मुलताई में शहीद किसान स्मृति सम्मेलन में शहीद किसानों को देशभर से जुटे किसान संगठनों, जनसंगठनों के नेताओं ने भावभिनी श्रद्वांजलि दी। किसानों ने अपना घोषणा पत्र जारी करते हुए केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए नए भू-अध्यादेश के खिलाफ आंदोलन देशभर में चलाने का ऐलान करने के साथ ही गरीब किसान, दलित, आदिवासी, मजदूरों के हक-हकूकों के साथ खिलवाड़ करने वालों को उखाड़ फैंकने का आह्वान किया। मुलताई के किसानों के संधर्ष पर आधारित पुस्तिका ”संघर्ष के 17 वर्ष“ साप्ताहिक पत्रिका “जनयोद्वा” का सामूहिक विमोचन सांसद मुन्नवर सलीम की मौजूदगी में हुआ। शहीद किसानों के परिजनों का सम्मान किया गया, साथ ही विद्या मेमोरियल ट्रस्ट ग्वालियर की ओर से 24 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। रक्तदान शिविर भी आयोजित किया गया।
मुलताई के हाईस्कूल ग्राउंड में किसान संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष टंटी चैधरी की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद चैधरी मुन्नवर सलीम ने केंद्र सरकार की गरीब-किसान विरोधी नीतियों को गिनाते हुए कहा कि मोदी की दो मंुही बांते और दोहरी नीति अब स्पष्ट रूप से सामने आ रही है। नरेंद्र मोदी का मकसद उनके चुनाव में मोटी रकम लगाने वाले काॅरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाना भर रह गया है। नए शहर बसाने के लिए सात हजार करोड़ देने वाली मोदी सरकार सिंचाई नहरों के निर्माण को सिर्फ एक हजार करोड़ देती है, यह खेती-किसानी करने वाली देश की 70 फीसदी बिरादरी के साथ अन्याय है। मुलताई गोलीकांड के शहीदों को श्रद्वांजलि देते हुए मुन्नवर सलीम ने कहा कि किसानों के खून की एक-एक बुंद इंकलाब लाएगा, संघर्ष और बुनियादी परिवर्तन का आधार बनेगा। रक्षा, रेल क्षेत्र में एफडीआई लाकर मोदी सरकार हिंदुस्तान को गिरवी रखने का काम कर रही है। कालाधन लाने, रोजगार देने की गारंटी पर कंेद्र बैकफूट पर है। देश में 43 करोड़ लोगों की आमदनी 32 रूपये है। किसान कराह रहे हैं, उनके सामने रोजी-रोटी का संकट है। असमानता की खाई बढ़ रही है, लेकिन सरकार लूटने और लूट की छूट देने में मस्त है।
किसान संघर्ष समिति के संस्थापक अध्ययक्ष और पूर्व विधायक डा. सुनीलम ने कहा कि शहीदों की प्रेरणा से मैं उर्जा पाते हुए 52 वर्ष की सजा के बावजूद किसान आंदोलन में सक्रिय हूं, किसानों की हालत बद से बदतर हो रही है, इसलिए 1998 से बड़े किसान आंदोलन को खड़ा करने की जरूरत थी, यह काम देश का कोई संगठन, व्यक्ति या पार्टी अकेले नहीं कर सकती, इसलिए किसान संघर्ष समिति, जनआंदोलनों के राष्टीय समव्य, जनसंघर्षों के सम्मेलन तथा समाजवादी समागम के साथ लिकर किसान आंदोलन को एकजुट एवं प्रभावशाली बनाने का संकल्प लिया। डा. सुनीलम ने कहा कि आने वाले समय में भू-अधिग्रहण का संघर्ष ऐतिहासिक संधर्ष के तौर पर तब्दील होगा तथा नरेंद्र मोदी ने किसानों-मजदूरों के लिए जो बुरे दिन लाए हैं, उन्हें अच्छे दिनों में तब्दील करने में कामयाब होगा।
टोंको-रोंको-ठोंको क्रान्तिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने कहा कि विन्ध्य क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों का अधाधुंध दोहन करके इस क्षेत्र को उत्तराखंड जैसी तवाही की स्थिति में पहुंचा दिया गया है। नए भू-अध्यादेश से अब किसानों की मर्जी के बगैर उनकी खेती की जमीनें छीनकर 70 प्रतिशत जनता को सड़क पर लाकर खड़ा करने की तैयारी हो चुकी है। उन्होंने खेती-किसानी और प्राकृतिक संसाधन बचाने के लिए एकजुट होने जरूरत बताते हुए नए भू-अध्यादेश की प्रति घर-घर और गांव-गांव में जलाने का आह्वान किया।
समारोह को ओडि़सा के लिंगराज, दिल्ली से मंजू मोहन, पुतुल बहन, मधुरेश भाई, राजस्थान के कैलाशा मीणा, सोशलिस्ट पार्टी (लोहिया) के ईश्वर शर्मा, जनता दल यू के राष्ट्रीय महामंत्री अरूण श्रीवास्तव, जबलपुर से जयंत वर्मा, ब्लू डायमंड यूनियन के अध्यक्ष अमरदास उपरारिया, इंदौर से मदन अग्रवाल, सिंगरौली के वेद प्रकाश पांडेय, मंडला से निशा सिंह, अर्थशास्त्री रोशन लाल अग्रवाल, झाबूआ से राजेश बैरागी, छिंदवाड़ा से कंजबिहारी पटेल, कुंज बिहारी शर्मा, महाराष्ट्र छात्रभारती के नेता दत्ता डांगे आदि ने संबोधित किया।

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