- भाजपा को 7, झामुमों को 6, काॅग्रेस को 3 तथा झाविमों को 2 सीटें प्राप्त हुई
- संताल में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी, झामुमों दूसरे नम्बर पर
सबा तीन करोड़ की आबादी वाले झारखण्ड की राजनीति में संताल परगना प्रमण्डल का योगदान काफी महत्वपूर्ण रहा है। इस प्रमण्डल के तमाम छः जिलों-दुमका, देवघर, गोड्डा, पाकुड़, साहेबगंज व जामताड़ा में लोकसभा की 3 व विधानसभा की कुल 18 सीटें हैं। झारखण्ड विधानसभा आमचुनाव-2014 में संताल से भाजपा ने सर्वाधिक सीट पर विजयश्री हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा प्राप्त किया। दुमका, देवघर, मधुपुर, महगामा, गोड्डा, बोरियो व राजमहल सीट पर अपना प्रभुत्व कायम कर भाजपा ने जहाँ एक ओर वर्ष 2009 की तुलना में अपनी स्थिति काफी मजबूत किया वहीं झामुमों ने बरहेट, लिट्टीपाड़ा, महेशपुर, शिकारीपाड़ा, जामा व नाला सीट पर जीत हासिल कर दूसरा स्थान प्राप्त किया। काॅग्रेस के खाते में पाकुड़, जरमुण्डी व जामताड़ा सीट रही, जबकि झाविमों को पोड़ेयाहाट व सारठ सीट से ही संतोष करना पड़ा। संताल परगना प्रमण्डल के देवघर विधानसभा सीट के लिये सर्वाधिक मतदान हुआ। इस प्रमण्डल के एक मात्र एससी सीट पर भाजपा ने नारायण दास को उम्मीदवार बनाया था, जबकि राजद ने पूर्व विधायक सुरेश पासवान को। भाजपा प्रत्याशी ने इस सीट पर एक बड़े अन्तर से विरोधी राजद प्रत्याशी को मात दिया। भाजपा के नारायण दास को विधानसभा चुनाव में 92,022 मत प्राप्त हुए, जबकि राजद प्रत्याशी सुरेश पासवान को मात्र 46,870 मत से ही संतोष करना पड़ा। इस प्रकार 45,252 मतों के एक बड़े अन्तर से सुरेश पासवान को हार का स्वाद चखना पड़ा। वर्ष 2009 के चुनाव में सुरेश पासवान ने इस सीट पर अपना परचम लहराया था।
संताल परगना प्रमण्डल के सर्वाधिक रसूख वाले दुमका विधानसभा सीट पर सूबे के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को काफी मेहनत के बाद भी हार का मुँह देखना पड़ा। भाजपा के डा0 लुईस मराण्डी ने झामुमों के परंपरागत किले को घ्वस्त करते हुए भाजपा का झंडा लहरा दुमका में लहरा कर अपनी जीत का जश्न मनाया। भाजपा प्रत्याशी डा0 मराण्डी ने 5,262 मतों के अन्तर से हेमन्त सोरेन को हराया। भाजपा प्रत्याशी को 70367 मत प्राप्त हुए, जबकि झामुमों के युवराज हेमन्त सोरेन को मात्र 65,105 मत प्राप्त हुए। मूँछं की लड़ाई में हेमन्त सोरेन को घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ा। सड़क, बिजली तथा उप राजधानी दुमका में अन्य सुविधाओं के लिये लगातार प्रयासरत हेमन्त सोरेन ने विकास के कई काम थे किये किन्तु फिर भी अपनी सीट वे बचा नहीं पाए। मोदी फेक्टर ने उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया। 15 दिसम्बर 2014 को दुमका के हवाई अड्डा में 9 विधानसभा सीटों के प्रत्याशियों के लिये मतदाताओं से समर्थन माँगने दुमका पहुँचे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैली में लाखों लोग जुटे थे। मोदी के भाषण का ही असर था कि दुमका के लिये लगातार काम करते रहने के बावजूद मतदाताओं का दिल श्री सोरेन के समर्थन में न पसीजा। इस चुनाव में सबसे कम मतों के अंतर से हार-जीत का फैसला राजमहल विधानसभा सीट पर हुआ। राजमहल सीट से भाजपा प्रत्याशी अनन्त ओझा ने मात्र 702 मतों के अन्तर से जीत दर्ज की। उन्होनें झामुमों प्रत्याशी मो0 ताजुद्दिन को हराया।
अनन्त ओझा को इस चुनाव में 77,481 मत मिले जबकि झामुमों के मो0 ताजुद्दिन को 76,779 मत प्राप्त हुए। बोरियो से भाजपा के ताला मराण्डी ने पूर्व मंत्री व झामुमों के कद्दावर नेता लोबिन हेम्ब्रम को हराया। इस चुनाव में ताला मराण्डी को 57,565 तथा लोबिन हेम्बग को 56,853 मत प्राप्त हुए। ताला मराण्डी ने मात्र 712 मतों के अंतर से प्रतिद्वन्दी को मात दी। सूबे के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने दुमका व बरहेट विधानसभा सीट पर अपना पर्चा दाखिल किया था। दुमका में तो उन्हें हार का स्वाद चखना पड़ा, किन्तु बरहेट सीट पर एक बड़े अंतर से प्रतिद्वन्दी को मात देने में उन्हें सफलता प्राप्त हुई। बरहेट विधानसभा सीट पर हेमन्त सोरेन को 62,515 मत प्राप्त हुए जबकि झामुमों से विक्षुप्त होकर भाजपा में शामिल होने वाले हेमलाल मुर्मू को मात्र 38,428 मत ही प्राप्त हुए। 24,087 मतों के विशाल अन्तर से हेमन्त ने हेमलाल मुर्मू को मात दिया। झामुमो की राजनीति से खुद की पहचान बनाने वाले संताल के दो नेताओं को इधर-उधर भटकने के बाद घर वापसी कार्यक्रम के तहत एक बड़ा तोहफा प्राप्त हुआ। झामुमों सुप्रिमों शिबू सोरेन के साथ राजनीति में जिन्दगी की शुरुआत करने वाले पूर्व उप मुख्यमंत्री व लम्बे समय तक दुमका विधानसभा सीट से झामुमों विधायक रहे प्रो0 स्टीफन मराण्डी ने वर्ष 2014 के चुनाव में महेशपुर विधानसभा सीट पर विजयश्री प्राप्त कर राजनीति के उत्तरार्ध से खुद को वापस ला खड़ा कर लिया।
एक समय झामुमों के प्रभावशाली नेताओं में शुमार प्रो0 स्टीफन मराण्डी को जब झामुमों के युवा नेताओं स्व0 दुर्गा सोरेन व पूर्व मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पार्टी से किनारा कर दिया तो ठौर तलाशने वे काॅग्रेस में शामिल हो गए। काॅग्रेस के टिकट पर वर्ष 2009 का विधानसभा चुनाव उन्होनें दुमका से लड़ा था किन्तु वे तीसरे पायदान पर थे। वर्ष 2009 के चुनाव में हेमन्त सोरेन ने भाजपा प्रत्याशी डा0 लुईस मराण्डी को मामूली अंतर से हराया था, जबकि काॅग्रेस के प्रो0 स्टीफन मराण्डी तीसरे नम्बर पर थे। वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में झामुमों के टिकट पर महेशपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले प्रो0 स्टीफन मराण्डी ने भाजपा प्रत्याशी देवीघन टुडू को 6,156 मतों के अन्तर से हरा दिया। झामुमों प्रत्याशी प्रो0 स्टीफन मराण्डी को 51,866 मत प्राप्त हुए थे जबकि भाजपा प्रत्याशी देवीधन टुडू को 45,710 मत प्राप्त हुए। लिट्टीपाड़ा विधानसभा सीट पर एक कद्दावर नेता के रुप में शुमार साईमन मराण्डी को उनके विधानसभा सीट से हरा देना काफी कठिन माना जाता रहा किन्तु इस चुनाव में झामुमों नेता डा0 अनिल मुर्मू ने 25,033 मतों के अन्तर से भाजपा नेता को शिकस्त देकर झामुमों को पार्टी से उन्हें टिकट देने की सार्थकता से अवगत करा दिया। मुसलमानों के खलीफा कहे जाने वाले अकिल अख्तर को पाकुड़ की जनता ने इस मर्तबा खामोश कर दिया।
वर्ष 2009 के चुनाव में अकिल अख्तर पाकुड़ विधानसभा सीट पर जीत दर्ज किया था। झामुमों ने वर्ष 2014 के चुनाव में भी उन्हें इसी विधानसभा क्षेत्र से खड़ा किया था। पार्टी के विश्वास पर अकिल अख्तर खरा नहीं उतर सके। मंझे हुए काॅग्रेसी नेता आलमगीर आलम से उन्हें हार का स्वाद चखना पड़ा। पाकुड़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले काॅग्रेसी नेता आलमगीर आलम ने झामुमों प्रत्याशी अकिल अख्तर को 21,066 मतों के विशाल अंतर से हरा दिया। काॅग्रेस प्रत्याशी आलमगीर आलम ने 83,338 मत प्राप्त किये जबकि झामुमों प्रत्याशी अकिल अख्तर को 62,272 मत ही प्राप्त हुए। शिकारीपाड़ा विधानसभा सीट पर फिर से विजयश्री हासिल कर विधायक नलिन सोरेन ने अपना किला बरकरार रखा। शिकारीपाड़ा विधानसभा सीट से वतौर जनप्रतिनिधि झामुमों नेता व पूर्व कृषि मंत्री नलिन सोरेन ने इस चुनाव में भी विरोधियों को औंधे मुँध गिरा दिया। वर्ष 1997 से शिकारीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र की राजनीति करने वाले पारितोष सोरेन को दूसरी मर्तबा लगातार हार का स्वाद चखना पड़ा। झामुमों नेता नलिन सोरेन को इस चुनाव में 61,901 मत प्राप्त हुए जबकि दूसरे नम्बर पर रहे झाविमों नेता पारितोष सोरेन को 37,400 मत ही प्राप्त हुए। इस प्रकार नलिन सोरेन ने 24,501 मतों के विशाल अन्तर से झाविमों प्रत्याशी पारितोष सोरेन को मात दिया। नाला विधानसभा सीट पर सत्यानन्द झा (बाटुल झा) को नुकसान उठाना पड़ा।
झामुमों उम्मीदवार रविन्द्र नाथ महतों ने मात्र 7,015 मतों के अन्तर से श्री झा को हराकर विधानसभा की दहलीज पर कदम रख दिया। झामुमों प्रत्याशी रविन्द्र नाथ महतों को 65,131 वोट मिले जबकि भाजपा के सत्यानन्द झा (बाटुल झा) 49,116 मतों से ही संतोष करना पड़ा। भाजपा प्रत्याशी की हार के पीछे उनकी दूसरी पत्नि से पिछले वर्षों में लगातार तकरार को महत्वपूर्ण माना जाता रहा। पिछले पाँच वर्षों तक विधायक रहने के बाद भी क्षेत्र में कोई उपलब्धी प्राप्त न करना भी एक बड़ा कारण माना जाता रहा है। जरमुण्डी विधानसभा सीट पर रिजल्ट काफी अभूतपूर्व रहा। जबकि किसी को इस बात का कोई इल्म नहीं था कि विधायक हरिनारायण राय की झोली से जरमुण्डी विधानसभा सीट किसी अन्य की झोली में समा जाऐगा, हुआ किन्तु इसके विपरीत। क्षेत्र में अपनी मेहतन व काम के बलबूते दिग्गजों को मात देने वाले युवा बादल पत्रलेख ने यह दिखला दिया कि अभी भी पैसा व प्रभूत्व कोई खास मायने नहीं रखता। वैसे हवा पूरी तरह भाजपा के समर्थन में उड़ रही थी। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दुमका आगमन पर जिस तरह की भीड़ हवाई अड्डा दुमका में देखी गई थी उससे साफ अनुमान लगाया जा रहा था कि संताल परगना के तमाम 18 में से कम से कम 10 सीट पर भाजपा का आधिपत्य होगा किन्तु ऐसा नहीं हुआ। जरमुण्डी में भाजपा तीसरे पायदान पर रहा। काॅग्रेस प्रत्याशी बादल पत्रलेख को 43,981 मत मिले जबकि झामुमों प्रत्याशी हरि नारायण राय को 41,273 मत ही प्राप्त हुए। मात्र 2,708 मतों के अन्तर से ही हरिनारायण राय को शिकस्त का मुँह देखना पड़ा। भाजपा प्रत्याशी अभयकांत प्रसाद तीसरे नम्बर पर दिखे। जामताड़ा में काॅग्रेस नेता फुरकान अंसारी के पुत्र डा0 इरफान अंसारी ने भाजपा प्रत्याशी विरेन्द्र मंडल को हराया। डा0 इरफान अंसारी को 67,846 मत मिले जबकि भाजपा के विरेन्द्र मंडल को 58,349 मत ही प्राप्त हुए। डा0 इरफान ने मात्र 9,137 मतों के अंतर से भाजपा प्रत्याशी को मात दिया। शिबू सोरेन की पुत्रवधु व जामा विधानसभा सीट से झामुमों के टिकट पर चुनाव लड़ने वाली सीता सोरेन की यह लगातार दूसरी जीत है। इससे पूर्व भी वह जामा की विधायक थी।
स्व0 दुर्गा सोरेन इसी सीट से चुनाव लड़ा करते थे। उनकी मृत्यु के बाद संवेदना मत सीता को प्राप्त होता रहा। इस चुनाव में सीता सोरेन ने भाजपा प्रत्याशी सुरेश मुर्मू को मात्र 2,306 मतों के अन्तर से ही हराया। सीता सोरेन को 53,250 तथा सुरेश मुर्मू को 50,944 मत प्राप्त हुए। भाजपा के राज पालिवार मधुपुर सीट बचा पाने में सफल रहे। मुस्लिम बहुल आबादी वाले इस क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी ने 74,325 मत प्राप्त किये जबकि झामुमों नेता हाजी हुसैन अंसारी को 67,441 मत प्राप्त हुए। सारठ व पोड़ेयाहाट सीट झाविमों के नाम रहा। सारठ से झाविमों के युवा नेता रणधीर सिंह ने भाजपा के दिग्गज प्रत्याशी उदय शंकर सिंह को 13,901 मतों के अंतर से हरा दिया। भूमिहार बाहुल्य इस विस क्षेत्र पर उदय शंकर ंिसह दूसरे पायदान पर खड़ा दिखे जबकि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शशांक शेखर भोक्ता तीसरे नम्बर पर रहें। झाविमों प्रत्याशी रणधीर सिंह को 62,717 मत प्राप्त हुए जबकि दूसरे नम्बर पर रहे भाजपा के उदय शंकर सिंह उर्फ चुन्ना सिंह को मात्र 48,816 मतों से ही संतोष करना पड़ा। इसी तरह पोड़ेयाहाट विधानसभा सीट पर प्रदीप यादव ने लगातार दूसरी मर्तबा जीत दर्ज की। झाविमों केन्द्रीय समिति महासचिव प्रदीप यादव ने भाजपा के देवेन्द्र सिंह को 11,158 मतों के अंतर से हरा दिया। प्रदीप यादव को कुल 64,036 मत मिले जबकि भाजपा प्रत्याशी श्री ंिसंह को 52,878 मत ही प्राप्त हुए। गोड्डा जिला का गोड्डा व महगामा विधानसभा सीट भाजपा के नाम रहा। गोड्डा में राजद के पूर्व विधायक संजय प्र0 यादव को हार का मुँह देखना पड़ा। भाजपा के रघुनंदन मंडल ने 24,486 मतों के अन्तर से राजद प्रत्याशी संजय प्र0 यादव को मात दिया। रघुनंदन मंडल को 87,158 मत प्राप्त हुए जबकि संजय प्र0 यादव को मात्र 52,672 मत ही प्राप्त हो सका। महगामा विधानसभा सीट भी तकरीबन गोड्डा की तरह ही रहा। इस सीट पर भाजपा के अशोक कुमार ने कब्जा जमाया। झाविमों के मो0 शाहिद इकबाल को 31,560 मतों के अंतर से भाजपा प्रत्याशी अशोक कुमार ने हराया। भाजपा प्रत्याशी को 70,335 मतदाताओं ने अपना समर्थन दिया जबकि झाविमों प्रत्याशी को 39,075 मतदाताओं का ही समर्थन प्राप्त हो सका।
अमरेन्द्र सुमन
दुमका

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