बसपा प्रमुख मायावती ने हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा जातीय सम्मेलनों पर लगाई गई रोक की पृष्ठभूमि में धर्म के नाम पर बने संगठनों पर भी प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की और कहा कि अब से उनकी पार्टी सर्वसमाज भाईचारा सम्मेलन करेगी।
मायावती ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि अदालत से हमारा आग्रह है कि वह विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बजरंग दल जैसे धार्मिक संगठनों पर भी प्रतिबंध लगाए जो परदे के पीछे से राजनीति करते हैं और मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री तय करने में भूमिका निभाते हैं।
बसपा मुखिया ने पार्टी के जाति आधारित भाईचारा सम्मेलनों का बचाव करते हुए कहा कि हमारा समाज जाति पर आधारित है और इसी वजह से समाज में व्याप्त गैर बराबरी के कारण अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा पिछड़े वर्ग की जातियां सदियों से अपने अधिकारो से वंचित रह गई है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी समतामूलक समाज बनाए जाने की पक्षधर है और पार्टी के जाति आधारित भाईचारा सम्मेलनों का उद्देश्य समाज की विभिन्न जातियों के बीच की दूरी मिटाना है। बसपा मुखिया ने कहा कि हमारी पार्टी के यह सम्मेलन राजनीति के लिए नहीं बल्कि समाज को जोड़ने के लिए थे - हमारा संगठन राजनीतिक ही नहीं बल्कि एक सामाजिक संगठन पहले है।
अभी सात जुलाई को राजधानी के रमाबाई मैदान पर हुई पार्टी के ब्रह्मामण भाईचारा सम्मेलन का जिक्र करते हुए, बसपा मुखिया ने कहा कि यदि कुछ लोगों को हमारे तरीके पर आपत्ति है तो हम उसमें संशोधन कर लेंगे, मगर समतामूलक समाज बनाने के अपने आंदोलन को जारी रखेगे और अब से पार्टी सर्वसमाज भाईचारा सम्मेलनों के जरिए अपने इस अभियान को आगे बढ़ाएगी।
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