बिहार : जब काला बिल्ला लगाया, तब रैली निकाली और अब धरना देने लगे - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

बिहार : जब काला बिल्ला लगाया, तब रैली निकाली और अब धरना देने लगे

bihar home guard
गृहरक्षा वाहिनी में रिक्त स्थायी तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के पदों पर शत-प्रतिशत गृहरक्षकों की भर्ती करने, आयु सीमा को 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष , गृहरक्षकों की मृत्यु पर आश्रित को कम से कम 5 लाख रूपए तथा हिंसा में मारे जाने पर दस लाख रूपए व आश्रित को सरकारी नौकरी देने की मांग की। 

पटना। अपनी मांग के सिलसिले में कई बार गृह रक्षा वाहिनी के सदस्य आंदोलन कर चुके हैं। गृह रक्षा वाहिनी के सदस्य थकहार कर एक बार से आंदोलन करने को बाध्य हैं। सबसे पहले जब काला बिल्ला लगाकर आंदोलनकारी कर्त्तव्य निभाते रहे। इसके बाद सोमवार को गांधी मैदान से हजारों गृहरक्षक रैली की शक्ल में निकले। आर ब्लाक के पास जाकर धरना पर बैठ गए। 

 बिहार गृहरक्षा वाहिनी स्वयं सेवक संघ के तत्तावधान में सोमवार को गांधी में हजारों गृहक्षक एकजुट हुए। मैदान से रैली की शक्ल में निकले। यहां से फ्रेजर रोड, रेडियो स्टेशन होते हुए जीपीओ गोलम्बर से आर ब्लाक तक जुलूस पहुंचा। आर ब्लाक पर गेट बंद देख जुलूस सभा में तब्दील हो गया। गृहरक्षक धरना पर बैठ गए। गृहरक्षक समान कार्य के लिए समान वेतन व भत्ता देने की मांग सरकार से कर रहे हैं। इसी मांग पर अड़ गये हैं। 

गृहरक्षकों को संबोधित करने के लिए विधायक सोमप्रकाश के अलावा,विनय बिहारी, पवन जायसवाल एवं दुलारचंद गोस्वामी भी पहुंचे। विधायक सोमप्रकाश ने कहा कि यह पहला राज्य है जहां एक समान कार्य के लिए अलग-अलग वेतन व भत्ता दिया जा रहा है। बिहार में पुलिस के लिए अलग व्यवस्था है, तो गृहरक्षकों के लिए अलग है। समय रहते मांगों की पूर्ति न की गई तो सारे गृहरक्षक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। सूबे में विधि -व्यवस्था ठप हो जाएगी जिसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। इस मौके पर पहुंचे अन्य तीनों विधायकों ने मंगलवार को इस मुद्दे पर विधानसभा में सवाल उठाने को कहा है। संघ के महासचिव सुदेश्वर प्रसाद ने कहा कि बिहार गृहरक्षा वाहिनी अधिनियम 1947 को संशोधन कर गृहरक्षकों को जीने का अधिकार तथा समान काम समान सुविधा देने की मांग की। आगे कहा कि गृहरक्षा वाहिनी में रिक्त स्थायी तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के पदों पर शत-प्रतिशत गृहरक्षकों की भर्ती करने, आयु सीमा को 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष , गृहरक्षकों की मृत्यु पर आश्रित को कम से कम 5 लाख रूपए तथा हिंसा में मारे जाने पर दस लाख रूपए व आश्रित को सरकारी नौकरी देने की मांग की। 



आलोक कुमार
बिहार   

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