मोकामा। ईसाई समुदाय के लिए भी खास में खास हैएक मई । श्रमिक दिवस के बहाने ही प्रभु येसु ख्रीस्त के पालक पिता जोसेफ को भी स्मरण कर लेते हैं। जो पेशेवर बढ़ई थे। प्रभु येसु ख्रीस्त के पिता जोसेफ के सहकर्मी बेहाल हैं। तो उनके घर और आंगन में किस तरह से खुशी आ पाएगी? हां, कहां हैं उन मजदूरों के चेहरे पर से खुशी छिन लेने वाले? अपने आंगन को बर्बाद कर पटना के सेफ जोन वाले हाॅस्पिटल में पनाह ले लिए हैं। श्रमिकों को मझधार में छोड़कर चले गए। इन मजदूरों के जिस्म पर से 23 माह से रौनक गायब है। सब के सब ईसाई मिशनरियों के जुल्म के शिकार हो गए हैं। श्रमिक धनाभाव के दलदल में बुरी तरह से फंस गए हैं। बस अब इनकी जिंदगी में जिन्दाबाद और मुर्दाबाद लिखा हुआ है। जिन्दाबाद के जयकार लगाने वाले लोगों को झींगा-भात नहीं खिलाते। उसी तरह मुर्दाबाद का नारा लगाने पर मुर्गा-भात भी नहीं मिलता। फलतः लोगों को भूख से बिलाबिला पड़ता है। अन्त में दम तोडने को मजबूर हो जा रहे हैं।
अबतक 3 श्रमिकों की जान चली गयी। नाजरथ अस्पताल के जुल्मी प्रबंधन के द्वारा 3 कर्मचारी शहीद हो गए। आज भी शहीदों के परिवार बिलबिलाने को मजबूर हैं। अपने पतिदेव की तस्वीर लेकर आंसू बहा रही हैं। कहां है राज्य मानवाधिकार आयोग और मिशनरियों के प्रभु येसु ख्रीस्त के सेवक बताने वाले आर्क बिशप विलियम डिसूजा, येसु समाजी? जो लगातार 23 माह से पटना जिले के मोदनगाछी, मोकामा में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इन मजदूरों के आंसू कौन पौंछेगा? आज जब मजदूर दिवस की बात सुनते हैं तो अंदर ही अंदर बौखला जाते हैं। सच में ही मजदूर दिवस के अवसर पर मजदूरों का पीड़ा बढ़ ही गया है। ये मजदूरों की हिमायती करने वाले मजदूर यूनियनों को कम गुनाहगार नहीं समझते जो बिहार में खंडखंड में विभक्त हो चुके हैं। जो बिहार की धरती पर धंधा करने वाले बाद में गोरखधंधा करके पर उतारू हो जाते हैं। इनसे मजदूर बर्बाद हो रहे हैं।

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