झारखण्डः-5 पुलिसकर्मी व 6 पोलिंग पार्टी सदस्य घायल, 4 घायल मतदानकर्मियों को बेहतर ईलाज के लिये रेफर किया बाहर - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 28 अप्रैल 2014

झारखण्डः-5 पुलिसकर्मी व 6 पोलिंग पार्टी सदस्य घायल, 4 घायल मतदानकर्मियों को बेहतर ईलाज के लिये रेफर किया बाहर


  • 5 पुलिसकर्मियों सहित 3 पोलिंग पार्टी सदस्यों को लैण्ड माईन्स विस्फोटक से उढ़ाया , धटना 24 अप्रैल की है।
  • नक्सलियों के लैण्डमाईन्स विस्फोट से दहला झारखण्ड की उप राजधानी दुमका

jharkhnd naxal attack
झारखण्ड का संताल परगना इलाका नक्सलियों के लिये हमेशा से ही एक सुरक्षित काॅरीडोर के रुप में उपयोग में लाता जा रहा है। 70 के दशक में इस क्षेत्र में चारु मजूमदार व कानू सान्याल जैसे माओवादी नेता की शरणस्थली रहा यह क्षेत्र वर्तमान में नक्सलियों के लिये ट्रेनिंग काॅलेज के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2008 से इस क्षेत्र में नक्सलियों की दमदार उपस्थिति की गोपनीय जानकारी लगातार प्राप्त होती रही। लोकसभा चुनाव-2009 में शिकारीपाड़ा प्रखण्ड के पोखरिया में 24 अप्रैल को दुमका के शिकारीपाड़ा प्रखण्ड के पलासी-सरसाजोल में सम्पन्न हुए तीसरे चरण के मतदान के बाद वापस लौट रहे पोलिंग पार्टी सहित सुरक्षा कर्मियों पर नक्सलियों ने लैण्ड माईन्स ब्लास्ट कर 5 पुलिसकर्मियों सहित तीन पोलिंग पार्टी सदस्यों को मौत के घाट उतार दिया। अत्यधिक पावरफूल लैण्ड माईन्स ब्लास्ट में 5 पुलिस कर्मी घायल हो गए जबकि 6 मतदान कर्मियों में गंभीर रुप से घायल 4 कर्मियों को इलाज के लिये रिम्स भेज दिया गया। 

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राज्य के डीजीपी राजीव कुमार ने जानकारी देतेे हुए कहा रघुनंदन झा (पुलिस सं0-515 साकिन लखनपहाड़ी पो0-वन्दरवार, थाना-पथरगामा, गोड्डा) जय विजय शर्मा पुलिस सं0-567 (पिता-रामदास शर्मा ग्राम $ पो0-शिकारीपुर थाना-मंझोलिया जिला-प0चंपारण, बिहार) राम नरेश सिंह स0अ0नि0 (पिता-अशेश्वर ठाकुर ग्राम-मधुवन, पो0-सिलोय, थाना-कुढ़नी, जिला-मुजप्फरपुर बिहार) हवलदार मो0 सहीम खाँ (ग्राम-दौलतपुर थाना-मुफस्सिल आरा, जिला-आरा बिहार) (सभी दुमका पुलिस बल) व रविन्द्र कुजूर पुलिस सं0-1204 (पिता-लालजी कुजूर, ग्राम-जुबुर, पो0-पल्हैया, थाना-मनिका, जिला-लातेहार झारखण्ड) गढ़वा जिला पुलिस बल नक्सलियों के लैंण्ड माईन्स ब्लास्ट में धटनास्थल पर ही शहीद हो गए। पोलिंग पार्टी सदस्य घनश्याम साह (बैंककर्मी, एसबीआई जरमुण्डी) अमित कुमार (स्टेनो गव्य विकास विभाग, दुमका) व दिलीप मिर्घा (खलासी, ओम बस) ग्राम-गम्हरिया, थाना-रामगढ़ जिला-दुमका भी इस ब्लास्ट में मारे गए। डीजीपी राजीव कुमार ने कहा रमेश मराण्डी (पुलिस-409) प्रकाश सोरेन (पुलिस-330) उमेश तिग्गा (पुलिस-1206) तदर्थ प्रोन्नत स0अ0नि0 हीरालाल पाल (पुलिस सं0-249) (सभी दुमका जिला पुलिस बल) व अजय उरांव (पुलिस सं0-1208) गढ़वा जिला बल घायल हो गए। नक्सलियों की कार्रवाई में घायल मतदानकर्मी राम प्रताप रजक, मो0 नईमुद्दिन अंसारी, हीरालाल मिस्त्री तथा आलमगीर साईं (मैजिक वाहन चालक) को बेहतर इलाज के लिये बाहर रेफर कर दिया गया जबकि सुबोध मिस्त्री व निरंजन प्र0 यादव का इलाज दुमका सदर अस्पताल में जारी है। 

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पुलिस पदाधिकारी मुरारी लाल मीणा के साथ प्रेसवार्ता में बैठे डीजीपी राजीव कुमार ने कहा नक्सलियों ने 05 इंसास, 550 चक्र गोली व 25 अदद् मैगजीन भी लूटकर अपने साथ ले गए। यह दिगर बात है कि नक्सलियों के ठिकानों का पता लगाने तथा 24 अप्रैल की घटना में शामिल आरोपियों की खोज के लिये सीआरपीएफ व अन्य के सहयोग से लगातार छापेमारी अभियान जारी है किन्तु मौत के मुँह में सुला दिये गए शहीदों के परिवारों के बीच प्राकृतिक खुशी को क्या वापस लाया जा सकता है ? क्या शहीदों की विधवाओं के माँग की खुशी उन्हें लौटाई जा सकती है ? उन बच्चों को उनके पिता से मिलवाया जा सकता है जो पिताजी-पिताजी कहते हुए अचानक बेहोश हो गए थे ? शिकारीपाड़ा थाना प्रभारी सुमन कु0 सुमन के बयान पर कांड सं0-40/2014 के तहत भादवि की धारा-147,148,149, 326, 307, 353, 302, 379, 427, एवं आम्र्स एक्ट की धारा 27, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3/4, सीएलए एक्ट की धारा 17 तथा यूएपी एक्ट की धारा 17 तथा इसी एक्ट की धारा 10/13 के तहत नक्सली नेता प्रवीर दा, जोसेफ दा, कंचन, बुद्धिनाथ, सीमोन, दाउद, किरण, आकाश, दीपक, सुधीर, देवान, शांति, सोनू, रिम्पू, विजय, मंजू, मधवा, भगत, महाशय, चांद दी, नीलू दी, सरोजनी दी, तालो, पीसी दी, जसमिता, सुपाय, सुलेखा, पिंकी, प्रतिमा व शिवान्ति के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया है। पलासी-सरसाजोल के बीच घटी घटना प्रशासन के लिये एक चुनौती-हेमन्त सोरेनः-मतदान कार्य से वापस लौट रहे पोलिंग पार्टी सदस्यों व सुरक्षाकर्मियों की लैण्डमाईन्स ब्लास्ट से की गई हत्या से मर्माहत सूबे के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पुलिस लाईन मैदान दुमका में शहीदों के प्रति  श्रद्धा व्यक्त करते हुए नक्सलियों की कार्रवाई की तीव्र भत्र्सना की तथा कहा प्रशासन की अपनी तैयारी थी। शांतप्रिय दुमका में शांत वातावरण में मतदान कार्य संपादित हो चुका था किन्तु अचानक घटी इस घटना ने दुमका को शर्मसार कर दिया। श्री सोरेन ने कहा जिला प्रशासन ने मतदान कायार्थ तैयारियाँ पूरी कर ली थी। नक्सलियों से कैसे निपटा जाय इसके लिये एक प्लान की जरुरत है। यह प्रशासन के लिये एक बड़ी चुनौती है। 

सरकार के स्तर से उत्तम व्यवस्था किये जाने की आवश्यकता है। इस अवसर पर झामुमों सुप्रिमों व दुमका लोक सभा क्षेत्र से एमपी प्रत्याशी शिबू सोरेन ने भी मृत पुलिस व मतदानकर्मियों पर पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी संवेदनाएँ प्रकट की। डीजीपी राजीव कुमार, आईजी संताल परगना प्रक्षेत्र, डीआईजी प्रिया दूबे व अन्य लोग इस अवसर पर मौजूद थे। सीएम हेमन्त सोरेन ने 24 अप्रैल की देर शाम सदर अस्पताल दुमका जाकर गंभीर रुप से धायलों का जायजा लिया व उनके बेहतर ईलाज के लिये अस्पताल प्रबंधन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया।  सरकार के संरक्षण में नक्सली इस क्षेत्र में डेरा डाले हुए थेः-पूर्व मुख्यमंत्री व दुमका से झाविमों प्रत्याशी बाबू लाल मराण्डी ने इस घटना पर प्रतिक्रिया प्रकट करते हुए कहा यह जिला प्रशासन की अदुरर्दिर्शता का परिचायक है। सीएम हेमन्त सोरेन को अपने पद से इस्तिफा दे देना चाहिऐ। श्री मराण्डी ने कहा राज्य की वर्तमान व्यवस्था भगवान के भरोसे रह गयी है। शिकारीपाड़ा नक्सल प्रभावित इलाका है। जिला प्रशासन इस बात से पूर्व परिचित थी। जानबूझ कर लापरवाही बरती गई। परिणाम यह हुआ कि उग्रवादियो ने एक बड़ी घटना को अंजाम दिया। श्री मराण्डी ने कहा लोक सभा चुनाव-2009 में भी शिकारीपाड़ा प्रखण्ड के पोखरिया में इसी तरह की घटनाएँ घटित हुई थी। 24 अप्रैल को तृतीय चरण में होने वाले लोकसभा चुनाव-2014 से सप्ताह भर पूर्व शिकारीपाड़ा क्षेत्र में उग्रवादी का प्रवेश की खबर जिला व पुलिस प्रशासन को थी। चुनाव में नक्सली एक बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं इसकी जानकारी पुलिस, जिला प्रशासन व आम आदमी तक को थी। इसी प्रखण्ड के राजबाँध व अन्य स्थानों पर पोस्टरों के माध्यम से भी मतदान न करने के लिये ग्रामीणों को खबरदार किया गया था। 

शिकारीपाड़ा विस क्षेत्र के अन्तर्गत दूर-दराज वाले तमाम मतदान केन्द्र अति संवेदनशील माने जाते हैं तथापि मतदाने केन््रद संख्या-100 व 101 को सामान्य कोटि में रखा गया था। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा शिकारीपाड़ा के तमाम बूथों पर पारा मिलिट्री फोर्स की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। आर0ओ0 व एलआरपी पहले से होता तो इस तरह की संभावनाएँ नहीं होती। इस पूरे मामले की जाँच सीबीआई अथवा एनआईए से कराने की जरुरत है। पलासी-सरसाजोल में घटी घटना पर एसपी दुुमका को मोबाईल के माध्यम से  रिंग कर जानकारी प्राप्त करने की कई कोशिशें की। रिंग होता रहा। एस0पी0 ने फोन नही उठाया और न ही रिंग बैक किया। जिला व पुलिस प्रशासन का क्रियाकलाप निराशाजनक था। झाविमों केन्द्रीय समिति के प्रधान महासचिव प्रदीप यादव, मीडिया प्रभारी ंिपटु अग्रवाल, जिला महामंत्री धर्मेन्द्र सिंह उर्फ बिट्टू, व अन्य की मौजूदगी में श्री मराण्डी ने कहा जिला प्रशासन पूरी तरह गैर जिम्मेदाराना कार्य कर रही थी। इलेक्शन प्रोसेस के तहत जिले के जिम्मेवार पुलिस व प्रशासनिक पदाधिकारियों को बाहर कर देना चाहिए। थोड़ी सी भी सक्रियता बनी रहती तो इस हादसे को रोका जा सकता था। जिला प्रशासन सरकार में बैठे लोगों के दबाब में काम कर रही थी। पूरे प्रदेश में सरकारी तंत्र के दुरुपयोग की कोशिशें की जाती रही। डायमेनिक पर्सनलिटी के अधिकारियों को अलग-अलग जगहों पर भेज दिया जाता है जबकि वैसे पदाधिकारियों को रखा जाता है जो अपने दारोगा तक का नाम नहीं जानते। 

सरकार के संरक्षण में नक्सली इस क्षेत्र में डेरा डाले हुए थे। श्री मराण्डी ने कहा इस चुनाव में मतदान का प्रतिशत बढ़ा इसके लिये राज्य की जनता बधाई की पा़़त्र है। रणनीति बनाने में हुई चूक की समीक्षा की जाऐगी-डीजीपी पूरे मामले की माॅनिटरिंग कर रहे डीजीपी, झारखण्ड राजीव कुमार ने घटना को काफी दुःखद बतलाया। उन्होनें कहा रणनीति बनाने में हुई चूक की जाँच के बाद ही  पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाऐगी। राज्य के डीजीपी ने सर्किट हाउस दुमका मेें झारखण्ड में तीन चरणों में सम्पन्न हुए मतदान के पहले व दूसरे चरण में जो रणनीतियाँ बनाई गई थी तीसरे चरण के मतदान कार्यक्रम में भी वही रणनीति अपनाई गई थी। पहले व दूसरे चरण का मतदान काफी शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुआ था। अंदाजा यह लगाया गया था तीसरे चरण का मतदान भी शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न होगा किन्तु ऐसा हो न सका। डीजीपी ने कहा निर्देशों के अनुपालन में चूक हुई है। इस चूक की समीक्षा की जाऐगी। शिकारीपाड़ा नक्सल प्रभावित इलाका है इसकी जानकारी सबों को थी। कुछ घटनाओं को छोड़ दे ंतो पिछले तीन महीनें में एक भी ऐसी घटनाएँ नहीं हुई जो नक्सलियों के काफी चुनौतीपूर्ण था। 




अमरेन्द्र सुमन
झारखंड 

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