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मंगलवार, 18 सितंबर 2012

एफडीआई पर लिए गए निर्णय वापस नहीं होंगे.


अर्थव्यवस्था को तेजी रफ्तार पटरी पर लाने के लिए और नए उपायों का संकेत देते हुए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने डीजल, एलपीजी और बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर लिए गए निर्णयों को वापस लेने की संभावना से सोमवार को इनकार किया। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार को अंदर से अथवा बाहर से घटक दलों से कोई खतरा नहीं है।

अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए कई कठिन निर्णयों का संकेत देते हुए चिदंबरम ने कहा कि अब से 30 अक्तूबर के बीच राजस्व विभाग, विनिवेश विभाग और सेबी कई कदम उठाएंगे। कुछ चुनिंदा संवाददाताओं के साथ घंटे भर चली बातचीत के दौरान उन्होंने वोडाफोन कर मुद्दा, जीएसटी, प्रत्यक्ष कर संधि और राजकोषीय स्थिति को मजबूत करने सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि विपक्षी दल इन निर्णय को वापस लेने की मांग करेंगे। जहां तक मुझे मालूम है, हम इन निर्णयों को वापस लेने नहीं जा रहे हैं। चिदंबरम ने कहा कि एक राजनीतिक सरकार जानती है कि क्या किया जा सकता है और क्या नहीं। सलाहकार सलाह दे सकते हैं, लेकिन हम जो कर सकते थे, हमने किया।

संप्रग के घटक दलों विशेषकर तृणमूल कांग्रेस और बाहर से समर्थन दे रही समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी की ओर से किए जा रहे कड़े विरोध के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सरकार में और सरकार के बाहर के हमारे सहयोगी इस बात को समझेंगे और सरकार को अपना समर्थन जारी रखेंगे। हम अपने सहयोगियों को समझाने में सफल रहेंगे। चिदंबरम ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान के संदर्भ में कहा कि वह संकट की गहराई समझती हैं और कोई भी इन निर्णयों की गंभीरता पर सवाल खड़ा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि प्रति वर्ष सब्सिडी पर छह सिलेंडरों की आपूर्ति सीमित कर सरकार ने दूसरों का व्यवहार बदला है। वित्त मंत्री ने कहा कि जिन लोगों को सब्सिडी पर 100 सिलेंडर मिलते थे, उन्हें अब 30 सिलेंडर से अधिक नहीं मिल सकते। इससे उनका व्यवहार बदलेगा। एक बार जब हम एलपीजी को आधार से संबद्ध कर देंगे तो बड़ी संख्या में दुरुपयोग रुकेगा। चिदंबरम ने उन अवधारणाओं को खारिज किया कि सरकार रेटिंग एजेंसियों द्वारा साख घटाए जाने के डर से हरकत में आई।
  
उन्होंने कहा कि सरकार रेटिंग एजेंसियों के लिए नीति नहीं बनाती। सीआरआर में कटौती करने के रिजर्व बैंक के निर्णय का स्वागत करते हुए चिदंबरम ने कहा कि इससे कई दिलचस्प सवाल खड़े हुए हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा और क्या-क्या निर्णय किए जा सकते हैं, इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों पर निर्णय किए जाने हैं, वे मेरे नोटपैड में लिखे हैं। मैंने सेबी, राजस्व विभाग व विनिवेश विभाग के साथ चर्चा की है। इसलिए, मैं उम्मीद करता हूं कि इस बृहस्पतिवार और अगले बृहस्पतिवार को एक कैबिनेट और आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक होगी। आपको अगले कुछ दिनों में इस बारे में पता चल जाएगा। राजकोषीय घाटे के बारे में उन्होंने कहा कि अगर हम 5.1 प्रतिशत (जीडीपी का) हासिल कर सकें तो हम भाग्यशाली होंगे। हमें इसमें कम से कम चूक के लिए अपने राजस्व संसाधनों को बढ़ाना होगा और कुछ खर्चों में कटौती करनी होगी। चिदंबरम ने कहा कि केलकर समिति ने कुछ सुझाव दिए हैं जिस पर सरकार काम कर रही है। 

चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि के बारे में चिदंबरम ने कहा कि इस बारे में अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। पिछले वर्ष जितने भी अनुमान लगाए गए सभी गलत साबित हुए। हमारे पास फिलहाल आर्थिक वृद्धि के दो अनुमान है। एक रिजर्व बैंक का जिसमें आर्थिक वृद्धि 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है और दूसरा प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद का 6.7 प्रतिशत का अनुमान है। हर कोई इसी दायरे की बात कर रहा है। विनिवेश के बारे में उन्होंने कहा कि साल खत्म होने में अब भी छह महीने बाकी है। मैं उम्मीद करता हूं कि बाजार अनुकूल है। साल खत्म होने से पहले सभी चार कंपनियों में विनिवेश कर दिया जाएगा। सभी चार कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए बाजार में उतरना पड़ेगा। हमने 30,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है। मेरा उद्देश्य 30,000 करोड़ रुपये जुटाना है, फिलहाल मैं ऐसा क्यों समझूं कि मैं इसे हासिल नहीं कर सकता। प्रत्यक्ष कर संहिता पर वित्त मंत्री ने कहा कि इसमें भारी बदलाव किया गया है। मुझे प्रत्येक महत्वपूर्ण वर्गों और अध्यायों को देखने के लिए कुछ समय लगाना पड़ेगा।

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