सूचना निदेशालय का बड़ा घोटाला, चोर को कहा चोरी कर कोतवाल को कहा जागते रहो!
देहरादून, 11 अक्टूबर। उŁाराखण्ड सरकार की नाक के नीचे जो हो जाए वह कम है। यहां थानेदार को ही चोरी करने का पूरा मौका दे दिया जाता है। राज्य में आई भीषण आपदा के बाद से ही राज्य का सूचना एंव लोक संपर्क विभाग सुर्खियां बटोरता रहा है। आपदा ēभावित लोगों को ēभावी विस्थापन के बजाय मुख्यमंत्री इस विभाग का सदुपयोग पूरे देश के मीडिया संस्थानों को विज्ञापन बांटकर अपनी छवि सुधारने का नाकाम ēयास करते रहे हैं । हाल ही में खुलासा हुआ कि यह चर्चित विभाग मुख्यमंत्री के इशारे पर 90 करोड़ रूपए से अधिक के विज्ञापन और न्यूज डायरी के नाम पर बांट चुका जिसकी चर्चा पूरे देश में है । सूचना विभाग में एक और कारनामा इन दिनों सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री के अधीन इस विभाग में विŁा विभाग के जिस व्यक्ति को विŁाीय गड़बडियों को पकड़ने की जिम्मेदारी दी गयी थी उसी व्यकित को बिल पास करने की भी अनुमति दे दी गयी है। यानि वह खुद ही गघ्बघ्ी करेगा व बाद में खुद ही विŁा अधिकारी बनकर उस गघ्बघ्ी पर मुलम्मा लगाएगा.इतना ही नहीं इस अधिकार को विभाग का आहरण -वितरण (डी डी ओ ) भी बना दिया गया है . अब यह बात आम आदमी के समझ से परे है कि जो व्यक्ति विभागीय बिल पास करेगा, वह विŁाीय गड़बडियों पर कैसे अंकुश लगा सकता है । आम तौर पर व नियमतः विभागीय मुखिया के पास बिल पास करने की जिम्मेदारी होती है या वह काम के बोझ को देखते हुए अपने ही विभाग के किसी जिम्मेदार अधिकारी को यह अधिकार दे देता है न कि अपने विभाग से इतर किसी अन्य विभाग के अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। यहां अजब तमाशा यह भी हुआ कि महानिदेशक ने विभागीय अधिकारियों को दरकिनार कर किसी दूसरे विभाग के अधिकारी को वह जिम्मा दे डाला जिसको सरकार ने उस विभाग की विŁाीय अनियमितताओं के खुलासे के लिये नियुक्त किया गया है ,इतना ही नहीं विŁा विभाग के इस अधिकारी को 2 - 2 लाख रूपए तक के बिलों को पास करने का अधिकार तक भी दे दिया गया है । उल्लेखनीय है कि सूचना विभाग में तैनात विŁा विभाग के इस विŁा अधिकारी के पास सूचना विभाग के अतिरिक्त नगर निगम देहरादून के विŁा अधिकारी की भी जिम्मेदारी है। नियमतः विŁा अधिकारी का काम विभाग में आर्थिक घोटालों का पता लगाकर उन पर ēभावी कार्रवाही करना विŁाीय अनियमितताओं को रोकने की होती है, मगर सूचना विभाग में शासन में बैठे उच्चाधिकारियों ने उल्टी गंगा ही बहा दी। सूचना विभाग में तैनात इस विŁा अधिकारी को 2 लाख रूपए तक के बिलों के भुगतान का भी अधिकार देकर नियमतः विŁा अधिकारी के अधिकार को बौना कर दिया गया है । यही नहीं पूरे ēदेश के साथ देश के विभिन्न ēदेशों से राज्य सूचना विभाग से होने वाले पत्राचार को जांचने को ठेका भी इसी विŁा अधिकारी को दे दिया गया है । अब शासन में बैठे उच्चाधिकारियों को कौन समझाए कि पत्राचार में मीडिया से संबंधित विभिन्न मसलों को विभाग के सम्मुख रखा जाता है और उन सब चीजों को समझने के लिए विभाग के अधिकारियों से बेहतर कोई नहीं होता। विŁा विभाग का अधिकारी मीडिया से संबंधित मामलों पर कितना ēभावी निर्णय ले सकता है, यह शासन में बैठे उच्चाधिकारी ही बेहतर जानते होंगे। लेकिन ēशासन के इस निर्णय ने यह साफ कर दिया कि विभाग की ओर से बांटे गए विज्ञापनों के घोटाले को ढकने के लिए सूचना विभाग से इतर अधिकारी को यह जहा घोटाले करने की छूट दे दी है वही उसी को इन घोटालों को दबाने का अधिकार भी दे दिया है ताकि घोटाले सार्वजनिक न हो पायें और फाइलों में ही दघ्न होकर रह जाए । यहा हुए घोटालों का सबसे रोचक पहलू तो यह भी है कि ēदेश सरकार ने अब तक लगभग 90 करोघ् के विज्ञापन देश भर की मीडिया को इसलिए दे डाले ताकि आपदा के बाद मुख्यमंत्री की दागदार हो रही छवि को देश के सामने साघ् सुथरी बनाकर पेश की जाये चाहे आपदा ēभावित इलाकों में सरकार ने कोई कार्य किया हो अथवा नहीं . इस मामले में ēदेश के सूचना विभाग में तैनात विŁा विभाग के इस अधिकारी ने अपनी जिम्मेदारी का किस तरह से निर्वहन किया इसकी एक बानगी यह है कि जहा इस विभाग ने राज्य से ēकाशित होने वाले पत्रों को डी ए वी पी से निर्धारित अथवा सूचना निदेशालय से निर्धारित न्यूनतम दरों पर विज्ञापन जारी किये वही देश अथवा राज्य से ēसारित होने वाले चेनलों को विज्ञापन देने में न तो न्यूनतम दरों का ही ध्यान रखा गया और न डी ए वी पी से निर्धारित दरों का . इस समूचे ēकरण में घोटाले की बू तब साघ् आती है जब ēदेश में मात्र एक या आधा घंटे का स्लॉट लेकर चेनल चलाने वालों को राज्य में स्थापित 24 घंटे ēसारित होने वाले चैनलों से दो से तीन गुना अधिक रुपयों का पैकेज दिया गया। इतना ही नहीं राज्य में मात्र एक आध स्थानों पर ही दिखाई देने वाले चैनलों पर भी विभाग ने जमकर मेहरबानी की है वो भी व्यावसायिक दरों पर । ऐसे में सूचना विभाग में विŁाीय अनियमितताओं को रोकने के लिए विŁा विभाग के इस अधिकारी की जिम्मेदारी पर भी सवालिया निशान लगता है जिसने सरकारी खजाने को मुक्त हाथों से लूटने दिया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विŁा विभाग के इस गघ्बघ् झाले की जानकारी कांग्रेस के तमाम आला नेताओं द्वारा मुख्यमंत्री तक को की जा चुकी है लेकिन अब यह देखना होगा अब तक तमाम विवादित लोगों चाहे वह आयुष विभाग के रजिस्टŖार का मामला रहा हो या राज्य ēदूषण नियंत्रण बोर्ड में सदस्य सचिव या कोई अन्य को उŁाराखंड की धरती पर लाने वाले मुख्यमंत्री इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं इसका इंतजार ēदेश की जनता कर रहीं है।
हेमकुण्ट यात्रा शीतकाल के लिए बंद
देहरादून, 11 अक्टूबर (राजेन्द्र जोशी)। तपोस्थान श्री हेमकुण्ट साहिब के दर्शनार्थ यात्रा आपदा के बाद बंद कर दिये जाने के बाद 22 सितम्बर से यात्रा को पुनः शुरू किया गया था । शीतकाल के चलते आज सचखण्ड मे हर्षोल्लास व चढ़ती कला मे गुरबाणी पाठ गुरबाणी कीर्तन एवं अरदास के बाद बंद कर दिया गया । तपोस्थान मंे गुरबाणी कीर्तन की सेवा भाई प्रदीप सिंह के जत्थे द्वारा निभाई गई तथा अरदास भाई जस्सा सिंह मुख्य ग्रंथी की ओर से की गई। आज तपोस्थान मंे करीब 800 संगतो दर्शन किए व पुनः शुरू हुई यात्रा के 19 दिनांे में करीब 10000 संगतो ने तपोस्थान श्री हेमकुण्ट साहिब मे हाजिरी भरके गुरूघर की खुशियां प्राप्त की। भारी बाढ़ के कारण सड़कीय एवं पैदल मार्ग व ईमारतेा का जो नुकसान हो गया था इसकी वजह से संगतो के मन मंे एक बड़ा भय सा बन गया था कि श्री हेमकुण्ट साहिब मैनेजमेंट टŖस्ट एवं प्रशासन की ओर से किए गए प्रयासों के द्वारा गुरूकृपा से रास्तो को जल्दी ही दुरूस्त कर लिया गया जिससे यह यात्रा दो तीन माह में ही पुनः शुरू हो गई। इससे श्रद्धालुओ के मन की आस्था व श्रद्धा भी पूर्ण हो सकी। थोड़े दिन चली इस यात्रा से देश विदेश की संगतो मंे एक संदेश चला गया है कि अगले वर्ष श्री हेमकुण्ट साहिब यात्रा अति हर्षोल्लास एवं उत्साह पूर्वक चढती कला से चलेगी। यात्रा सम्पन्नता की अरदास समय तपोस्थान श्री हेमकुण्ट साहिब जी मंे देश विदेश की संगतो के साथ स. जनक सिंह सचिव गुरूद्वारा श्री हेमकुण्ट साहिब मैनेजमेन्ट टŖस्ट, स. गरुनाम सिंह प्रबंधक थलसेना की 5 सिख रेजीमेन्ट के अधिकारी एंव जवान डा. मनजीत सिंह व सेवादार आदि उपस्थित थे।
चैंपियन को धमकाने वाला अब भी पुलिस की गिरफ्त से दूर
देहरादून, 11 अक्टूबर (राजेन्द्र जोशी)। फोन कर गाली-गलौज के साथ ही विधायक कुंवर ēणव चैंपियन को जान से मारने की धमकी देने वाले की गिरफ्तारी आज मामले की 48 घण्टे बाद भी नहीं हो सकी है। डालनवाला पुलिस ने बताया कि तहकीकात चल रही है। धमकी भरा फोन करने वाले मोबाइल नम्बर की सीडीआर निकाली जा रही है। बुधवार सुबह ēणव को उनके मोबाइल पर फोन कर धमकी दी गई थी। फोन अनजान नम्बर से खानपुर विधायक साथ ही कैबिनेट मंत्री और जीएमवीएन के अध्यक्ष कुंवर ēणव चैंपियन के कॉल की गई। रिसिव करने पर दूसरी ओर से अपशब्दों का ēयोग कर ठिकाने लगा दिए जाओगे आदि धमकी भरा शब्द इस्तेमाल किया था। इस घटना के बाद ēणव के पीए डालनवाला थाने पहुंचे और चैंपियन की ओर से लिखित तहरीर दी गई। जिसके बाद पुलिस ने धमकाने वाले शक्स के खिलाफ धारा 504, 506 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। मामले का पता चलने के बाद यहां राजधानी देहरादून सहित विधायक के क्षेत्र में इस बात को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं ने जोर पकड़ा हुआ है। बता दें कि चैंपियन की ओर से दी तहरीर में कहा गया कि जब वे मोहनी रोड के आवास पर थे तो उन्हें धमकी भरा फोन आया था।
अंतर्राष्टŖीय बालिका दिवस पर निकाली रैलियां
देहरादून, 11 अक्टूबर (राजेन्द्र जोशी)। शुŲवार को अंतर्राष्टŖीय बालिका दिवस के अवसर पर दून में विभिन्न स्कूलों व संस्थाओं ने रैली का आयोजन किया। आज परेड ग्राउण्ड से इस रैली का शुभारंभ हुआ। इस दौरान अंतर्राष्टŖीय बालिका दिवस के अवसर पर कन्या भ्रूण हत्या रोकने व लैंगिक भेदभाव समाप्त करने का संकल्प छात्राओं ने लिया। रैली का शुभारंभ चिकित्सा शिक्षा निदेशक डा.आरपी भट्ट ने किया। आज सभी जिला मुख्यालयों में इस तरह की रैलियों का आयेाजन किया गया। यह रैली परेड ग्राउण्ड से शुरू हो कर कनक चैक, गांčाी पार्क, घण्टाघर, दर्शनलाल चैक होते हुए वापस परेड ग्राउण्ड में समाप्त हुई। रैली में छात्राएं बालिका सुरक्षा, भू्रण हत्या रोकने सहित कई नारे लिखी तख्तियां हाथ में ले कर चल रही थी। रैली में एमकेपी इंटर काॅलेज, स्टेट काॅलेज आॅफ नर्सिंग, एग्नेज कुंज सोसायटी, नागरिक सुरक्षा, राजकीय बालिका इंटर काॅलेज की छात्राएं, आशाएं होप स्वयं सेवी संस्था, भुवनेश्वरी महिला आश्रम, प्लान इण्डिया संस्था के प्रतिनिčिा, अपर मुख्य चिकित्साčिाकारी (प्रथम) डा. एएस सेंगर, डा. भागीरथी जंगपांगी अपर मुख्य चिकित्साčिाकारी (द्वितीय), जिला नोडल अčिाकारी (पीसी-पीएनडीटी) डा. बीएस जंगपांगी, पीसी-पीएनडीटी की सदस्य डा. गीता बलोदी व जिला समन्वयक ममता बहुगुणा भी शामिल हुए।
इन्कम टैक्स रिटर्न अंतिम तिथि 31 अक्टूबर किए जाने की मांग
देहरादून, 11 अक्टूबर (राजेन्द्र जोशी)। शुŲवार को सचिवालय में देवभूमि टेक्स बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से भेंट कर उ ाराखण्ड में एक करोड़ रूपए से अधिक के टर्नओवर पर इन्कम टैक्स रिटर्न की ई-फाईलिंग की अंतिम तिथि को 30 सितम्बर से बढ़ाकर 31 अक्टूबर किए जाने की मांग की। मुख्यमंत्री ने इस पर अपनी सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में दैवीय आपदा की परिस्थितियों को देखते हुए वे इसके लिए भारत सरकार से अनुरोध करेंगे। गौरतलब है कि एक करोड़ रूपए से कम के टर्नओवर पर इन्कम टैक्स रिटर्न की ई-फाईलिंग की अंतिम तिथि को पहले ही 31 अक्टूबर किया जा चुका है।
सीएम राहत कोष हेतु चेक भेंट किया
देहरादून, 11 अक्टूबर (राजेन्द्र जोशी)। शुŲवार को सचिवालय में उ ाराखण्ड के महाधिवक्ता यूके उनियाल ने भारत के एडवोकेट जनरल संघ की ओर से सीएम राहत कोष के लिए 28 लाख 18 हजार 855 रूपए का चेक मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को भेंट किया।
कांग्रेस शासनकाल में विकास कार्य ठप्प
देहरादून, 11 अक्टूबर (राजेन्द्र जोशी)। विधायक प्रेम चन्द अग्रवाल ने कहा कि जब से प्रदेश मंे काग्रेंस की सरकार आई है विकास कार्य ठप्प पड़ गए है । साथ ही हाल ही मंे केदारनाथ मे आई भीषण आपदा पर भी राहत कार्यों पर संतेाषजनक काम न होने से देशभर मंे प्रदेश की प्रतिष्ठा भी गिरी है। इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन कण्डवाल, रामप्रसाद राणाकोटि, रायसिंह गौर, मणी राम रयाल, महिला मोर्चे की मण्डल महामंत्री कुसुम डबराल, कमला नेगी, रामरतन रतूडी, राकेश बिजल्वाण, , जिला मंत्री गंभीर राणा, प्रदीप धस्माना ने भी विचार रखे। मोटा प्लाट खदरी मंे आयेाजित ग्रामीणों की इस बैठक का संचालन सुरेन्द्र रयाल ने कियां । इस अवसर पर धूम सिंह, भंडारी, भारत भूषण नौटियाल, पूर्व उप प्रधान सरोप सिंह पुंडीर, ज्ञानोदेवी, शांति थपलियाल, रामस्वरूप आदि उपस्थित थे। बैठक की अध्यक्षता पूर्णानन्द रयाल ने की। इस मौके पर विधायक अग्रवाल ने आंगनबाडी कक्ष का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर 70 मी0 सीसी रोड बनाने की भी विधायक ने घोषणा की।
दोषियों को बरी करने के फैसले पर कड़ी आपŁिा जताई
हल्द्वानी/देहरादून, 11 अक्टूबर (राजेन्द्र जोशी)। भाकपा (माले) की राज्य कमिटी ने पटना हाई कोर्ट द्वारा लक्ष्मणपुर बाथे जनसंहार के सभी दोषियों को बरी करने के फैसले पर कड़ी आपŁिा की है. राज्य कमिटी सदस्य राजा बहुगुणा ने कहा की पटना हाई कोर्ट पूरी तरह से बिहार की सामंतपरस्त नितीश सरकार के इशारों पर काम कर रहा है. हाई कोर्ट और नितीश सरकार नहीं चाहते की बिहार में गरीब , दलित जनता को संवैधानिक हघ् दिया जाए . नितीश सरकार इस फैसले के खिलाफ सुēीम कोर्ट में जाने की नौटंकी कर रही है . लेकिन सच यह है की बिहार में दलितों , गरीबो के ऊपर लगातार सामंती ताकतों के हमले बघ् रहे है . नितीश सरकार ने ही बिहार में रणवीर सेना और सामन्ती ताकतों द्वारा दलितों के जनसंहार की जांच के लिए बनाये गए अमीरदास आयोग को ठीक उसी वक्त भंग कर दिया था जब वह आयोग सामन्ती ताकतों को पूरी तरह दलितों के जनसंहार के लिए दोषी ठहराते हुए अपनी रिपोर्ट सरकार को सौपने वाला था. पिछले साल ही सामंती ताकतों व नितीश सरकार के दबाब में लगभग 300 लोगो के जनसंहार के लिए दोषी रणवीर सेना के मुखिया ब्रćेश्वर सिंह को हाई कोर्ट ने बरी कर दिया था. इस सब से बिहार सरकार व बिहार हाई कोर्ट की दलित विरोधी मानसिकता सामने आ गयी है . पुरे बिहार में इस फैसले की खिलाफ भाकपा(माले ) जबरदस्त आन्दोलन पार्टी महासचिव कॉमरेड दीपंकर भźाचार्य के नेत्रत्व में शुरू हो गया है. पटना में हुई एक सभा में भाकपा-माले महासचिव कॅा. दीपंकर भźाचार्य ने कहा है कि पटना हाईकोर्ट द्वारा लक्ष्मणपुर बाथे जनसंहार के सभी दोषियों को सजामुक्त करना शर्मनाक है. नीतीश कुमार को यह जवाब देना होगा कि जनसंहार पीडि़तों के लिए न्याय के वादे का आखिर क्या हुआ? भारत के तत्कालीन राष्टŖपति द्वारा ‘राष्टŖीय शर्म’ से संबोधित बाथे जनसंहार का यह फैसला उसी कड़ी का अगला कदम है जिसमें बथानी टोला, नगरी, मियांपुर, नारायणपुर और खगड़ी-बिगहा, जाहिर बिगहा आदि तमाम जनसंहारों के आरोपियों को बरी किया जा चुका है. जनसंहारियों को सजा दिलाने के नाम पर सŁाा में आई नीतीश सरकार में उन्हें सजामुक्त करना एक पैटर्न बन गया है. पिछले 2010 के विधानसभा चुनाव में नीतीश सरकार ने जनसंहारियों को सजा दिलाने और गरीबों को न्याय देने के नाम पर वोट मांगा था. यही कारण है कि विधानसभा चुनाव के ठीक पहले इन जनसंहारों के दोषियों को लोअर कोर्ट द्वारा सजा दिलाने का ढोंग किया गया था, लेकिन अब हाईकोर्ट ने एक-एक करके सभी जनसंहारों के आरोपियों को बरी कर दिया है. फैसला बताता है कि यह न्याय का संहार है. बिहार में गरीबों को न्याय नहीं मिल रहा है. हाल ही में रोहतास में बģी गांव में महादलितों के उपर किया गया सामंती हमला इसका उदाहरण है. इन फैसलों से बिहार में सामंती ताकतों का मनोबल और बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि हालांकि इस सरकार के चरित्र का पर्दाफाश उसी वक्त हो गया था जब रणवीर सेना से संबंधित अमीरदास आयोग को उसने ऐसे समय में भंग किया था, जब वह अपनी रिपोर्ट सौंपने ही वाली थी. उन्होंने कहा कि इस फैसले के खिलाफ हमारी पार्टी की मांग है कि सुēीम कोर्ट के ēत्यक्ष निर्देशन में ैप्ज् का गठन करके बिहार के जनसंहार पीडि़तों को न्याय मिलना चाहिए. इस अन्याय के खिलाफ हम अपनी लड़ाई को और तेज करेंगे.

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