साल 2006 के मालेगांव बम धमाकों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से दक्षिणपंथी संगठनों के चार संदिग्ध सदस्यों के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किए जाने के बीच केंद्र ने आतंकवाद से मुकाबले में निर्दोषों की प्रताड़ना रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने का वादा किया।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री आरपी एन सिंह ने मालेगांव में एक मस्जिद के बाहर हुए इस आतंकवादी हमले की जांच के शुरुआती चरण में मुंबई पुलिस और सीबीआई द्वारा नौ मुसलमान युवकों की गिरफ्तारी को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। बाद में सरकार ने इस मामले की जांच एनआईए को सौंप दी थी। एनआईए ने इस मामले में दक्षिणपंथी संगठनों की कथित भूमिका का पता लगाया था।
सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि मालेगांव मामले की जांच दिखाती है कि एनआईए को जांच की जिम्मेदारी सौंपने का सरकार का फैसला सही था। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि निर्दोष लोगों को गिरफ्तार किया गया और उन पर आरोप लगाए गए। हम यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे कि ऐसी घटनाएं फिर न हों। मुंबई पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) और सीबीआई ने पहले नौ मुस्लिम युवकों के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया था और उन पर मालेगांव बम धमाकों को अंजाम देने का आरोप मढ़ा गया। एनआईए द्वारा जमानत अर्जी का विरोध नहीं करने पर पांच साल से जेल में बंद इन युवकों को रिहा किया गया।

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