सुनियोजित तो नहीं था मुख्य सचिव के खिलाफ षड़यंत्र!
- पीएमओ ने दिए चर्चित नौकरशाह के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच के आदेश!
देहरादून, 16 सितम्बर। बीती तीन सितम्बर को प्रदेश मंत्रिमण्डल की बैठक में मुख्य सचिव सहित ब्यूरोक्रेसी के खिलाफ जो हंगामा हुआ, उसकी कलई अब धीरे-धीरे खुलने लगी है। कुछ लोग इसे प्रदेश के मुख्य सचिव सुभाष कुमार के खिलाफ सुनियोजित षडयंत्र बता रहे हैं, तो कुछ लोग इस हंगामे के सूत्रधारों की कुर्सी बचाने की कवायद। गौरतलब हो कि बीती तीन सितम्बर को प्रदेश मंत्रिमण्डल की बैठक में बसपा कोटे से कैबिनेट मंत्री बनाए गए सुरेन्द्र राकेश ने प्रोटोकोल का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री को जमकर कोसा था। उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष यह आरोप लगाए कि मुख्य सचिव सहित प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी प्रोटोकोल का पालन नहीं कर रहे हैं। इस हंगामे में उनके साथ शिक्षा मंत्री मत्री प्रसाद नैथानी, श्रम मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल तथा उक्रांद कोटे से मंत्री प्रीतम सिंह पंवार भी शामिल थे। इस पूरे हंगामे की कड़ियां अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं कि आखिर एक कैबिनेट मंत्री को यह सब क्यों करना पड़ा, जबकि प्रोटोकोल के हिसाब से कैबिनेट मंत्री मुख्य सचिव से उपर है और वह मुख्य सचिव को कभी भी अपने कार्यालय में तलब कर सकता है, लेकिन सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि आखिर कैबिनेट मंत्री को मुख्य सचिव के कार्यालय कक्ष में जाने की जरूरत क्यों पड़ी। इसके पीछे पुष्ट सूत्रों का दावा है कि मुख्य सचिव बनने की पांत में खड़े एक प्रमुख सचिव रहे नौकरशाह का यह सारा सुनियोजित षड़यंत था। उसी के कहने पर चारों मंत्रियों ने जहां मुख्यमंत्री से समक्ष प्रोटोकोल को लेकर आक्रोश व्यक्त किया वहीं कैबिनेट मीटिंग में मुख्य सचिव को अपनी ताकत का भी अहसास कराया। सूत्रों ने तो यह भी बताया है कि मुख्य सचिव पर इसलिए सुनियोजित हमला किया गया, ताकि वे नाराज होकर मुख्य सचिव का दायित्व छोड़ किसी अन्य स्थान पर समायोजित हो जाएं। अब यह बात भी उठनी शुरू हो गई है कि मुख्य सचिव के हटने के बाद आखिर किसको कुर्सी पर बैठने का मौका मिलता, कहीं यह सुनियोजित षड़यंत उसी मौकापरस्त नौकरशाह का तो नहीं, जिसने मुख्य सचिव सुभाष कुमार पर मंत्रियों के कंधे में बंदूक रखकर स्वंय गोली चलाई है। सूत्रों का तो यह भी दावा है कि इस हंगामे के लिए नौकरशाह द्वारा हंगामा करने वाले लोगों को थैली तक भेंट की गई है। इस झगड़े का दूसरा पहलू यह भी बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री परिवहन मंत्री के अस्वस्था को देखते हुए बसपा कोटे से किसी अन्य को अपने मंत्रिमण्डल में शामिल करने की योजना बना रहे थे, यहां यह भी जानकारी प्रकाश में आई है कि वर्तमान परिवहन मंत्री से बसपा सुप्रीमों मायावती भी खासी नाराज हैं, वहीं मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के बीच वर्तमान में मधुर संबंध नहीं है, यही कारण है कि उन पर भी मंत्रिमण्डल में छटनी की तलवार लटक रही थी। ऐसे में यह बात भी चर्चा में है कि अपने को बहुगुणा मंत्रिमण्डल में सुरक्षित रखने को लेकर तीन सितम्बर की कैबिनेट बैठक में उन मंत्रिनों ने मुख्यमंत्री को अपनी शक्ति का अहसास कराया, जिनके दम पर बहुगुणा सरकार चल रही है। वहीं इस हंगामे के कई और भी संदेश कांग्रेस आलाकमान तक गए हैं, क्योंकि वर्तमान में मुख्यमंत्री की कुर्सी भी डगमगा रही है, ऐसे में मुख्यमंत्री खेमें ने केंद्रीय आलाकमान तक यह संदेश देने की भी कोशिश की है कि यदि बहुगुणा को मुख्यमंत्री पद से हटाया तो ये चारों मंत्री कांग्रेस को समर्थन नहीं देंगे और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार अल्पमत में आ जाएगी, लिहाजा इस झगड़े का फायदा मुख्य सचिव बनने की आस लगाए बैठे उस नौकरशाह को हो या न हो, लेकिन मुख्यमंत्री को इस हंगामे फायदा फिलहाल मिलता दिख रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार केंद्र में वरिष्ठ नौकरशाह वी.के. दुग्गल की रिपोर्ट पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने प्रदेश के इसी नौकरशाह पर जांच आरंभ कर दी है। इस जांच को लेकर मुख्यमंत्री की भी स्वीकृति दे दी गई है। सूत्रों का यह दावा है कि प्रमुख सचिव रहे इस अधिकारी के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच के बाद कुछ न कुछ निकलकर बाहर अवश्य आएगा, क्योंकि उक्त नौकरशाह प्रदेश में तमाम गड़बड़-घोटालों के लिए कुख्यात रहा है।
मुझे धमकी देना बंद करे सरकार: निशंक
देहरादून, 16 सितम्बर (राजेन्द्र जोशी)। सरकार मुझे धमकी दे रही है और सरकार यह भी बताए कि मेरे उपर कितने केस हैं और कहां-कहां है, यह बातें पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार अंतिम सांस ले रही है, वहीं डा. निश्ंाक ने मुख्यमंत्री को चेतावनी भी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बचा सकते हैं तो अपनी सरकार बचा लें। सोमवार को यहां भाजपा कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री डा. निशंक ने कहा कि मैने सरकार से आपदा के बारे में श्वेत पत्र जारी करने को कहा तो सरकार मुझे धमका रही है, सरकार को बताना चाहिए कि मेरे उपर कितने कसे हैं और कहां-कहां है। सरकार इस प्रकार के बयानों को देकर लोगों को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार अंतिम सांस भर रही है और कभी भी प्रदेश सरकार का सफाया हो सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को को आपदा के बाद किए गए विकास कार्यों पर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए और बताना चाहिए कि उसको केंद्र सरकार द्वारा कितने पैसे मिले और अन्य संस्थानों ने कितने पैसे दिए और सरकार ने वह पैसा कहां खर्च किया है। सरकार ने आपदा में प्रयोग किए हैलीकाप्टरों का कितना पैसा दिया है। उन्होंने कहा कि यदि ये सरकार श्वेत पत्र जारी नहीं करती है तो उसे राज्यपाल को बर्खास्त करना चाहिए, उन्होंने कहा कि केदारनाथ में सफाई का काम करनी वाली ईपीआईएल कंपनी के साथ सरकार के क्या संबंध है सरकार को बतना चाहिए, केदारनाथ में जब शव पड़े हैं तो वहां पूजा का क्या औचित्य। पूजा के लिए 142 लोगों की जो सूची सरकार ने बनाई थी उसके क्या मानक थे और लक्ष्मी रासा किस हैसियत से पूजा में शामिल हुई थी, इसका जवाब भी सरकार को देना चाहिए। पूजा से पहले हरक सिंह रावत किसके घर में रूके थे और अन्य अधिकारी कहां रूके थे, इस बारे में सरकार को जनता को बताना होगा। पत्रकार वार्ता में भाजपा मीडिया प्रभारी उमेश अग्रवाल, प्रकाश सुमध ध्यानी आदि नेता मौजूद थे।
बहुगुणा सरकार पूरी तरह दागदार: अजय भट्ट
देहरादून, 16 सितम्बर (राजेन्द्र जोशी)। विधानसभा सत्र में विपक्ष सत्ता पक्ष को घेरने का कोई अवसर छोडऩा नहीं चाहता। सत्ता पक्ष जहां अपनी तैयारियों में जुटा है, वहीं विपक्ष अपने प्रश्नों के हथियारों को और धारदार बना रहा है । नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट किन प्रमुख बिंदुओं पर सत्ता पक्ष को घेरने का मन बना रहे है। इसी संदर्भ में उन्होंने हमसे वार्ता में कुछ प्रमुख जानकारियां दी। भट्ट का कहना है कि सत्ता पक्ष सही मायने में न तो सत्ता रह गया है और न ही पक्ष रह गया है। उसे अपने लोग ही बुरी तरह से घेरे है। रही-सही कसर आपदा ने पूरी कर दी है। सच तो यह है कि इस सरकार को सुपर फ्लाप सरकार की संज्ञा दी जाए तो अतिसंयोक्ति नहीं होगी। अजय भट्ट ने कहा कि यदि सत्ता पक्ष में एक दो कमियां हो तो उन्हें गिनाया जाए। यह सरकार तो छलनी की तरह पूरी तरह छेददार और दागदार है। उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्तमान सत्र की अवधि जनबूझकर इतनी कम रखी है ताकि तो उसे बचने का बहाना मिल जाए। सदन की अवधि कम होने से न तो प्रश्र उठेंगे और न ही सरकार को असुविधा झेलनी पड़ेगी। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कम अवधि के बावजूद सरकार को प्रश्रों के जाल में घेरेंगे तथा जवाब देने पर मजबूर करेंगे। यह घेराव सदन के बाहर और भीतर दोनों तरफ होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में इतनी भीषण आपदा आयी। आपदा की मार से कराह रहे जनजीवन के लिए सरकार ने अब तक भी प्रभावकारी कदम नहीं उठाये हैं। सर्दियां आ गयी है जनता का राम ही मालिक । सरकार लगतार पग-पग पर बयान बदलती रहती है। केदारनाथ मंदिर की पूजा कराने के लिए सरकार एक महीने पहले योजना बनाई थी लगा था कि मार्ग बन जाएंगे पूजा हो जाएगी और यात्रा प्रारंभ हो जाएगी और उत्तराखंड की आर्थिकी ठीक होने लगेगी । लेकिन इसमें कही भी कोई कार्य में सरकार की तटस्थता नहीं दिखी । अजय भट्ट ने कहा कि कितना दुर्भाग्य है कि केदारनाथ की पूजा प्रारंभ करा दी पर जनता वहां तक अभी पहुंच नहीं सकती। बद्रीनाथ में एक हजार से अधिक वाहन अब भी फंसे हैं। उन्हें निकालने का कोई प्रबंध नहीं किया जा रहा है। आपदा पीड़ित जनता को अब तक राशन उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। ग्रामीण अब भी अपने-अपने क्षेत्रों में पुल बनाने के लिए लट्ठों आदि का प्रबंध कर रहे हैं आौर थोड़ा बहुत प्रबंध भी कर लिया है पर नकारा सरकार की ओर से अब तक कुछ भी नहीं हो पाया है। मरता तो कया नहीं करता तर्ज पर ग्रामीण अपनी सुविधाओं के लिए स्वयं श्रमदान कर रहे है। कानून व्यवस्था की स्थिति यह है मंत्रियों के घरों से अपराधी पकड़े जा रहे है। प्रदेश में माफिया राज लाया जा रहा है जो सबसे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण है। भट्ट ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी के कार्यकाल में माफिया राज खत्म करने के लिए रेता, बजरी का काम जीएमवीएन, केएमवीएन, वननिगम को दिया गया था ताकि अपराधियों का साम्राज्य खत्म हो जाए पर यह सरकार पुनरू खनन निजी हाथ में देकर माफिया राज लाना चाह रही है। माफियाओं के आते ही यहां के लोगों को काम मिलना बंद हो जाएगा। सरकार का राजस्व कम हो जाएगा, अपराधिक वारदतें बढेंगी,माफियां अपने साथ अपने मजदूर अपने क ांटे तथा अपने वाहन लायेंगे जिससे यहां बेरोजगारी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि यह सरकार चाहती है कि पूरा प्रदेश अव्यवस्थाओं के जाल में घिर जाए। इसलिए यह माफियां के हाथों में दे रही है ताकि करोड़ो की तस्करी फिर शुरू हो जाए। खनन का कारोबार निजी हाथों में देना बताता है। भट्ट का कहना है कि आखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सातवीं बार डीएवी कॉलेज में जीत हासिल की। उसके बावजूद छात्रों को जिस ढंग से पीटा गया। वह इस बात का प्रतीक है कहीं न कहीं सरकार सब कुछ ठीक-ठाक नहीं रहना देना चाहती। खाद्यान्न योजना की चर्चा करते हुए अजय भट्ट ने कहा कि यह सरकार जनता की नहीं घोटाले बाजों की चिंतक है। अटल खाद्यान्न योजना की चर्चा करते हुए भट्ट ने कहा कि अटल खाद्यान्न योजना के तहत प्रति परिवार ३५ किलो अनाज मिल रहा था। अब घटा दिया गया है। अब दो व्यक्तियों की यूनिट वाले परिवारों को केवल10 किलो अनाज मिलेगा। यह सरकार भ्रष्ट नाकारा और जनविरोधी सरकार है। लगभग एक दर्जन और मुद्दे है जिन पर हम सदन में सदन के बाहर घेरने में कोताही नहीं बरतेंगे।
रेलवे कर्मियों ने 11 सूत्रीय मांगों को लेकर दिया धरना
देहरादून, 16 सितम्बर (राजेन्द्र जोशी)। सोमवार को अपनी 11 सूत्राीय मांगों को लेकर नारदर्न रेलवे मैन्स यूनियन देहरादून शाखा ने रेलवे स्टेशन पर धरना दिया। रेलवे कर्मियों ने केन्द्र सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया। ऑल इण्डिया रेवले मैन्स फैडरेशन के समर्थन में आज यूनियन के बैनरतले रेलवे कर्मचारी धरने पर बैठे। यूनियन द्वारा मांग की जा रही है कि उत्पादकता के आधार पर बोनस की सीलिंग को बढ़ाया जायेे। जबकि भारत सरकार बोनस को कम करना चाहती है। नई पेंशन स्कीम को तत्काल समाप्त कर सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को लागू किया जाये। रेलवे बोर्ड के समझौते के अनुसार सभी कोटियो की कैडर रिस्ट्रक्चरिंग को तुरंत लागू किया जाये। यूनियन द्वारा मांग की जा रही है कि छठवें वेतन आयोग की वेतन विसंगतियों को शीघ्र हल करते हुए तकनीशियन-2 को तकनीशियन-1 के ग्रेड पे में समाहित किया जाये। वरिष्ठ पर्यवेक्षकों को 4600 के स्थान पर 4800 का ग्रेड दिया जाये। एमएसीपी की विसंगतियों को शीघ्र हल करते हुए ग्रेड पे 2000 के स्थान पर वास्तविक प्रोन्नति का ग्रेड दिया जाये। सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग का गठन शीघ्र किया जाये। रनिंग कर्मचारियों के वेतनमानों, कार्यदशाओं, भत्तों एवं कार्य घंटों में सुधार किया जाये। रनिंग एवं संरक्षा कोटियों में कार्यरत कर्मचारियों के कार्य घंटों म सुधार के लिए गठित हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट को जारी कर तुरंत लागू किया जाये। रेलवे बोर्ड द्वारा गठित ट्रैक मैन पैकेज कमेटी की मूल सिफारिशों को तुरंत लागू किया जाये। रेलवे कॉलोनियां, सड़क व कार्यालय खस्ताहाल स्थिति में हैं। इनके सुधार कार्य अविलंब शुरू किये जायें। महिला रेल कर्मियों के लिए कार्य स्थल पर मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई जायें। धरने पर उग्रसेन सिंह, केपी चौबे, हरिओम सिंह, आरसी यादव, मुकेश चतुर्वेदी, जीएन श्रीवास्तव, लालता प्रसाद, जगदीश सिंह, विजय प्रताप पाल, सुखवीर, रमेश कुमार, तजेन्द्र सिंह, धमेन्द्र कुमार तथा हरनाम सिंह आदि बैठे।
राष्ट्रीय खाद्य योजना में लाभर्थियों के चयन हेतु अधिकारियों को दिशनिर्देश जारी
रूद्रप्रयाग/देहरादून, 16 सितम्बर (राजेन्द्र जोशी)। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय खाद्य योजना के लाभार्थियों के चयन हेतु ग्रमीण क्षेत्रों में खंड विकास अधिकारियों एवं शहरी क्षेत्रों में अधिशासी अधिकारियों को लक्ष्य एवं दिशानिर्देश उपलब्ध करा दिये गये है।यह जानकारी जिला पूर्ति अधिकारी जगदीश वर्मा ने देते हुए बताया कि सर्वसाधारण को सूचित करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सभा की खुली बैठक में लक्ष्य के अनुरूप लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया प्रेक्षक की उपस्थिति में की जायेगी साथ ही ग्राम सभा की बैठक में पात्र परिवारों में एक व्यस्क सदस्य की उपस्थिति अनिवार्य होगी अन्यथा पात्रता में परिवार सम्मिलित नहीं होगा। उन्होंने बताया कि खाद्य सुरक्षा योजना में राशन कार्ड 18 वर्ष से ऊपर की वरिष्ठतम महिला के नाम से बनाया जाएगा। उन्हांेने बताया कि ऐसे सभी एपीएल श्रेणी राशन कार्ड धारक जिनके परिवार की कुल मासिक आय 15000 रू. से कम हैं, वे इस योजना में सम्मिलित होने के लिए शहरी क्षेत्र में पूर्ति निरीक्षक के नेतृत्व में गठित टीम को आवेदन कर सकतेे हैं। खाद्य सुरक्षा योजना में आदिम आदिवासी तथा सीमान्त क्षेत्रों में निर्वासित आदिवासी, ऐसा परिवार जिसका संचालन मुखिया के तौर पर विकलांग, असाध्य रोग से पीडित, विधवा या अकेली महिला, 60 वर्ष या अधिक आयु वाला व्यक्ति कर रहा हो और सभी के परिवार की कुल मासिक आय 15000 से कम हो वे इस योजना में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे परिवार जिसके पास राजस्व अभिलेखों में दर्ज सिंचित भूमि का कुल क्षेत्रफल 2 हैक्टेयर से कम हो अथवा 1 हैक्टेयर सिंचित भूमि तथा 2 हैक्टेयर से कम हो अथवा 1 हैक्टेयर सिंचित भूमि तथा 2 हैक्टेयर असिंचित से कम हो अथवा कुल क्षेत्र फल 4 हैक्टेयर असिंचित भूमि से कम हो। ऐसे व्यक्ति कुली, मजदूर, कूड़ा बीनने वाले मोची, लौहार, बढई, ग्रामीण दस्तकार, घरों में काम करने वाले सेवक, सफाई कर्मी, ऐसा परिवार जो किसी किसान के अधीन उनकी भूमि पर खेत जोतता हो, शहरी क्षेत्रों में स्थापित मलिन एवं झुग्गी झोपड़ी में निवासरत परिवार, ऐसा परिवार जिसकी वार्षिक आय पर आयकर देयता न बनती हो, ऐसे सरकारी,गैर सरकारी कर्मचारी जिसकी मासिक आय 15000रू. से अधिक न हो, ऐसे संचालित संगठन अथवा आश्रम में निवासित ऐेसे व्यक्ति जो बेघर हों, इस योजना में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिनका चयन शहर,ग्रामीण को सौंपे गये लक्ष्य के अनुरूप किया जायेगा। उन्होंने बताया कि योजना में शामिल होने के लिए आवेदनकर्ता अपने पुराने राशन कार्ड की फोटो प्रति तहसीलदार द्वारा निर्गत आय प्रमाण पत्र, वोटर आईडी, कार्ड की छाया प्रति,पैन कार्ड की छाया प्रति,आधार कार्ड की फोटो प्रति,विद्युत बिल एवं परिवार की वरिष्ठतम महिला की तीन फोटो सहित आवेदन करना होगा।
बीटीसी प्रशिक्षित करेंगे विधानसभा का घेराव
देहरादून, 16 सितम्बर (राजेन्द्र जोशी)। बीटीसी प्रशिक्षितों की नियुक्ति सरकार द्वारा पुनः जारी न किये जाने को लेकर बीटीसी प्रशिक्षित जनवरी से दिये गये शांतिपूर्वक धरना की राज्य सरकार द्वारा उपेक्षा किये जाने व नियुक्ति जारी न करने को लेकर बीटीसी प्रशिक्षित संगठन 19 सितंबर को विधानसभा का घेराव करेंगे। जानकारी के अनुसार बीटीसी प्रशिक्षित संगठन के प्रांतीय महासचिव यशवंत सिंह गुसाई ने बताया कि पूर्व में जारी नियुक्ति को सरकार द्वारा जारी न किये जाने पर विधानसभा का घेराव करने की चेतावनी दी गई है। कहा कि 868 बीटीसी प्रशिक्षितों की नियुक्ति आदेश नवम्बर 2011 में करने के पश्चात उच्च न्यायलय ने स्थगन आदेश पारित किया। जिसे 9 नवम्बर 2012 को हटा भी दिया गया। इसके बाद प्रशिक्षितों ने मुख्यमंत्री,शिक्षा मंत्री,सचिव विधालयी शिक्षा व निदेशक प्राथमिक शिक्षा से रूकी हुई नियुक्ति को शुरू करने का अनुरोध किया। परंतु राज्य सरकार ने इस और कोई ध्यान नही दिया। जारी नियुक्ति को शुरू करने को लेकर प्रशिक्षित 1 जनवरी से शांतिपूर्वक धरना दे रहे है। जिसकी सरकार द्वारा लगातार उपेक्षा की जा रही है। जिससे प्रशिक्षितों में काफी रोष व्याप्त है। यही बजह है कि प्रशिक्षित अब अपनी मांगों को लेकर 19 सितंबर को विधानसभा का घेराव करने के लिए जायेंगे।
महिलाओं के अधिकारों का खुलेआम उल्लंघन
- 6 माह बाद भी नही पकड़े गए दहेज उत्पीड़न के आरोपी
- जिलाधिकारी के माध्मय से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
पिथौरागढ़/देहरादून, 16 सितम्बर (राजेन्द्र जोशी)। जहां एक ओर महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए देश भर में मुहिम चलायी जा रही है। वहीं सीमांत जिले में पुलिस व राजनैतिक संरक्षण से महिलाओं के अधिकारों का जमकर उल्लंघन किया जा रहा है। हाल यह है कि 6 माह बीत जाने के बाद भी दहेज उत्पीड़न के आरोपी खुलेआम घुम रहे है। बीते 4 मार्च को सपना गुरूरानी ने अपने ससुर, सास गिरीश, विमला गुरूरानी व पति सोमेश गुरूरानी के खिलाफ दहेज उत्पीड़न आदि की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करायी। लेकिन 6 माह बाद भी पुलिस आरोपियों को पकड़ नही पायी है। पीड़िता सपना गुरूरानी ने बताया कि पुलिस की लापरवाही के कारण आरोपी खुले घुम रहे है। रिपोर्ट दर्ज होने के तुरंत बाद उनकी गिरफतारी होनी थी लेकिन यह नही हुआ। आरोपियों ने हाई कोर्ट में जमानत की अर्जी दी। सास-ससुर को कन्डीशनल जमानत दे दी गयी। लेकिन पति सोमेश गुरूरानी को जमानत नही मिली। रिपोर्ट दर्ज होने के 86 दिन तक आरोपी पुलिस की पकड़ में नही आया। इसके बाद मेरे पति ने उच्च न्यायालय में काउसिलिंग की गुहार लगायी। कुछ समय तक काउसिलिंग चली लेकिन कुछ नही हुआ। इस बीच मुझे फोन पर धमकियां भी मिली। 29 अगस्त को हाईकोर्ट ने पति की गिरफतारी के आदेश जारी करें। लेकिन अभी तक आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर खुलेआम घूम रहा है। वह केस वापस लेने का दवाब बना रहा है। उसने मेरे तीन भाईयों के खिलाफ मारपीट करने का भी झूठा आरोप लगाया है और पुलिस को पत्र दिया है। उन्होंने व उनके पिता गंगा दत्त द्विवेदी ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज न्याय की गुहार लगायी है। जिलाधिकारी डा नीरज खैरवाल ने कहा कि किसी भी महिला के साथ अन्याय नही होने दिया जाएगा। अगर ऐसा मामला है तो यह गंभीर है पूरे मामले की जांच की जाएगी। इस अवसर पर किसान महासभा के जिलाध्यक्ष जगत मर्तोलिया, सुशील खत्री सहित महिला संगठन के लोग शामिल थे।
उच्च शिक्षा की समीक्षा
हल्द्वानी/देहरादून, 16 सितम्बर (राजेन्द्र जोशी)। स्पष्ट एवं पारदर्शी स्थानान्तरण नीति न होने के कारण उच्च
शिक्षा महकमे के अन्तर्गत संचालित अनेकों महाविद्यालयों में प्रधायापकों के अनेकों पद खाली पड़े हैं। इसके चलते शिक्षण कार्य प्रभावित हैं वहीं उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवालिया निशान है। ये बात संसदीय सचिव उच्च शिक्षा मनोज तिवारी ने सर्किट हाउस में उच्च शिक्षा की समीक्षा करते हुए कही। उन्होंने कहा कि स्पष्ट स्थानान्तरण नीति न होने के कारण मैदानी क्षेत्र के महाविद्यालयों में प्रवक्ताओं की भरमार है जबकि पर्वतीय क्षेत्र के महाविद्यालयों में पद रिक्त है। उन्होंने उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. श्रीमती मुकुल पंत को निर्देश दिए कि वे महाविद्यालयों में प्राध्यापकों के पदांे पर पारदर्शी स्थानान्तरण नीति बनाकर शासन को भेंजे ताकि तैयार नीति के अनुसार स्थानान्तरण कर मैदानी क्षेत्रों के साथ पर्वतीय क्षेत्रों के शत-प्रतिशत महाविद्यालयों में प्राध्यापकों की तैनाती करायी जा सके। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 102 विजिटिंग प्रवक्ता कार्यरत है जिन्हें नियमित किया जा चुका है। विभिन्न महाविद्यालयों में 433 संविदा प्रवक्ता कार्यरत है। लोकसेवा आयोग द्वारा 273 प्रवक्ताओं का चयन कर लिया गया है जिन्हें जल्द ही पर्वतीय क्षेत्र के महाविद्यालयों में भेजा जायेगा। उन्होंने बताया कि महाविद्यालयों में लगभग 200 पद लैब सहायक, लिपिक एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त हैं जिन्हें भरे जाने के लिए कार्यवाही की जा रही है। तिवारी ने बताया कि हल्द्वानी गौलापार में उच्च शिक्षा निदेशालय का भव्य भवन बनाया जायेगा जिसकी लागत पांच करोड़ की होगी। उन्होंने बताया कि पांच करोड़ के इस्टीमेट के सापेक्ष सरकार द्वारा एक करोड़ की धनराशि अवमुक्त हो चुकी है। उन्होंने निदेशक से कहा कि जहां नये महाविद्यालय खोले जाने हैं वहां भूमि आदि का चयन स्थानीय जिला प्रशासन के सहयोग से सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि भारत सरकार से प्रदेश के महाविद्यालयों के उच्चीकरण, विस्तार एवं विकास के लिए इक्कीस करोड़ की विशेष सहायता की विशेष मांग की गयी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा भी उच्च शिक्षा के बजट में बढ़ोत्तरी की जायेगी। बैठक के उपरान्त संसदीय सचिव उच्च शिक्षा द्वारा गौलापार स्थित उच्च शिक्षा निदेशालय के भवन निर्माण हेतु चयनित भूमि का निरीक्षण किया गया। बैठक में संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. गंगोत्री त्रिपाठी, सहायक निदेकश डॉ. अनुराग अग्रवाल व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
जनकल्याणकारी एवं जनपयोगी प्रकाशन किया जा रहा
हल्द्वानी/देहरादून, 16 सितम्बर (राजेन्द्र जोशी)। सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी एवं जनपयोगी योजनाओं के प्रचार प्रसार के लिए सूचना एवं लोकसम्पर्क विभाग द्वारा साहित्य का प्रकाशन किया जा रहा है। ये साहित्य जनसाधारण के लिए प्रदेश के समस्त जिला सूचना कार्यालयों में उपलब्ध है। जानकारी देते हुए सहायक सूचना निदेशक योगेश मिश्रा ने बताया कि सूचना निदेशालय द्वारा सरकार की योजनाओं पर आधारित अद्यतन प्रचार साहित्य प्राप्त हुआ है। सरकार की महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय खादी सुरक्षा योजना का प्रचार साहित्य जिला सूचना कार्यालयों के अलावा जिला पूर्ति कार्यालयों तथा खण्ड विकास अधिकारी कार्यालयों को उपलब्ध कराया गया है। सूचना विभाग द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका देवभूमि संदेश के अलावा मुख्यमंत्री बालिका शिक्षा प्रोत्साहन योजना विषयक प्रचार साहित्य भी जनसाधारण के लिए निःशुल्क उपलब्ध है। यह प्रचार साहित्य तिकोनिया स्थित मीडिया सेंटर हल्द्वानी में भी जनसाधारण के लिए उपलब्ध है। मिश्रा ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं के अलावा जनसाधारण से अपील की है कि वे सरकारी प्रचार साहित्य किसी भी कार्यदिवस में जिला सूचना कार्यालयों अथवा मीडिया सेंटर हल्द्वानी से प्राप्त कर सकते हैं।
उक्रांद के तमाम कार्यकर्ता बसपा में शामिल हुए
देहरादून, 16 सितम्बर (राजेन्द्र जोशी)। सोमवार को उत्तराखण्ड क्रांति दल के केन्द्रीय उपाध्यक्ष सहित तमाम कार्यकर्ताओं ने बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। आज हिन्दी भवन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें बसपा प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष उक्रांद (ऐरी गुट) के कार्यकर्ताओं ने पार्टी की सदस्यता ली। उक्रांद के केन्द्रीय उपाध्यक्ष एनके गुसाईं सहित चालीस पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने दल के केन्द्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी को सामुहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। जिसमें कहा गया है कि दल द्वारा जहां एक ओर वर्तमान सरकार को समर्थन दिया जा रहा है वहीं दूसरी ओर गठबंधन धर्म के विपरीत सरकार की जनविरोधी नीतियों के विरोध में 18 सितंबर को विस घेराव करने का कार्यक्रम बनाया है। जिससे कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह कार्यक्रम कुछ लोगों को लालबत्ती दिलवाने के लिए किया जा रहा है। सदस्यता ग्रहण समारोह में उक्रांद के एनके गुसाईं, डीके पाल, अनिल चन्द्र बलूनी, सुनील कुकरेती, अमित वर्मा, केन्द्रपाल सिंह, आशीष शर्मा, नीरज सिंह रावत, प्रदीप सैनी, अवनीश भट्ट, गोपाल विज, पुनीत वर्मा, केन्द्रपाल सिंह तोपवाल, मनोज बर्थवाल तथा नीरज सिंह रावत आदि मौजूद थे।

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