केंद्र की मोदी सरकार देश में उद्योग धंधों को बढ़ावा देने के लिए ‘‘मेक इन इंडिया’’ योजना को शत-प्रतिशत कामयाब बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इस योजना से देश में परोक्ष रूप से लघु उद्योगों को फायदा होने की उम्मीद की जा रही है। ऐसे उद्योग वास्तव में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यही वह श्रम है जो गावों से शहर के पलायन को रोकता है। इन उद्योगों के विकास में बिजली सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। इसकी महत्ता को देखते हुए भारत सरकार ने अप्रैल 2005 में राजीव गांधी ग्राम विद्युतीकरण योजना की षुुरूआत की थी। इस स्कीम के तहत वर्ष 2020 तक देष के ग्रामीण इलाकों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अंतर्गत गांवों का विद्युतीकरण कर सभी को बिजली की उपलब्धता सुलभ कराना और गरीबी रेखा से नीचे रह रहे परिवारों को निषुल्क बिजली कनैक्शन उपलब्ध कराना है। हाल ही में केंद्र सरकार ने इस योजना को और अधिक सशक्त बनाते हुए दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना भी आरंभ की है। इस योजना की अनुमानित लागत 43,033 करोड़ रुपए है। इस योजना में अलग अलग कृषि और गैर कृषि फीडर की व्यवस्था होगी। इसके अतिरिक्त इस योजना में ग्रामीण क्षेत्रों में उप पारेषण तथा वितरण नेटवर्क को मज़बूत बनाना भी शामिल है। यह स्कीम देश के दूर दराज के इलाकों तक बिजली पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगी। लेकिन बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ जैसे अब भी ऐसे राज्य हैं जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों की बात तो दूर शहरों में भी 24 घंटे बिजली नहीं मिल पा रही है। इनमें कुछ ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ लोगों के लिए बिजली आज भी एक सपना बनी हुई है। ऐसे गांवों में आज भी लोग रात के अंधेरे में ही जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। जिन गांवों में बिजली के खम्बे पहुंच भी गए हैं वहां बिजली का पहुंचना न होने के बराबर ही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह उद्देश्य पूरा हो पाएगा? क्या देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में तय सीमा तक यह स्कीम पहुंच पाएगी? ग्रामीण इलाकों में बिजली की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इसके संभव होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।
बिहार बिजली के मामले में देश के सबसे पिछड़ेे राज्यों में एक है। बिजली की किल्लत से जूझने वाले बिहार की तस्वीर राज्य सरकार बदलना चाहती है। विशेषकर गांवों में बिजली की कमी सबसे अधिक है। इसी कमी को दूर करने के लिए बिहार सरकार ने ठोस कदम उठाते हुए 100 प्रतिशत ग्रामीण विद्युतीकरण का लक्ष्य रखा है। जिस पर करीब 5000 करोड़ रुपए खर्च किये जायेंगे। इसके तहत राज्य सरकार साल भर के अंदर 26,000 से अधिक गांवों में बिजली पहुंचाएगी। बिहार सरकार के दावों को माने तो अब तक करीब 20,000 गांवों में बिजली पहुंचा दी गई है। राज्य सरकार के भवन निर्माण मंत्री दामोदर राउत के अनुसार वर्ष 2015 तक बिहार में बिजली व्यवस्था ठीक करने के लिए राज्य सरकार ने 334 करोड़ रूपए खर्च करने का फैसला किया है। हर गांव के खराब पड़े ट्रांसफार्मर को बदला जाएगा। राजीव गांधी ग्राम विद्युतीकरण योजना के तहत लगाए गए 25 के. वी वालेे ट्रांसफार्म की जगह 100 के.वी या आवष्यकता पड़ी तो 63 के.वी के ट्रांसफार्म लगाए जाएंगे। 2015 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार को इस काम को करना है। उनका दावा है कि नीतिष कुमार ने बिहार की जनता से जो भी वादा किया था, उसे पूरा किया है। बिहार के विकास के लिए ठोस कदम उठाएं हैं, जिसका सबसे बड़ा साक्ष्य यह है कि हर पांच किलोमीटर पर एक हाईस्कूल है, साथ ही सड़क, षिक्षा व बिजली की व्यवस्था भी काफी सुदृढ़ हुई है। मंत्री दामोदर राउत की बातों में सच्चाई है, उनके नेता भी इस सच्चाई को संपर्क यात्रा द्वारा बिहार की जनता को बताते नहीं थक रहे थे और बार-बार यह दोहराते नजर आए कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में जनता के बीच वोट मांगने तभी जाएंगे, जब पूरे राज्य में बिजली की रोषनी दिखाई देगी। मालूम हो कि यह प्रतिज्ञा जदयू के वरिश्ठ नेता नीतिष कुमार ने मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए भी आम जनों के समक्ष लिया था।
यह अच्छी बात है कि समय-समय पर माननीय नीतिष कुमार अपने कार्यों को विकास से जोड़ना नहीं भूलेे और न ही हमें याद दिलाना भूलते हैं कि उनकी सरकार ने बिहार के विकास के लिए क्या क्या कदम उठाए हैं? लेकिन सीतामढ़ी जिले के सुरसण्ड ब्लॉक का भिट्ठा गांव इस सच्चाई से दूर नजर आता है। जहाँ चार महीने पहले ट्रांसपोर्ट का कंडक्टर राम बाबू राय लगभग सुबह के छह बजे अपनी बस को ले जाने के लिए भिट्ठा मोड़ पहुंचा। समय से पहले पहुंचने पर वह पान खाने एक दुकान पर पहुंचा ही था कि अचानक दुकान के सामने बिजली की जर्जर लाइन का खस्ताहाल तार उस पर गिर गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गयी। इस हादसे के बाद भी बिजली विभाग का कोई भी अधिकारी बिजली की इस दुव्र्यवस्था को ठीक करने नहीं आया है। भिट्ठा मोड़ जो भारत और नेपाल की सरहद पर स्थित है। यहां पर सीमा सुरक्षा बल का कैंप भी है। भिट्ठा मोड़ ओ. पी. चैक पोस्ट और नेपाल के सरहद पर दी जाने वाली सारी सुविधाएं यहां पर उपलब्ध होनी चाहिए। लेकिन सच्चाई यह है कि चार महीने से यहां फोटो प्रति की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। 1 नवम्बर को भगवतीपुर के स्थानीय निवासी मोहम्मद इलाही बख्ष भिट्ठा ओ. पी. में एक आवेदन जमा करने गए थे। रिसीविंग के दौरान दरोगा ने कहा कि आवेदन की फोटो प्रति करा लाओ। इलाही बख्ष ने पूरे सीमावर्ती इलाके को छान मारा मगर बिजली न होने की वजह से आवेदन की प्रति नहीं हो सकी। मजबूर इलाही बख्ष को बिना आवेदन जमा किए ही लौटना पड़ा।
भारत-नेपाल बार्डर होने की वजह से यहां पर एक बाजार भी है। लेकिन बिजली की सुविधा न होने की वजह से यहां की जनता को तरह-तरह की परेषानियों का सामना करना पड़ता है। बिजली की समस्या के बारे में विस्तार से बताते हुए भिट्ठा गांव के निवासी कमल कांत जिनका एक छोटा सा सेलून है, कहते हैं कि-‘‘ मेरे सेलून में बड़ी संख्या में लोग बाल कटवाने और दाढ़ी बनवाने के लिए आते हैं। बिजली न होने की वजह से इस काम में इस्तेमाल होने वाली छोटी- छोटी मषीनों का इस्तेमाल नहीं हो पाता है। जिसकी वजह से अब लोग मेरी दुकान पर नहीं आते हैं और इसका असर मेरे रोज़गार पर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि स्थानीय अधिकारी को जहां-तहां पैसा मिलता है, वह वहां दौड़ते-फिरते हैं, लेकिन यहां बिजली की दयनीय स्थिति की कोई सुध लेने वाला भी नहीं है। इस संबंध में जब उनसे पूछा गया कि जन प्रतिनिधि क्या करते हैं तो उन्होंने बताया कि जन प्रतिनिधि को सार्वजनिक विकास से क्या लेना देना? जनप्रतिनिधियों के पास तो सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं, वह हमारी तरह अंधेरे में थोड़े जीते हैं।’’ खास बात यह है कि यह क्षेत्र बिहार सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री षाहिद अली खां का है, लेकिन वर्तमान में इस क्षेत्र की जो स्थिति है वह अपने आप में कई प्रष्न खड़े कर रही है। साथ ही आपको यह भी मालूम होना चाहिए कि अभी भी बिहार के 8 हजार गांव में बिजली नहीं है, ऐसी परिस्थिति में बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी के सीएमडी एवं उर्जा सचिव प्रत्यय अमृत का बिजली की स्थिति को लेकर क्या सिर्फ 200 विधायकों से विचार-विमर्ष कर लेने से ही बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की दयनीय स्थिति में सुधार आ जाएगा या इस दिषा में और कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की आवष्यकता है? राज्य के सभी गांवों को क्वालिटी बिजली देना सरकार की पहली प्राथमिकता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए रात-दिन मेहनत करनी होगी। यह बातें स्वातंत्रता दिवस पर के मौकेे पर एक काम मे बोलते हुए प्रत्यय अमृत ने कहीं थीं। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। नेपाल में माओवाद तथा सीतामढ़ी में नक्सलवाद की पकड़ है। इसके अलावा भारत-नेपाल बार्डर पर अवैध वस्तुओं की तस्करी आम सी बात है। ऐसे में बिजली न होने की वजह से यहां पर तैनात पुलिस और दूसरी एजेंसियों को सूचनाओं का आदान-प्रदान नहीं हो पाता है। जिस भिट्ठा गांव में चार महीने से जर्जर पड़ी बिजली की लाइन की मरम्मत नहीं की जा सकी है वहां पर इस प्रष्न का उठना स्वाभिक है कि क्या देहात में खराब पड़े टंªासफार्मर 2015 के विधानसभा चुनाव से पहले बदल दिए जाएंग या फिर यहां की जनता को अंधेरे में ही अपनी बाकी की जिंदगी गुजारनी पड़ेगी।
निकहत परवीन
(चरखा फीचर्स)



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