उगते अघ्र्य के साथ सम्पन्न हुआ महापर्व छठ - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 20 नवंबर 2012

उगते अघ्र्य के साथ सम्पन्न हुआ महापर्व छठ


लोकआस्था का महापर्व छठ
लोकआस्था का महापर्व छठ मंगलवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अघ्र्य देने के साथ सम्पन्न हो गया। चार दिवसीय इस अनुष्ठान के चौथे दिन अघ्र्य के बाद व्रतियों ने अन्न-जल ग्रहण कर 'पारण' किया, हालांकि पटना के गंगा तट पर हुए एक हादसे के बाद यहां सुबह का माहौल गमगीन रहा। छठ पर्व को लेकर चार दिनों तक पूरा बिहार भक्ति में डूबा रहा। मुहल्लों से लेकर गंगा तटों तक यानी पूरे इलाके में छठ पूजा के पारम्परिक गीत गूंजते रहे। राजधानी पटना की सभी सड़कों को दुल्हन की तरह सजाया गया था। राजधानी की मुख्य सड़कों से लेकर गलियों तक की सफाई की गई थी। बड़े-बूढ़े और बच्चे सड़कों की सफाई में व्यस्त रहे। प्रत्येक व्यक्ति ने इस पर्व में हाथ बंटाया। 


गंगा तट के अदालतगंज घाट पर सोमवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य देकर लौट रहे व्रतियों के बीच भगदड़ मचने और चचरी पुल के टूट जाने के बाद हुए हादसे में 17 लोगों की जानें चली गईं, जिसके बाद उदीयमान सूर्य को अघ्र्य के लिए सुबह सभी घाटों पर इंतजाम और पुख्ता कर दिए गए थे। 



पटना में कई पूजा समितियों द्वारा भगवान भास्कर की मूर्ति स्थापित की गई थी। कई स्थानों पर पूजा समितियों द्वारा लाइटिंग की व्यवस्था की गई थी। पटना के गंगा तट के छह घाटों के समीप व्रतियों के अघ्र्य देने के लिए अस्थायी तालाब बनाए गए थे जबकि गंगा की धारा दूर होने के कारण पांच घाटों पर चचरी पुल का निर्माण कराया गया था। इधर दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सासाराम, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर, बेतिया और मोतीहारी सहित सभी जिलों के गांव से लेकर शहरों तक लोग छठ पर्व की भक्ति में डूबे रहे। उल्लेखनीय है कि शनिवार को नहाय-खाय के साथ लोक आस्था का यह महापर्व प्रारम्भ हुआ था।

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