मंगलयान का कक्षा विस्तार सफलतापूर्वक संपन्न. - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

शुक्रवार, 8 नवंबर 2013

मंगलयान का कक्षा विस्तार सफलतापूर्वक संपन्न.

 मंगलयान के मंगल तक पहुंचने के दौरान कक्षा विस्तार के निमित्त होने वाली छह गतिविधियों में से दूसरी गतिविधि शुक्रवार तड़के सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अनुसार, शुक्रवार तड़के 2.18 बजे शुरू हुई कक्षा विस्तार की दूसरी गतिविधि सफलतापूर्वक पूरी हो गई।

मंगलयान पर मौजूद मोटर को 570.6 सेकंड के लिए चालू किया गया और इस दौरान यान पृथ्वी से अधिकतम 40,186 किलोमीटर दूर पहुंच गया, जबकि इसके पहले उसका अधिकतम स्तर 28,814 किलोमीटर था। इसके पहले गुरुवार को इसरो ने मंगलयान के कक्षा विस्तार की पहली गतिविधि पूरी की थी। गतिविधि के लिए कमांड, बेंगलुरू स्थित इसरो के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) से जारी किए गए।

इसरो ने मंगलयान को मंगलवार को पृथ्वी की कक्षा में छोड़ा था। यान को पृथ्वी की बाहरी अंडाकार कक्षा में पृथ्वी से निकटतम 242.4 किलोमीटर और अधिकतम 23,550 किलोमीटर पर स्थापित किया गया था, जो भूमध्यरेखा से 19.27 डिग्री पर था। इसरो द्वारा विकसित 1,340 किलोग्राम वजन वाले मंगलयान पर लगभग 150 करोड़ रुपये लागत आई है। इसके साथ 852 किलोग्राम ईंधन मौजूद है। छठी कक्षा विस्तार गतिविधि पर लगभग 360 किलोग्राम ईंधन खर्च होने की संभावना है।

अंतिम कक्षा विस्तार गतिविधि के दौरान मंगलयान को मंगल हस्तांतरण परिधि पर पहली दिसंबर को पहुंचाया जाएगा। इसरो के अनुसार, मंगलयान 300 दिनों की अंतरिक्ष यात्रा के बाद सितंबर 2014 में मंगल ग्रह के पास तक पहुंच जाएगा। इसरो ने कहा है कि मंगलयान जब मंगल के पास पहुंच जाएगा तब यान के मोटर को फिर से चालू किया जाएगा, लेकिन इस बार की दिशा उलटी होगी, ताकि रफ्तार धीमी हो जाए और मंगल पर मौजूद गुरुत्वाकर्षण के जरिए वह मंगल के चारों ओर स्थित एक कक्षा में पहुंच जाए। इसरो के अनुसार, मंगलयान की सभी प्रणालियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं। देश के पहले मंगलयान मिशन पर लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत आई है।

कोई टिप्पणी नहीं: