लोकसभा चुनाव में हार के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तो इस्तीफा दे दिया, मगर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पर बढ़ रहे दबाव को अखिलेश यादव ने दर किनार कर दिया है। उन्होंने दलील दी कि उत्तर प्रदेश की तुलना अन्य राज्यों से नहीं की जा सकती। चुनाव से पहले कई साइकिल यात्राएं करवा चुके अखिलेश ने कहा कि वह चुनाव में अपनी उपलब्धियां न पहुंचा पाने के कारण हारे हैं और हार के अन्य कारणों की समीक्षा राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा की जा रही है। जहां तक प्रश्न भाजपा की जीत का है तो वह पूरे पांच साल तक गंगा सफाई के कार्य को देखेंगे कि कितना और कैसे होता है।
मंगलवार को लाल बहादुर शास्त्री भवन में कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने पिछले दो साल में विकास कार्य किए हैं। कन्या विद्याधन, लैपटॉप वितरण, बेरोजगारी भत्ता जैसी तमाम जनहितकारी योजनाएं चलाईं, लेकिन हम अपनी उपलब्धियों को जनता तक नहीं पहुंचा सके हैं। योजनाओं को जनता तक न पहुंचाने के कारण हमारी हार हुई है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में हार के कारणों की विस्तृत समीक्षा राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव कर रहे हैं। समीक्षा के बाद प्रकाश में आने वाले तथ्यों के आधार पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जनता के निर्णय को सपा सिर माथे पर लेती है और प्रदेश सरकार अब फिर से विकास कार्य में जुट गई है। सरकार प्रदेश के विकास के लिए ठोस योजनाएं तैयारी करेगी ताकि हर वर्ग को इसका लाभ मिल सके। इसके लिए जून माह में बजट सत्र आहूत करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि अब पूरे पांच साल तक वह गंगा सफाई के कार्य पर निगाह रखेंगे और यदि सफाई करनी ही है तो युमना, सरस्वती, बेतवा, गोमती की भी होनी चाहिए। एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री की तरह यहां पर इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि उत्तर प्रदेश की तुलना अन्य किसी राज्य से किसी भी मामले में नहीं की जा सकती।

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