शिक्षा से आध्यात्मिक तार टूट गए हैं : सोपोरी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

रविवार, 24 अगस्त 2014

शिक्षा से आध्यात्मिक तार टूट गए हैं : सोपोरी


S.K. Sopory, Vice Chancellor, JNU Vice-Chancellor's
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कुलपति एस.के. सोपोरी ने रविवार को कहा कि मौजूदा शिक्षा प्रणाली से आध्यात्मिक शिक्षा के तार टूट गए हैं। सोपोरी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) द्वारा यहां मूल्यपरक शिक्षा के महत्व पर आयोजित एक संगोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, "हमारी शिक्षा से आध्यात्मिक शिक्षा के तार टूट गए हैं। आध्यात्मिक शिक्षा और प्रौद्योगिकीय प्रगति साथ-साथ चलनी चाहिए।"

सोपोरी ने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकीय प्रगति के युग में खुद को भूल नहीं जाना चाहिए। सोपोरी ने धर्म और शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर स्वामी विवेकानंद के विचार पर जोर को याद करते हुए कहा, "स्वामी विवेकानंद एक आध्यात्मिक वैज्ञानिक थे, जिनके पास एक एकीकृत दृष्टिकोण था, जहां आज के वैज्ञानिक अभी पहुंच रहे हैं। शिष्टाचार और मूल्यपरक शिक्षा हमें बताती है कि क्या और क्यों करना चाहिए, और हमें सही दिशा में आगे ले जाती है।"

कोई टिप्पणी नहीं: