इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया है। भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा बैठक पर रोक लगाने से इनकार करने के तुरंत बाद बैठक की और मोदी पर आजीवन प्रतिबंध का फैसला किया।
सुप्रीम कोर्ट ने इस बाबत ललित मोदी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह बीसीसीआई का अंदरूनी मामला है और कोर्ट इसमें दखल नहीं देगा। सुप्रीम कोर्ट ने ललित मोदी से कहा कि वह बीसीसीआई की विशेष आम सभा के समक्ष पेश होकर अपने खिलाफ लगे आरोपों पर सफाई दें। हालांकि प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद ललित मोदी अब भी बीसीसीआई के निर्णय को अदालत में चुनौती दे सकते हैं।
इससे पहले, दिल्ली हाइकोर्ट द्वारा बीसीसीआई की इस बैठक पर लगी रोक को हटाने के फैसले के खिलाफ ललित मोदी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका को भी बुधवार को ही खारिज किया गया। दरअसल, दिल्ली हाइकोर्ट ने बैठक पर लगी रोक को हटा दिया था, जिसके बाद मोदी पर आजीवन प्रतिबंध के लिए चेन्नई में बीसीसीआई की बैठक बुलाई गई थी। मोदी पर बैन लगाने का फैसला बीसीसीआई की जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बीसीसीआई को आईपीएल में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में पूर्व आयुक्त ललित मोदी पर अनुशासन समिति की रिपोर्ट पर विचार करने के लिए आम सभा की विशेष बैठक आयोजित करने की अनुमति दे दी थी। न्यायमूर्ति वीके शाली ने निचली अदालत के 21 सितंबर के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें बीसीसीआई को आम सभा की विशेष बैठक आयोजित करने से रोका गया था। अदालत ने कहा कि जहां तक बीसीसीआई की अपील की बात है, इसकी अनुमति दी जाती है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ मोदी की इस जवाबी अपील को भी खारिज कर दिया, जिसमें अदालत ने एन श्रीनिवासन द्वारा बीसीसीआई में संजय पटेल और जगमोहन डालमिया की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि ललित मोदी की अपील को इसलिए खारिज किया गया, क्योंकि उनके द्वारा जिस तरह की राहत मांगी गई, वह निचली अदालत में अपनी याचिका में भी इसी राहत का दावा कर चुके हैं।
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