जम्मू.कश्मीर में किसी भी दल के सरकार नहीं बना सकने की स्थिति को देखते हुए राज्यपाल शासन लगा दिया गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जम्मू.कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा द्वारा राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को कल रात दी गयी रिपोर्ट के बाद यह फैसला लिया गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि श्री उमर अब्दुल्ला ने अनुरोध किया है कि उन्हें कार्यवाहक मुख्यमंत्री के पद से मुक्त कर दिया जाए। उल्लेखनीय है कि जम्मू.कश्मीर विधानसभा के गत माह हुए चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। पीपुल्स डेंमोक्रेटिक पार्टी को र्सवाधिक 28 सीटें मिली हैं जो बहुमत से 16 कम है। भाजपा को 25. नेशनल कांफ्रेंस को 15 और कांग्रेस को 12 सीटें मिली हैं।
जम्मू.कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल 19 जनवरी को समाप्त हो रहा है और उससे पहले नयी सरकार का गठन होना जरूरी है। लेकिन श्री उमर अब्दुल्ला के कार्यवाहक मुख्यमंत्री के पद पर नहीं रहने के फैसले को देखते हुए राज्यपाल को अपनी रिपोंर्ट जल्दी भेजनी पड़ी। सूत्रों के अनुसार गृह मंत्रालय ने राज्यपाल की रिपोर्ट कल रात प्रधानमंत्री कार्यालय को जरूरी कार्रवाई के लिए भेज दी थी। समझा जाता है कि राष्ट्रपति ने राज्यपाल शासन लागू करने को अपनी सहमति दे दी है। भाजपा की नियमित प्रेस कांफ्रेंस में पूछे जाने पर दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राज्य में स्थायी सरकार के लिए चर्चा चल रही है। विधानसभा का कार्यकाल 19 जनवरी को समाप्त हो रहा है लेकिन कार्यवाहक मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पद पर बने रहने में अनिच्छा जताई है। यही वजह है कि राजकाज चलाने के लिए वहां राज्यपाल शासन लगाया गया है। कांग्रेस ने कहा है कि राज्य में लोकतांत्रिक सरकार बनाने की जिम्मेदारी पीडीपी तथा भाजपा की है जिन्हें सबसे ज्यादा सीटें मिली है। पार्टी की प्रवक्ता शोभा ओझा ने संवाददाताों के सवालों पर कहा कि जनता ने खंडित जनादेश दिया है और सरकार बनाने की जवाबदेही इन दोनों दलों की है।

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