक्षण केंद्रों में से 50 फीसदी ने 48 घंटे तक बारिश होने का पूर्वानुमान जताया है। मानसून की बारिश कृषि के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कृषि भूमि का केवल 40 फीसदी भाग ही सिंचाई के अंतर्गत आता है। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि क्षेत्र का योगदान केवल 15 फीसदी है लेकिन यह देश की 60 फीसदी आबादी को रोजगार देता है। वर्ष 2010 और 2011 में अच्छे मानसून की वजह से देश में खाद्यान्न का रिकार्ड उत्पादन हुआ जो क्रमश: 24.5 करोड़ टन और 25.256 करोड़ टन था।
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