एक सिख अधिकार समूह ने कहा है कि वह मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को अमेरिकी अदालत के सम्मन देने के लिए हेग सेवा संधि (हेग सर्विस ट्रीटी) के प्रावधानों का उपयोग करेगा। हेग सेवा संधि पर भारत ने हस्ताक्षर किए हैं। इस संधि के अनुसार, इस पर हस्ताक्षर करने वाले देशों के बीच, राजनयिक माध्यम के बिना ही न्यायिक दस्तावेज सौंपे जा सकते हैं।
बादल के खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप में मुकदमा सिख फॉर जस्टिस संगठन और अकाली दल (मान) ने दायर किया है। बादल को पिछले दिनों सम्मन सौंपने में नाकामी के कारण संगठन ने हेग सेवा संधि के प्रावधानों का उपयोग करते हुए उन्हें सम्मन सौंपने का फैसला किया है।
सिख फॉर जस्टिस के कानूनी सलाहकार गुरपतवंत सिंह पन्नुन ने कहा बादल को भारत में मुख्य फेडरल सम्मन सौंपने के लिए हम हेग सेवा संधि का उपयोग करेंगे ताकि पंजाब के मुख्यमंत्री को राज्य में सिखों को प्रताडित करने और उनको मार डालने के जिम्मेदार पुलिस बल को बचाने के लिए विस्कोन्सिन फेडरल अदालत में जवाबदेह बनाया जा सके।
ईस्टन डिस्ट्रिक्ट ऑफ विस्कोन्सिन ने बादल को सम्मन देने के लिए एसजेएफ को 24 अक्टूबर तक का समय दिया है। शिकायत में कहा गया है कि बादल और उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान उन पुलिस अधिकारियों का बचाव किया और उन्हें पदोन्नति दी जो मानवाधिकार उल्लंघन, प्रताड़ना और कानून के दायरे से परे जा कर मार डालने की कार्रवाइयों में लिप्त थे।
एसजेएफ का कहना है कि उसने भारत में बादल को सम्मन देने के लिए वॉशिंगटन की कंपनी प्रॉसेस फॉरवर्डिंग इंटरनेश्नल (पीएफआई) की सेवाएं ली हैं। इस अधिकार समूह का कहना है कि हेग सेवा संधि के तहत भारत सरकार ने विदेशी अदालतों से न्यायिक दस्तावेज हासिल करने और गंतव्य तक उन्हें सौंपने के लिए एक केंद्रीय प्राधिकार की स्थापना की है।
बादल के खिलाफ ऐसा ही मामला पिछले साल विस्कोन्सिन की एक अदालत ने खारिज कर दिया था, क्योंकि एसजेएफ ने बादल के बजाय किसी दूसरे व्यक्ति को सम्मन दे दिए थे।
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