केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) निदेशक रंजीत सिन्हा के खिलाफ लगे आरोपों के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली के मांस व्यापारी मोईन अख्तर कुरैशी के खिलाफ आयकर (आईटी) विभाग की जांच की मूल्यांकन रिपोर्ट 17 अक्टूबर तक पेश करने का केंद्र सरकार को निर्देश दिया तथा इस दौरान कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला मामले में कोई भी क्लोजर रिपोर्ट दायर करने से मना कर दिया।
कोयला व्लाक आवंटन घोटाले की जांच से सिन्हा को अलग रखने के निर्देश संबंधी गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज की याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश आर एम लोढ़ा, न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह मामले की सुनवाई की अगली तारीख (17 अकटूबर) तक कुरैशी के खिलाफ जांच से संबंधित मूल्यांकन रिपोर्ट पेश करे। न्यायालय ने यह भी कहा कि कोयला व्लॉक आवंटन घोटाला मामले में सिन्हा के खिलाफ लग रहे आरोपों के मद्देनजर जांच एजेंसी निचली अदालत में फिलहाल कोई क्लोजर रिपोर्ट दाखिल नहीं करेगी।
इससे पहले कॉमन कॉज की ओर से प्रशांत भूषण ने दलील दी कि पिछले 15 माह में कुरैशी सीबीआई निदेशक के दो जनपथ स्थित सरकारी आवास पर 90 बार आया है। उन्होंने दलील दी कि कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले की निष्पक्ष जांच तभी सम्भव है, जब सिन्हा को इससे दूर रखा जाएगा।
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