पर्यटन व्यवस्था को सुधारने के लिए बारहों महीने यात्रा पर हुई सहमति
देहरादून, 14 अक्टूबर, (निस) । आपदा के बाद से ही प्रदेष के पर्यटन को पटरी पर लाने की कवायद प्रदेष के मुख्यमंत्री द्वारा की जाती रही है, इसी कड़ी में अब चारधाम यात्रा की तर्ज पर बदरीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री व गंगोत्री धाम के शीतकालीन प्रवास केंद्रों पर यात्रा प्रारम्भ करने पर तीर्थ पुरोहित, पंडा समाज, मंदिर समितियों के पदाधिकारियों ने एक राय से अपनी सहमति दी है। सभी का कहना था कि श्री केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री में तो वैसे ही चारधाम यात्रा चले जिस तरह से अभी तक परम्परागत रूप से चलती रही है, लेकिन प्रदेश की आर्थिकी का पटरी पर लाने के उद्देश्य को दृष्टिगत् करते हुए इन धामों के शीतकालीन प्रवास केंद्रों के लिए भी यात्रा प्रारम्भ की जा सकती है। इसमें परम्पराओं व धार्मिक मान्यताओं का किसी प्रकार अतिक्रमण नहीं होगा और यात्रा मार्ग पर लोगों की आय पर इसका असर पड़ेगा। मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में मंदिर समितियों, पुरोहित समाज, होटल एसोसिएशन, ट्रांसपोर्ट, विभिन्न विभागों की बैठक आयोजित की गई जिसमें शीतकालीन चारधाम यात्रा चारों धामों के शीतकालीन प्रवास केंद्रों में प्रारम्भ करने पर गहन विचार विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन को बढावा देना सरकार का उद्देश्य है परन्तु धार्मिक मान्यताओं व आस्थाओं का पालन सुनिश्चित करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उल्लेखनीय है कि शीतकाल में यमुनोत्री धाम की मूर्ति खरसाली, गगोंत्री की मुखवा, केदारनाथ की ऊखीमठ तथा बद्रीनाथ जी की पांडुकेश्वर (जोशीमठ) में स्थापित कर पूजा की जाती है। शीतकाल में इन स्थानों पर चार धाम की तर्ज पर ही यात्रा प्रारम्भ करने से स्थानीय लोगों को आजीवका मिलेगी, पर्यटन को बढावा मिलेगा व इन्फास्टेªक्चर विकसित होगा। विगत वर्ष की दैवीय आपदा के बाद इस वर्ष चारधाम यात्रा व नन्दा राजजात यात्रा के सफलतापूर्वक संचालन से विश्व में उत्तराखण्ड के प्रति सकारात्मक संदेश गया है। प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की संख्या बढ़ी हैं। यदि शीतकालीन चारधाम यात्रा प्रारम्भ की जाती है तो सुरक्षित उत्तराखण्ड का संदेश और भी पुख्ता होगा। मुख्यमंत्री ने कहा की चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं पर सरकार को एक बडा निवेश करना होता है कपाट बंद होने के बाद इसका उपयोग नहीं होता है। शीतकालीन प्रवास केन्द्रों पर यात्रा शुरू करने से इसका सदुपयोग संभव होगा। तीर्थ पुरोहितों व पंड़ा समाज की एकराय से सहमति का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा की इसके अनुरूप सुविधाएं जुटाने व आधारित संरचना के विकास के लिए जोर शोर से जुटना होगा। शीतकाल में सामान्यतः आपदा कम आती है तथा पहाड़ो में मैदानो की अपेक्षा अच्छी धूप रहती है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को यात्रा मार्गो की गुणवत्ता सुधारने के लिए लो.नि.वि, बी.आर.ओ व अन्य संबधित अधिकारियों से समन्वय करने के निर्देश दिए। उन्होने पर्यटन विभाग को प्रचार अभियान की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। चारधाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष सुबोधानन्द बंह्यचारी, कृष्णाकांत कोटियाल, डिमरी धार्मिक पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी, बालकृष्ण ध्यानी सहित पंडा व पुरोहित समाज के प्रतिनिधियों ने प्रस्ताव पर सहमति देते हुए सड़कों की दशा सुधारे जाने पर विशेष बल दिया। बैठक में पर्यटन मंत्री दिनैश धनै, शहरी विकास मंत्री प्रीतम पंवार, विधायक शैलारानी रावत, राजेन्द्र सिंह भण्डारी, मुख्य सचिव सुभाष कुमार, अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा सहित वरिष्ठ अधिकारी व तीर्थ पुरोहित/पंडा समाज के पदाधिकारी मौजूद थे।
मुरारी बापू ने केदार आपदा प्रभावितो ंको दिये साढ़े सात करोड़
- केदार पुर्नर्निमाण के लिए सरकार को दिये एक करोड़
- 200 अतिरिक्त इंदिरा आवास की मुख्यमंत्री ने घोषणा
- सुगम व सुरक्षित यात्रा के लिए कार्य शुरू: हरीश रावत
देहरादून, 15 अक्टूबर, (निस)। प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रूद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि में प्रसिद्ध राम कथा वाचक पूज्य मुरारी बापू जी द्वारा आयोजित आपदा राहत कार्यक्रम में शिरकत करते हुए कहा कि केदारनाथ का पुनर्निर्माण और सुगम व सुरक्षित यात्रा के लिये कार्य शुरू कर लिया गया है, जिसके परिणाम शीघ्र ही सामने आयेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा इस वर्ष से शीतकाल के लिये प्रारम्भ की जा रही है। जिससे यात्रियों व पर्यटकों की आवाजाही बारह माह बनी रहे। उन्होंने दावा किया कि चारधाम यात्रा को सुरक्षित व व्यवस्थित बनाने के उपरान्त 40 लाख यात्री इन चारधामों में अगले वर्ष पहॅुच सकेंगे। मुख्यमंत्री श्री रावत ने मुरारी बापू द्वारा इस क्षेत्र के आपदा प्रभावित, कमजोर वर्ग, विधवा, विकलांग लोगों की मदद की सराहना करते हुए घोषणा की कि आपदा प्रभावित परिवारों के सदस्य को सरकारी नौकरी दिये जाने की कवायद की जा रही है। इसके साथ ही विधायक श्रीमती शैलारानी रावत की मांग पर उन्होंने 200 अतिरिक्त इंदिरा आवास देने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने मुरारी बापू का आभार जताते हुए कहा कि दुःख के क्षणों में हमें धैर्य दिलाकर बापू ने हमारी सहायता में हाथ आगे बढ़ाये हैं, जो कि संत का एक आशीर्वाद है, जिसके लिये में कृतज्ञ हॅू। कार्यक्रम में राम कथा वाचक पूज्य मुरारी बापू जी ने रूद्रप्रयाग और चमोली जिले के आपदा प्रभावित, विकलांग, कमजोर वर्ग, निसहाय, निराश्रित, विधावाओं के 2313 लोगों को साढे 7 करोड रूपये के आर्थिक सहायता के चैक वितरित किये। इसके साथ ही उन्होंने केदारनाथ के पुनर्निर्माण हेतु 1 करोड रुपये की धनराशि का चैक मुख्यमंत्रंी के माध्यम से बदरी-केदारनाथ मंदिर समिति को समर्पित किया। इस अवसर पर मुरारी बापू ने देवभूमि के लोगों द्वारा इस राहत राशि को स्वीकारने पर आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक व संसदीय सचिव श्रीमती शैला रानी रावत ने मुख्यमंत्री और मुरारी बापू का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री और मुरारी बापू द्वारा लोगों की सहायता के लिये आभार व्यक्त किया। उन्होंने आगमी 7 से 11 नवम्बर तक अगस्त्यमुनि में आयोजित होने वाले शरदोत्सव विकास मेले में मुख्यमंत्री को आमंत्रण भी दिया। इस अवसर पर कर्नावती क्लब के कोर्डिनेटर अरविंद राजगडिया ने बताया कि पिछले वर्ष उत्तराखंड के चमोली और रुद्रप्रयाग जिले में आई भीषण आपदा से हजारों लोग प्रभावित हो गए थे। इसके बाद मुरारी बापू ने राम कथाओं के दौरान प्रभावितों के लिए सहायता धनराशि एकत्रित की। उन्होंने कहा कि लाभार्थियों की सूची विभिन्न एनजीओ और ग्राम प्रधान के माध्यम से मुहैया कराई गई है। उन्होंने यह भी बताया कि बापू द्वारा विगत वर्ष भी आपदा के दौरान डेढ करोड रूपये आर्थिक सहायता की धनराशि दी गई थी। इस अवसर पर अगस्त्यमुनि नगर पंचायत अध्यक्ष अशोक खत्री, ब्लाक प्रमुख अगस्त्यमुनि, ऊखीमठ संतलाल, उपाध्यक्ष जिला पंचायत लखपत भण्डारी, जिलाधिकारी डाॅ0 राघव लंगर, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता काग्रेस सूरज नेगी, अपर जिलाधिकारी राहुल कुमार गोयल, सीओ स्वतंत्र कुमार, उप जिलाधिकारी सदर सीएस चैहान सहित क्षेत्रों से आये बडी संख्या में लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन जिला आपदा प्रबन्धन अधिकारी मीरा कैंतुरा ने किया।
विस उपाध्यक्ष से की मुलाकात
देहरादून, 15 अक्टूबर, (निस)। केरल विधानसभा की महिला बाल विकास एवं विकलांगजन सम्बन्धी समिति उत्तराखण्ड राज्य के अध्ययन भ्रमण पर देहरादून पहुंची, समिति ने विधान भवन में उपाध्यक्ष विधान सभा डाॅ0 अनुसूया प्रसाद मैखुरी से भेंट की जिसमें राज्य में संचालित की जाने वाली विभिन्न योजनाओं जैसे-महिला बाल विकास एवं विकलांगजनों के संबंध में विस्तार से चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त राज्य विधानसभा की संसदीय कार्य प्रणाली पर भी चर्चा हुई। इस अवसर पर उक्त समिति के सभापति श्री एम0जोजफ एवं समिति के सदस्यों व सचिव विधानसभा जगदीश चन्द्र एवं अन्य अधिकारीगण बैठक में उपस्थित रहे।
उत्तराखंड में अभी 1,024 गांव सड़क से दूर
- सड़क से न जुड़ पाने वाले सर्वाधिक 163 गांव अल्मोड़ा जिले में
देहरादून, 15 अक्टूबर, (निस)। उत्तराखंड में 1,024 गांव अभी सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं। सड़क से न जुड़ पाने के कारण यह गांव विकास की किरण से दूर हैं। लोगों को सड़क तक पहुंचने के लिए कई किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। सड़क से न जुड़ पाने वाले गांवों की संख्या अल्मोड़ा जिले में सर्वाधिक है, इस जिले में 163 गांव अभी सड़क से दूर हैं। 250 की आबादी तक के गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना भी चलाई जा रही है, उसके बावजूद राज्य में 1,024 गांव अभी तक सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं। प्रदेश में सड़क से न जुड़ पाने वाले गांवों में अल्मोड़ा जिले में सर्वाधिक 163 गांव, बागेश्वर में 65 गांव, चमोली जिले में 73 गांव, चंपावत जिले में 73 गांव, देहरादून जिले में 40 गांव, हरिद्वार जिले में 1 गांव, नैनीताल जिले में 72 गांव, पौड़ी जिले में 132 गांव, पिथौरागढ़ जिले में 129 गांव, रूद्रप्रयाग जिले में 56 गांव, टिहरी जिले में 120 गांव, उधमसिंहनगर जनपद में 3 गांव, उत्तरकाशी जिले में 97 गांव शामिल हैं। इन सभी गांवों की आबादी 250 से अधिक है। सड़क से न जुड़े पाने के कारण यह गांव अभी विकास की किरण से कोसों दूर हैं। लोगों को सड़क तक पहुंचने के लिए कई किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। सड़क जैसी मूलभूत सुविधा का विकास न होे पाने के कारण इन गांवों में अन्य सुविधाओं का भी विकास नहीं हो पाया। 250 की आबादी तक के सभी गांवों को सड़क से जोड़ने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना लागू की गई है, लेकिन उसके बाद भी अनेक गांव अभी सड़क से दूर हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना 25 दिसंबर 2000 को शुरु हुई थी। उत्तराखंड में चैदह वर्षों में अब तक 547 सड़कें ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बन पाई हैं। राज्य में 61 सड़कें वन विभाग में क्लीरेंस के लिए पेंडिंग पड़ी हैं, इनमें अल्मोड़ा जिले में 3, बागेश्वर जिले 9, चमोली जिले में 11, चंपावत जिले में 1, देहरादून जिले में 11, नैनीताल जिले में 2, पौड़ी जिले में 4, पिथौरागढ़ जिले में 9, रूद्रप्रयाग जिले में 2, टिहरी जिले में 6 और उत्तरकाशी जिले में 3 सड़कें शामिल हैं।
ट्रक ने मां-बेटी को कुचला, बेटी की मौत
देहरादून, 15 अक्टूबर, (निस)। स्कूटी से अपनी बच्ची को स्कूल लेकर जा रही महिला टीचर व बच्ची को तेज रफ्तार ट्रक ने रौंद डाला। जसके कारण बच्ची की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि गंभीर रूप ये घायल हो गयी। महिला का चिकित्सालय में भर्ती कराया गया जहां वह जिन्दगी और मौत से जूझ रही है। पुलिस ने ट्रक चालक को गिरफ्तार कर लिया है जबकि ट्रक को सीज कर दिया है। बुधवार सुबह हिल्टन स्कूल में टीचर टर्नर रोड निवासी सुषमा बच्छेती उसके ही स्कूल में पढ़ने वाली अपनी पुत्री सूबी बच्छेती को स्कूल लेकर जा रही थी। तभी आईएसबीटी के करीब पीछे से आ रहे ट्रक ने सुषमा की स्कूटी को टक्कर मार दी। स्कूटी पर सड़क पर जा गिरी और ट्रक ने मां बेटी दोनो को कुचल दिया। जिसके कारण सूबी बच्छेती पुत्री मनोज बच्छेती की मौके पर ही मौत हो गयी। जबकि सुषमा बच्छेती गंभीर रूप से घायल हो गयी। घालय सुषमा को चिकित्सालय में भर्ती कराया गया जहां वह जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। दिन निकलते ही सड़क हादसे में छात्रा की मौत की बात सुनकर लोग मौके पर जमा हो गये और हंगामा काटना शुरू कर दिया। हगामें की सूचना मिलने पर पुलिस अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पंहुचे और ट्रक को सीज कर चालक अदनान पुत्र मुज्जमिल निवासी ज्योतिबाग अमरोहा को गिरफ्तार कर लिया। शहर के अन्दर तेज रफ्तार वाहनों को लेकर लोगों ने करीब एक घंटा आईएसबीटी चैक पर जाम लगाया। पुलिस ने किसी तरह भीड़ को शंात किया। शिमला बाईपास पर लगने वाले ईंटों के अवैध बजार के खिलाफ लगातार लोग अधिकारियों से शिकायत कर रहे हैं लेकिन कोई कार्यवाही इनके खिलाफ नहीं की जा रही है। सुबह-सुबह शिमला बाईपास चैके के आस-पास दर्जनों ईटों से भरे ट्रक आ जाते है जिससे लोगों को परेशानी होती है और यह ट्रक ही दुर्घटना का कारण बनते है।
किसानों से वर्ष में एक बार हो ऋण वसूली
देहरादून, 15 अक्टूबर, (निस)। उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री किशोर उपाध्याय ने मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत जी को पत्र लिखकर किसान क्रेडिट कार्ड धारक किसानों से सहकारिता समितियों के माध्यम से लिये गये ऋण की वसूली वर्ष में दो बार की बजाय एक ही बार करवाये जाने का अनुरोध किया है। ज्ञातव्य हो कि हरिद्वार से आये किसानों के एक प्रतिनिधिमण्डल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री उपाध्याय से मुलाकात कर उन्हें इस समस्या से अवगत कराया था। किशोर उपाध्याय ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि यदि सहकारिता विभाग या सहकारी समितियांे द्वारा किसानों से वर्ष में दो बार की बजाय एक ही बार ऋण की वसूली की जाय तो इससे किसानांें को कई असुविधाओं से छुटकारा मिलेगा इसलिए इस प्रस्ताव को स्वीकार करने में सरकार को कोई कठिनाई नही होनी चाहिए। श्री किशोर उपाध्याय ने एक अन्य मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राज्य की खेल प्रतियोगिताओं से जुड़ी प्रतिभाओं की ओर ध्यान आकृष्ठ कराते हुए अनुरोध किया कि पूर्व में प्रदेश के राष्ट्रीय स्तर के खिलाडि़यों के लिए सरकारी एवं अर्द्ध सरकारी संस्थानों/प्रतिष्ठानों/विभागों में सेवायोजन में 4 प्रतिशत आरक्षण की सुविधा प्रदान की गई थी, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से आने वाले समय में खिलाडियों की खेलों के प्रति रूचि कम होगी। खेलों को बढ़ावा देने के लिए यह व्यवस्था पूर्ववत की जानी चाहिए।


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