मध्य प्रदेश में मंदिरों के सेवादारों व पुजारियों के मानदेय दो गुना कर दिए गए हैं। यह निर्णय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की मंगलवार को हुई बैठक में लिया गया। राज्य में धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के अन्तर्गत शासन-संधारित मंदिरों के सेवादारों व पुजारियों को मानदेय दिया जाता है। वर्तमान में इन्हें मानदेय वर्ष 2003 में किए गए प्रावधानों के अनुसार दिया जाता है।
तय नियमों के मुताबिक जिन मंदिरों के पास भूमि नहीं है, उनके पुजारियों को 500 रुपये प्रतिमाह, जिन मंदिरों के पास पांच एकड़ तक भूमि है उन्हें 350 रुपये प्रतिमाह तथा जिन मंदिरों के पास पांच एकड़ से अधिक और 10 एकड़ तक भूमि है उनके सेवादारों व पुजारियों को 260 रुपये प्रतिमाह की दर से मानदेय दिया जाता है। मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार मानदेय की राशि बढ़कर क्रमश: 1000, 700 तथा 520 रुपये हो जाएगी। बैठक में न्यायाधीश के 138 पद तथा उनके लिए आवश्यक अमले को स्वीकृति दी गई। इनमें से 52 पद जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रवेश स्तर) के हैं।
न्यायाधीशों के अमले के लिए 468 पद सृजित करने की स्वीकृति दी गई। इसके अलावा 86 पद सिविल जज वर्ग दो (प्रवेश स्तर) के स्वीकृत किए गए। इनमें से 43 पद वर्ष 2012-13 में और 43 पद वर्ष 2013-14 में सृजित किए जाएंगे। इनके अमले के लिए 301-301 पद सृजित करने की स्वीकृति दी गई। मंत्रिपरिषद ने तीन सिंचाई परियोजनाओं के लिए 1387 करोड़ की राशि भी मंजूर की है। छतरपुर जिले की बांयी नहर परियोजना के लिए 545 करोड़ 90 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति और निवेश निकासी की अनुमति दी।
परियोजना की रूपांकित सिंचाई क्षमता 43 हजार 850 हेक्टेयर है। रायसेन जिले की बारना वृहद परियोजना के विस्तार तथा इसे सुदृढ़ और आधुनिक बनाने के लिए 581 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति तथा निवेश निकासी की अनुमति दी। इस योजना से वर्ष 2012-13 में 75 हजार 88 हेक्टेयर में सिंचाई की गई। इसी तरह छतरपुर जिले की सिंहपुर बेराज मध्यम परियोजना के लिए 260 करोड़ 63 लाख रुपये की पुनरीक्षित स्वीकृति तथा निवेश निकासी की अनुमति प्रदान की। परियोजना की रूपांकित क्षमता 10 हजार 200 हेक्टेयर है। इसके अतिरिक्त मंत्रि परिषद ने कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी लिए।
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