वीरभद्र सिंह की दस जनपथ में आज पेशी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 20 मई 2014

वीरभद्र सिंह की दस जनपथ में आज पेशी

virbhadr singh himachal cm
शिमला,  20  मई (विजयेन्दर शर्मा) ।  हिमाचल प्रदेश में चुनावों के बाद चल रही राजनैतिक उठापटक के चलते प्रदेश के सी एम वीरभद्र सिंह का आज का दिल्ली दौरा कई मायनों में अहम है। दरअसल लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के नेताओं ने राज्य के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ आवाज बुलंद करना शुरू कर दी है। कुछ विधायकों सहित कांग्रेस नेताओं का एक धड़ा मुख्यमंत्री से इस पराजय की जिम्मेवारी स्वीकार करने और इस्तीफा देने की मांग कर रहा है।  यह लोग मंडी व चंडीगढ़ में अपने विधायकों के संग बैठकें कर चुके हैं। यही वजह है कि दवाब के  चलते सी एम ने निर्दलीय पांच विधायकों को अपने खेमें में लाने के लिये  पहले उनसे मुलाकात की। व बाद में कुछ हारे हुये नेताओं को एक हैरानी भरे घटनाक्रम के तहत निगम बोर्डों का चैयरमैन व वाइस चैयरमैन बना दिया। इनमें राजेन्दर राणा भी हैं जो हाल ही में हमीरपुर संसदीय चुनाव में अनुराग ठाकुर से भारी मतों से हारे हैं।  

यही हाल मेजर विजय सिंह मनकोटिया व हर्षवर्धन चौहान का है, दोनों नेता विधानसभा चुनाव हार गये हैं।  इस बीच वीरभद्र सिंह ने  आज  शिमला से दिल्ली जाने का फैसला लिया है । उन्होंने दोपहर बाद दस जनपथ से समय मांगा है। वह सोनिया गांधी  से मिलेंगे।  अगर सोनिया गांधी से मुलाकात का समय नहीं मिला तो वीरभद्र सिंह प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला के पास अपना पक्ष रखेंगे।  प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ठाकुर सुखविन्दर सिंह भी दिल्ली जा रहे हैं। उधर वीरभद्र सिंह विरोधी दलील दे रहे हैं कि मोदी लहर के अलावा हिमाचल में कांग्रेस की हार का एक कारण पार्टी कार्यकर्ताओं की अनदेखी बताया है। कहा जा रहा है कि सरकार में ऐसे लोगों को खास तरजीह दी गई जो कांग्रेस में विपक्ष में रहते हुए कहीं नहीं थे। जो विपक्ष में पार्टी के आंदोलनों में सक्रिय थे, उन्हें सरकार ने सत्ता में आने के बाद पूछा तक नहीं। कार्यकर्ताओं की उपेक्षा नहीं होती तो शायद यह सब कुछ नहीं होता। असंतुष्ट कार्यकर्ता घरों से बाहर ही नहीं निकले। राज्य में छठी बार मुख्यमंत्री बने वीरभद्र का कहना है कि यह महज ‘मोदी लहर’ का परिणाम था जिसमें कांग्रेस बह गई। 

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस राज्य की चारों सीट हार गई। सबसे शर्मनाक तो यह रहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र की पत्नी प्रतिभा सिंह भी पराजित हो गई। मंडी लोकसभा सीट पर 2009 में चुनी गई प्रतिभा सिंह भाजपा के रामस्वरूप शर्मा के हाथों 39,796 मतों से पराजित हुई। एक वरिष्ठ कांग्रेसी मंत्री ने कहा, ‘‘इस बात में कोई संदेह नहीं कि मोदी लहर थी, लेकिन इस लहर को खराब शासन और सरकार एवं पार्टी के बीच समन्वय के अभाव ने और प्रभावशाली बना दिया।’’ उन्होंने कहा कि भाजपा ने 2012 के विधानसभा चुनाव में खोई जमीन वापस पाने के लिए कड़ी मेहनत की और पार्टी के विद्रोहियों के लिए दरवाजे खोले। अपना नाम जाहिर नहीं होने देने की शर्त पर मंत्री ने कहा, ‘‘इसके विपरीत कांग्रेस ने वीरभद्र और प्रदेश कांग्रेस सुखविंदर सुखू से मतभेद के कारण निकाले गए पांच विधायकों सहित अपने निष्कासित नेताओं पर तेवर कड़ा ही रखा।’’ 7

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