पूरे विश्व के छात्रों को अपनी ओर आकर्षित करने वाले प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का विदेश मामलों की मंत्री सुषमा स्वराज आज विधिवत उद्घाटन करेंगी. राजगीर में आयोजित नालंदा विश्वविद्यालय के इस उद्घाटन समारोह में बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी भी उपस्थित रहेंगे.
गुप्त काल के दौरान छठी शताब्दि में शुरु प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को 1193 ईसवी में तुर्क शासक कुतबुद्दीन ऐबक के सिपहसालार बख्तियार खिलजी ने ध्वस्त कर दिया था. इस विश्वविद्यालय के अवशेष से 12 किलोमीटर की दूरी पर नवनिर्मित इमारत में शिक्षण कार्य गत एक सितंबर से ही शुरु हो गया था.
निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, सुषमा स्वराज अन्य गणमान्य लोगों के साथ उद्घाटन स्थल पर वृक्षारोपण भी करेंगी. केंद्र सरकार ने इस विश्वविद्यालय के लिए 2,700 करोड रुपये स्वीकृत किए हैं. पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने वर्ष 2006 में बिहार विधानमंडल के दोनों सत्रों को संयुक्त रुप से संबोधित करते हुए नालंदा विश्वविद्यालय को फिर से चालू किए जाने का सुझाव दिया था जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर इस विश्वविद्यालय की नींव संसद द्वारा इसको लेकर विशेष अधिनियम पारित किए जाने के बाद पडी.
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के सुझाव और सिंगापुर सरकार के नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित करने के प्रस्ताव के बाद कई देशों ने आर्थिक मदद के लिए हाथ बढाए. नालंदा विश्वविद्यलय के लिए चीन ने दस लाख डालर, सिंगापुर ने 50 लाख डालर, थाईलैंड ने एक लाख डालर और अस्ट्रेलिया ने दस लाख आस्ट्रेलियन डॉलर का अंशदान किया है. फिर से शुरु हुए नालंदा विश्वविद्यालय में वर्तमान में दो विषयों स्कूल ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंटल स्टडीज तथा स्कूल ऑफ हिस्टॉरिकल स्टडीज की शिक्षा दी जा रही है पर वर्ष 2020 में उसका निर्माण कार्य पूरा होने के बाद छात्र वहां से सात विषयों में स्नातक और डॉक्टरेट की उपाधि हासिल कर पाएंगे.
नालंदा विश्वविद्यालय में इन दोनों विषयों में वर्तमान में 15 छात्र अध्ययन कर रहे हैं और वहां 11 शिक्षक हैं. नालंदा विश्वविद्यालय की कुलपति गोपा सभरवाल ने बताया कि वर्तमान में उनके विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों में एक-एक जापान और भूटान के छात्र शामिल हैं तथा आने वाले समय में और भी छात्र यहां से जुडेंगे.

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