ई रिटेल को लेकर कैट 1 नवंबर से चलाएगा देशव्यापी अभियान - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 13 अक्टूबर 2014

ई रिटेल को लेकर कैट 1 नवंबर से चलाएगा देशव्यापी अभियान

  • रिटेल में ऍफ़  डी आई  को पिछले दरवाजे से प्रवेश देने का रास्ता है ई रिटेल

cait news himachal
देश के व्यापारियों के शीर्ष संगठन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की राष्ट्रीय गवर्निंग कॉउंसिल की आज नई दिल्ली में हुई एक मीटिंग में कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खण्डेलवाल ने कहा की देश में ई कॉमर्स व्यापार एक खुले मैदान की तरह है जहाँ खिलाडी अपने द्वारा ही बनाया गए नियमों को लेकर अपनी मनमर्जी से खेल रहे हैं फिर वो चाहे देश की अर्थव्यवस्था या फिर अन्य वर्गों के लिए कितना घातक ही क्यों न हो ! मीटिंग में देश के 22 राज्यों के व्यापारी नेताओं ने भाग लिया जिसकी अध्यक्षता कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी सी भरतिया ने की !

ई रिटेल व्यापार में अवास्तविक कीमतें, अनुचित प्रतिस्पर्धा और अस्वस्थ बिज़नेस प्रैक्टिस और लागत से भी काम कीमत पर माल बेचने से ऑफ लाइन बाजार में बड़ी मात्रा में विभिन्न वस्तुओं के व्यापार को लगभग 35 प्रतिशत का नुक्सान हुआ है और इसीलिए कैट ने प्रभावी रूप से सरकार का ध्यान इस गंभीर मुद्दे पर आकृष्ट करने के लिए आगामी 1 नवंबर से एक देशव्यापी अभियान चलाने की घोषणा की है ! 1 नवंबर को ई रिटेल के मुद्दे को लेकर देश भर में व्यापारी धरना देंगे !

ई रिटेल व्यापार में विदेशी निवेश किसी भी सूरत में रिटेल में ऍफ़ डी आई से कम घातक नहीं है और क्योंकि सरकार रिटेल में ऍफ़ डी आई को अनुमति न देने के निर्णय की घोषणा कर चुकी है इसलिए ई रिटेल व्यापारन की खामियों को दुरुस्त करने की तुरंत जरूरत है क्योंकि यदि ऐसा नहीं किया गया तो रिटेल व्यापार में ऍफ़ डी आई के रास्ते देश के रिटेल बाजार में प्रवेश करने वाली कम्पनियों को ई रिटेल के रास्ते एक बैकडोर प्रवेश मिलने का रास्ता खुला रहेगा ! अपने देशव्यापी अभियान में कैट न केवल व्यापारियों बल्कि नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर से जुड़े अन्य वर्ग जिसमें किसान, लघु उद्यमी, ट्रांसपोर्ट, ट्रक ऑपरेटर, हॉकर्स, कोआपरेटिव सेक्टर, स्व उद्यमी आदि अन्य वर्ग को शामिल करेगी !

कैट ने अफ़सोस जाहिर करते हुए कहा की उसने 6 नवंबर, 2013 को वाणिज्य मंत्रालय के डी आई पी पी विभाग को एक ज्ञापन देकर ई रिटेल के वर्तमान हालातों से पहले ही अवगत करा दिया था लेकिन डी आई पी पी ने इस ओर कतई ध्यान ही नहीं दिया और इसको रोकने के लिए न तो कोई कदम ही उठाये व् न ही इ रिटेल के लिए कोई नियम कानून ही बनाये !

ई रिटेल व्यापार का वर्तमान ढांचा और व्यापार करने के तौर तरीकों पर एक बड़ा सवाल खड़ा करते हुए व्यापारी नेताओं ने कहा की ई रिटेल कंपनियां साफ़ तौर पर प्रीडेटरी प्राइसिंग करते हुए ऐसे डिस्काउंट और ऑफर दे रही हैं जो सामान्य व्यापार प्रक्रिया में संभव ही नहीं है ! मीटिंग पारित एक सर्वसम्मत प्रस्ताव में सरकार से मांग की गयी है की वो इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे और आवश्यक सुधारवादी कदम उठाये जिससे ई रिटेल व्यापार में साफ़ सुथरे तरीके से व्यापार हो सके ! ई रिटेल व्यापार के बिज़नेस मॉडल की जांच और इस पर एक रेगुलेटरी अथॉरिटी के गठन की मांग के साथ साथ कैट ने यह भी मांग की है की ऑनलाइन रिटेल कम्पनियों को धन कैसे उपलब्ध हो रहा है इसकी भी जांच की जानी चाहिए !

ई कॉमर्स और इ रिटेल एक जैसे लगते हैं किन्तु दोनों एक दूसरे से बिलकुल अलग है लिहाजा इन दोनों के बीच के अंतर को समझना बेहद जरूरी है !ऐसा लगता है की जो कॉर्पोरेट इन्वेस्टर पहले रिटेल में ऍफ़ डी आई की वकालत कर रहे थेय वही लोग अब ई रिटेल व्यापार के पीछे खड़े दिखाई देते हैं ! ई रिटेल व्यापार में कंपनियां अपनी एक कम्पनी में विदेश से निवेश ले रही हैं और अपनी दूसरी कम्पनी की मार्फ़त माल बेच रही हैं ! हालाकिं ये कंपनियां कोई लाभ नहीं कमा रही हैं लेकिन फिर भी बड़ी मात्रा में डिस्काउंट और बेहद कम कीमत पर माल इन कम्पनियों के रिटेल पोर्टल पर बेचा जा रहा है जबकि इन कम्पनियों के अन्य खर्चे भी बेहद अधिक मात्रा में हैं ! सरकार को इस मुद्दे पर भी ध्यान देना बेहद जरूरी है !

ई रिटेल में उपभोक्ता स्वयं नहीं आ रहा है बल्कि ई रिटेल पोर्टलों पर बड़े डिस्काउंट और कम कीमत देकर उसे इन पोर्टल्स पर लाया जा रहा है जिससे इन रिटेल पोर्टल्स की साख में वृद्धि हो ! ऐसा क्यों हो रहा है, यह भी जांच का विषय है !

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