रेतीले खलिहानों में पसरने लगी है फसलों की गंध
मरु भूमि में खेती-बाड़ी प पशुपालन आर्थिक एवं सामाजिक प्रबंधन के मूलाधार रहे हैं। अल्प वर्षा के बावजूद यहाँ परम्परागत रूप से मामूली खेती का प्रचलन सदियों से रहा है। अब इंदिरा गांधी नहर की बदौलत मरुधरा का काया पलट हो रहा है। परम्परागत खेती में नवाचारों का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ही अब आधुनिक कृषि व नकदी फसलों, फल-सब्जियों की खेती के प्रति रुझान बढ़ा है। खेती की उन्नत विधियों, वैज्ञानिक पद्धतियों व अत्याधुनिक संसाधनों की वजह से कृषि क्षेत्र में निरंतर बदलाव के साथ खुशहाली के द्वार खुलने लगे हैं। किसानों को स्थानीय जलवायु, मृदा, जल की उपलब्धता आदि बिन्दुओं को ध्यान में रख कर उन्नत खेती के लिए प्रोत्साहित करने में कृषि विज्ञान केन्द्र पोकरण-जैसलमेर मार्गदर्शी भूमिका में अपने दायित्वों को बखूबी निभा रहा है। कृषि विज्ञान केन्द्र पोकरण-जैसलमेर ने खेती-बाड़ी के विकास व विस्तार की दिशा में अपने बहुआयामी प्रयासों के माध्यम से हाल के माहों में बेहतर उपलब्धियाँ हासिल की हैं।
प्रशिक्षणों से निखरा हुनर
केन्द्र द्वारा कुल 52 विभिन्न प्रशिक्षणों के माध्यम से 1 हजार 404 प्रशिक्षणार्थियों को लाभान्वित किया गया। इनमें 9 संस्थागत प्रशिक्षणों में 232 व 25 असंस्थागत प्रशिक्षणों में 491, सत्रह सामूहिक/सहयोगी प्रशिक्षणों में 661 तथा अरमोल के एक मात्र प्रशिक्षण में 20 प्रशिक्षणार्थियों को लाभान्वित किया गया।
फसल प्रदर्शन
केन्द्र द्वारा इस अवधि में दलहनी एवं तिलहनी फसलों के अलावा फसल प्रदर्शन में खरीफ के तहत 5 हेक्टर क्षेत्र में ग्वार ( आर.जी.सी. 1017 ) का फसल प्रदर्शन कर 32 किसानों को, 5 हेक्टर क्षेत्र में मंंूग ( आरएमजी -492 ) का प्रदर्शन कर 15 काश्तकारों को, दस हेक्टेयर क्षेत्र में ईसबगोल ( जी-2) का प्रदर्शन कर 30 किसानों को तथा 5 हेक्टर क्षेत्र में जीरा ( जी -4 ) का फसल प्रदर्शन कर 20 किसानों को लाभान्वित किया गया। इसी प्रकार पौध व्याधि नियंत्रण के पर्णीय छिड़काव में जीरे की फसल पर 28-28 हेक्टेयर क्षेत्र में 28-28 प्रदर्शन क्रिया तथा समन्वित कीट व्याधि प्रबंधन (मैन्कोजेब व रोगोर मिश्रण ) किया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा अपनी प्रसार गतिविधियों के अंतर्गत 2 क्षेत्रीय दिवसों से 49 किसानों को लाभान्वित किया गया। वैज्ञानिकों द्वारा 673 कृषक भ्रमण, 31 भ्रमणों को मिलाकर 673 किसानों द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र फार्म भ्रमण, तीन किसान वैज्ञानिक संवादों से 345 किसानों को लाभान्वित किया गया। इसी तरह एक किसान मेला व प्रदर्शनी में डेढ़ हजार किसान तथा 9 फिल्म विडियो-शो के माध्यम से 215 किसानों को लाभान्वित किया गया। इस अवधि में 7 रेडियो वार्ता, 10 सेमिनारों व कार्यशालाओं में वैज्ञानिकों की भागीदारी, 12 अनुसंधान पत्र, 35 व्याख्यान, 2 ऑन फार्म टेस्टिंग, दस सर्वे कार्य तथा 2 रिफ्रेशर कोर्स आयोजित किए गए। इन गतिविधियों के माध्यम से सैकड़ों किसानों ने कृषि विधियों व योजनाओं का लाभ प्राप्त किया।
बहुद्देशीय कार्य क्षेत्र
जैसलमेर-जोधपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 15 पर जिला मुख्यालय से मात्र पाँच किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित कृषि विज्ञान केन्द्र जैसलमेर जिले में कृषि विकास व विस्तार की भागीरथी बहाने वाला संस्थान है। यह एक ऎसा केन्द्र है जो छोटे-मोटे कृष महाविद्यालय से कम नहीं है। भारतीय कृष अनुसंधान परिषद से सहायता प्राप्त और स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर के प्रसार शिक्षा निदेशालय के अधीन यह केन्द्र सन् 1992 से संचालित है। यह वह मंच है जहाँ कृषि विकास से सम्बंधित सभी विषयों पर प्रशिक्षण, सलाह व प्रदर्शन आदि के माध्यम से नवीनतम व लाभदायी वैज्ञानिक जानकारी निःशुल्क दी जाती है। इस केन्द्र पर खेती-बाड़ी से सम्बंधित कोई भी व्यक्ति अद्यतन ज्ञान पा सकता है। केन्द्र द्वारा किसान वर्ग के बहुमुखी विकास के उद्देश्य से सभी आवश्यक विभागों व संस्थाओं में समन्वय स्थापित कर उनके सहयोग से विभिन्न कार्यक्रमों/प्रशिक्षणों का संचालन किया जाता है। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा बारानी क्षेत्र में खरीफ की फसलों की उन्नत खेती व रबी की फसलों में उन्नत कृषि विषयक प्रशिक्षणों से 63 किसानों को लाभान्वित किया गया। इसी प्रकार जिले के विभिन्न हिस्सों में गत वित्तीय वर्ष में आयोजित प्रशिक्षणों में 113 प्रशिक्षणार्थियों को लाभान्वित किया गया। इनमें भाभटसर, बीलिया, धोलिया, सेलवी, बड़ली, सांगड़ आदि में मूंगफली, खरीफ उत्पादन, अरण्डी, रबी फसलों का पाले व बीमारियों से बचाव तथा इनकी कटाई, गहाई एवं भण्डारण की जानकारी पुरुष व महिला किसानों को दी गई।
प्रथम पंक्ति प्रदर्शन व कृषक भ्रमण
कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा 15 हेक्टेर क्षेत्र में प्रथम पंक्ति के 38 प्रदर्शनों में राज-4037 किस्म की गेहूँ फसल का प्रदर्शन किया गया। इसकी विशेषता यह है कि यह किस्म पकाव के समय अधिक गर्मी सहन करने की क्षमता रखती है। कृषि प्रसार गतिविधियों के अंतर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र पोकरण पर एक दिवसीय कृषि वैज्ञानिक संवाद में 100 कृषक मित्रों को लाभान्वित किया गया। यहीं पर 37 कृषकों ने भ्रमण कर अपनी समस्याओं का समाधान पाया।
इस वर्ष ये गतिविधियाँ होंगी
कृषि विज्ञान केन्द द्वारा वर्ष 2013-14 में विभिन्न कृषि विकास एवं गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इनमें कृषकों व कृषक महिलाओं के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण होंगे। ये प्रशिक्षण संस्थागत व असंस्थागत दो प्रकार के हाेंगं। इनमें शस्य विज्ञान में 14 प्रशिक्षणों से 400 प्रशिक्षणार्थियों, उद्यान विज्ञान में 14 प्रशिक्षणों से 350, पशुपालन में 21 प्रशिक्षणों से 550 तथा पौध संरक्षण विषयक 14 प्रशिक्षणों में 420 प्रशिक्षणार्थियों को लाभान्वित किया जाएगा। इसी प्रकार फसल उत्पादन व गृह विज्ञान पर आधारित एक-एक प्रशिक्षण में क्रमशः 25 एवं 30 ग्रामीण युवकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। जिले में चालु वित्तीय वर्ष में प्रथम पंक्ति प्रदर्शन के अंतर्गत ग्वार के 60 प्रदर्शन30 हेक्टेयर में, बाजरा के 30 प्रदर्शन 15 हेक्टेयर में, मोठ के 20 प्रदर्शन 10 हेक्टेयर में, गेहूँ के 30 प्रदर्शन 15 हेक्टेयर में, सरसों के 20 प्रदर्शन 10 हेक्टेयर में, जौ के 40 प्रदर्शन 20 हेक्टेयर में, जीरा के 10 प्रदर्शन 5 हेक्टेयर में, मेथी 20 प्रदर्शन 10 हेक्टेयर में तथा जई ( चारे के लिए ) 20 प्रदर्शन 10 हेक्टेयर में लगाए जाने प्रस्तावित हैं। चालु वित्तीय वर्ष की कार्ययोजना में 4-4 प्रायोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम, क्षेत्र दिवस, विचार गोष्ठी /किसान दिवस ,फिल्म-शो और रेडियो वार्ताएँ भी शामिल हैं। इसी तरह कृषक मेला एवं अंतर्राष्ट्रीय भोजन दिवस का एक-एक कार्यक्रम, कृषि प्रदर्शनी और तकनीकि साहित्य कार्यक्रम 2-2, तीन वैज्ञानिक संवाद, 100 चौखी खेती सदस्यता, 6 रात्रि प्रशिक्षण कार्यक्रम, 40 मिट्टी एवं जल जाँच आदि गतिविधियाँ प्रस्तावित हैं। खेत पर परीक्षण के अंतर्गत बीज मात्रा व उत्पादन, गुणवत्ता, पौध प्रबंधन, ऊर्वरकों के प्रयोग, सिंचाई की क्रांतिक अवस्थाओं आदि का परीक्षण, अध्ययन व मार्गदर्शन की गतिविधियाँ निर्धारित हैं।
---डॉ. दीपक आचार्य---
जिला सूचना एवं जनसम्पर्क अधिकारी,
जैसलमेर

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