बिहार की राजधानी पटना के बुद्ध स्मृति पार्क में आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संघ समागम सोमवार को संपन्न हो गया। इस समागम में विश्व के विभिन्न देशों से आए बौद्ध विद्वानों ने 21वीं शताब्दी में बौद्ध संघों की भूमिका के संबंध में अपने-अपने विचार व्यक्त किए।
समागम के अंतिम दिन संघ द्वारा एक संकल्प भी पारित किया गया। समागम के संयोजक टेनजी प्रियदर्शी रिनपोचे ने संकल्प पाठ करते हुए आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के समागम विभिन्न स्थलों पर नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पाटलिपुत्र करुणा स्तूप अंतर धार्मिक संवाद एवं समझ को बढ़ाने वाला केंद्र होगा। विनय नियम के संरक्षण के लिए संघ सदस्यों के बीच नियमित संवाद जारी रहना चाहिए।
संकल्प में युवा भारतीय मोंक एवं नन के लिए बौद्ध शिक्षण संस्थान की आवश्यकता बताते हुए कहा गया कि बौद्ध धर्म की जन्मस्थली होने के कारण बिहार इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बौद्ध धर्म में महिलाओं की भूमिका के संबंध में वैशाली का विशेष महत्व बताते हुए नन के लिए शिक्षण के लिए विशेष प्रयास पर बल दिया गया। विभिन्न भाषाओं में बौद्ध साहित्यों के प्रकाशन एवं इनके प्रचार-प्रसार का उल्लेख भी संकल्प में किया गया।
संकल्प में कहा गया कि भारत, विशेषकर बिहार में, बौद्ध स्थलों की खुदाई के लिए और अधिक प्रयास करने की जरूरत है तथा स्थानीय लोगों की मदद से इनका संरक्षण किया जाना चाहिए। विश्व के विभिन्न बौद्ध विहारों के सदस्यों को कम प्रसिद्घ स्थलों पर भ्रमण करना चाहिए। आध्यात्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा गया कि इसे ध्यान में रखते हुए ही बुद्धिस्ट सर्किट की स्थापना की जानी चाहिए। इससे पूर्व भारत में बौद्ध विरासत से जुड़े स्थलों के पहचान एवं संरक्षण में बौद्ध संघों की भूमिका के विषय में भारत, हांगकांग एवं इंग्लैंड के विद्वानों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए।
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