बिहार में लालू प्रसाद यादव को करारा झटका लगा है। सोमवार को लालू की पार्टी आरजेडी में बगावत हो गई। आरजेडी के 13 विधायकों ने पार्टी से अलग होकर नया गुट बना लिया। इन विधायकों ने विधानसभाध्यक्ष को एक पत्र लिखा गया जिसमें इन विधायकों ने अपने लिए एक अलग गुट के रूप में मान्यता मांगी। विधानसभाध्यक्ष ने तुरंत ये मांग पूरी कर दी। लेकिन आरजेडी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। नया पेच तब या जब बागी कहे जा रहे 13 में से छह विधायकों ने दावा किया है कि उनके दस्तखत फर्जी हैं।
सोमवार को हुए एक हाईवोल्टेज ड्रामे के तहत 22 विधायकों वाली आरजेडी के 13 विधायकों के दस्तखत वाली एक चिट्ठी विधानसभाध्यक्ष को सौंपी गई। इस चिट्ठी में इन विधायकों को एक अलग गुट की मान्यता देते हुए विधानसभा में इनके बैठने की अलग व्यवस्था करने की मांग की गई थी। विधानसभाध्यक्ष ने आनन-फानन में ये मांग मंजूर कर ली। बागी विधायकों ने जेडीयू का झंडा बुलंद करने का इरादा जताया।
आरजेडी के बागी विधायक सम्राट चौधरी ने कहा कि नीतीश को छोड़ बिहार में सेकुलरिज्म का झंडा बुलंद करने वाला अब कोई नहीं है। इसलिए हम जनता दल यूनाइटेड में विलय चाहते हैं। लालू से हम इसलिए नाराज हैं क्योंकि जिस व्यक्ति ने अध्यादेश फड़वाकर(राहुल गांधी) लालू जी को जेल भेजने का काम किया था, लालू जी उसी की गोद में बैठ गए हैं। बिहार में आरजेडी अब सिर्फ कांग्रेस की बी टीम बनकर रह गई है। आरजेडी के बागी विधायक जावेद इकबाल ने कहा कि हमने विधानसभा अध्यक्ष को चिट्ठी लिखी थी और हमारी मांग मान ली गई है। जिस व्यक्ति ने लालू जी को जेल भिजवाया, लालू जेल से छूटने के बाद हमसे या बिहार की जनता से बात करने के बजाय उसी व्यक्ति से हाथ मिलाने दिल्ली पहुंच गए। लालू जी अब नाकाम हो गए हैं। ये अब वो लालू नहीं हैं जिन्हें पूरे देश का मुसलमान आशा की नजर से देखता था।
राजनीतिक गलियारों में इसे नीतीश कुमार का मास्टर स्ट्रोक माना गया। लालू यादव इस तरह हैरान थे कि उनसे जवाब देते नहीं बना। लेकिन जल्द ही वे होश में आए और डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू हुई। आरजेडी की ओर से एक प्रेस कांफ्रेंस की गई जिसमें बागियों की लिस्ट में शामिल कुछ विधायकों ने दावा किया कि उनके साथ साजिश की गई है। इन विधायकों ने कहा कि हमारे साथ धोखाधड़ी हुई है। हमारे हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल हुआ है। सब फर्जीवाड़ा है। 13 में से 6 आपके सामने हैं। हम लोग राष्ट्रीय जनता दल के साथ हैं। सम्राट चौधरी ने हमसे दस्तखत लिए थे। उधर, बीजेपी ने आरोप लगाया है कि ये तोड़फोड़ नीतीश कुमार के इशारे पर हुई है। लेकिन जेडीयू ने इससे इंकार करते हुए दावा किया है कि ये लालू के कांग्रेस प्रेम का नतीजा है। बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि नीतीश कुमार जोड़तोड़ की राजनीति कर रहे हैं लेकिन बिहार की जनता उनके साथ नहीं हैं। वे सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं।
वहीं जेडीयू नेता के सी त्यागी ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत बनेगा, या तबाही होगी। बीच का कोई रास्ता नहीं है। विद्रोह हो चुका है और जेडीयू ही नरेंद्र मोदी विरोधी राजनीति की धुरी बन चुका है। बाहरहाल, आरजेडी ने अलग गुट की मान्यता पर कड़ा एतराज जताया है। मंगलवार को आरजेडी विधायक दल की बैठक है जिसमें अगली रणनीति बनाई जाएगी। पार्टी नेता अब्दुल बारी सिद्दिकी ने कहा कि कल हमारे विधायक दल की बैठक होगी। हमने कोई दलबदल नहीं किया है। कोई दस्तखत नहीं किया है। अगर विधायकों को निकलने की मान्यता दी है तो इसके खिलाफ हम संघर्ष करेंगे। कुछ लोगों को लालच दिया गया है। जो भी हो, इसमें शक नहीं कि आजेडी विधायकों की बगावत ने बिहार की राजनीति में तूफान ला दिया है। यूं तो पार्टी तोड़ने के लिए दो तिहाई विधायकों की जरूरत होती है, लेकिन बागियों का दावा है कि अलग गुट की मान्यता के लिए एक तिहाई से ही काम चल जाएगा।
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