मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बेशक वादी में इस्लामिक स्टेट (आइएस) के झंडे फहराने की घटना को कुछ सिरफिरे नौजवानों की करतूत कहकर टाल दें, लेकिन कश्मीर में आतंकियों से लोहा ले रही सेना इसे गंभीर मामला मानती है। सेना की 15वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रत साहा के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों को इस पर ध्यान देना चाहिए, ताकि कश्मीरी नौजवानों को जिहादी संगठनों में शामिल होने से रोका जा सके।
श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत में सुब्रत साहा ने कहा कि आइएस की तरफ स्थानीय युवकों का आकर्षण चिंता का विषय है। अगर कश्मीरी युवकों को इस संगठन समेत किसी भी जिहादी संगठन से दूर रखना है तो उनके सुनहरे भविष्य को यकीनी बनाने के प्रयास करने होंगे। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
कश्मीर में आइएस के समर्थकों अथवा सदस्यों की मौजूदगी पर पूरी तरह चुप्पी साधते हुए उन्होंने कहा कि दस हजार से ज्यादा नौजवान इस संगठन के लिए सीरिया और इराक में लड़ रहे हैं। इसके सदस्यों द्वारा जिस धर्माध कट्टरता का परिचय दिया जा रहा है, वह चिंता का विषय है। कोर कमांडर ने कहा कि कुछ खबरों के मुताबिक मुंबई और हैदराबाद के कुछ युवक आइएस में शामिल हुए हैं। आस्ट्रेलिया गए एक कश्मीरी युवक के बारे में भी कहा जाता है कि वह अब आइएस का हिस्सा बन चुका है। ऐसे हालात में सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क रहने की जरूरत है। इसके प्रसार पर अंकुश होना चाहिए।

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