उत्तराखंड की विस्तृत खबर (20 जनवरी) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 20 जनवरी 2015

उत्तराखंड की विस्तृत खबर (20 जनवरी)

समानान्तर सरकार चला रही सूबे की अफसरशाही
  • सीएम, मंत्री और अफसर एक-दूसरे तो पढ़ा रहे नसीहत का पाठ

देहरादून,20 जनवरी। उत्तराखंड राज्य में इस समय अफसर एक समानान्तर सरकार चलाने की भूमिका निभाते दिख रहे हैं। मंत्रियों की बात तो छोडि़ए मुख्यंत्री तक के आदेशों को दरकिनार किया जा रहा है। अफसर नियमों की अपने अंदाज में व्याख्या करके मनमानी कर रहे हैं और सरकार के सीएम और मंत्री महज अपनी बे-बसी का इजहार करने में लगे हैं। इन हालात में जनता की सुध कौन लेगा यह एक बड़ा सवाल फिजा में तैर रहा है। सूबे में ब्यूरोक्रेसी के निरंकुश होने की बात मंत्री सरेआम कह रहे हैं। मंत्री जनहित के किसी मुद्दे पर कोई निर्देश देता है अफसर उसे हवा में उड़ा दे रहे हैं। पैसा होने के बाद भी सूबे की जीवनरेखा बन चुकी 108 की गाडि़यों के पहिए कई रोज तक थम जाते हैं। सूबे के सबसे बड़े अस्पताल दून हास्पीटल में गरीबों को दवाएं मिलना बंद हो जाती है। बेरोजगारों को नियम के तहत होने वाले काम के लिए सड़को पर आकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। रोजाना कोई न कोई मंत्री अपने विभागीय सचिव की हुकुमउदूली का कोई नमूना मीडिया के सामने पेश कर रहा है। मंत्रियों को अफसरों की वजह से इस्तीफे तक की चेतावनी देनी पड़ रही है। यह बात अफसरों की समझ में आ गई है कि न तो कोई इस्तीफा देगा और न ही कोई एक्शन लेने की हिम्मत जुटा पाएगा। ऐसे में चलाते रहो अपनी समानान्तर सरकार। मामला मंत्रियों तक ही सीमित नहीं रह गया है। सीएम हरीश रावत के आदेशों और निर्देशों पर भी अफसर कान नहीं दे रहे हैं। उनके आदेश भी रद्दी की टोकरी में डाले जा रहे हैं। सीएम तमाम बार चेतावनी भी दे रहे है लेकिन किसी पर कोई असर होता नहीं दिख रहा है। परेशान सीएम को एक सार्वजनिक मंच से यहां तक कहना पड़ा कि अफसर उनके आदेशों की भी जलेबियां बना रहे हैं। पता नहीं क्या मजबूरी है कि सीएम को यहां तक कहना पड़ा कि वे होम्योपैथी (आसान करीके) से ही ब्यूरोक्रेसी का इलाज करेंगे। सवाल यह है कि जहां मेजर आपरेशन (सख्त कार्रवाई) की जरूरत हो वहां होम्योपैथी क्या करेगी। एक मजेदार बात यह भी है कि सीएम की ओर से मंत्रियों को और अफसरों की ओर से मंत्रियों को नसीहत दी जा रही है। सूबे के एक बेहद चर्चित अफसर ने तो एक काबीना मंत्री को उतवला तक कह डाला। इस पर भी अफसर का बाल बांका नहीं हुआ। जाहिर है कि अफसर इस राज्य में अपनी समानान्तर सरकार चला रहे हैं। ऐसे में जनहित के मुद्दे हाशिए पर हैं और एक-दूसरे तो नसीहत देने का दौर चल रहा है।

स्पीकर भी हैं नाराज
ब्यूरोक्रेसी की इस तरह का चाल से स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल भी बेहद आहत हैं। स्पीकर अफसरों की इस मनमानी पर कई बार अपनी पीड़ा जाहिर कर चुके हैं। इसके बाद भी सरकार ने अफसरों की समानान्तर सरकार पर अंकुश लगाने की कोई पहल नहीं की।

यहां तो सब बावन गज के
सूबे में बनी इस निरंकुशता की एक बड़ी वजह यह है कि यहां नेता हो या फिर अफसर, कोई खुद को किसी से कम समझता हीं नहीं हैं। हर कोई अहम ब्रह्मास्मि की तर्ज पर काम कर रहा है।

हरिद्वार में चल रहे खनन के खेल का असली जिम्मेदार आखिर कौन
  • खनन के खेल पर राज्य की ब्यूरोक्रेसी आखिर क्यों है मौन

देहरादून, 20 जनवरी । खनन को लेकर उत्तराखण्ड की राजनीति गरम है, हरियाणा से लेकर पष्चिमी उत्तरप्रदेष के तमाम खनन माफियाओं को पहले तो उत्तराखण्ड के मैदानी जिलों में खनन व्यवसाय करने के लिए आमंत्रित किया गया लेकिन अब तो इनको राज्य की षान्त पर्वतीय वादियों की फि़जा खराब करने के लिए पहाड़ों तक पर खनन करने का ठेका दे दिया गया है। बात जहां तक हरिद्वार जिले की है कहने को वहां खनन पूर्णतः बंद है लेकिन वहां खनन मफियाओं द्वारा खनन अधिकारियों व राज्य के बड़े आला अधिकारी की षह पर आज भी खनन बदस्तूर जारी है। जिसका प्रमाण बीते दिनों मुख्यमंत्री द्वारा बनायी गयी एक टीम के सामने आ चुका है। गौरतलब हो कि प्रदेष के मुख्यमंत्री ने षासन स्तर राज्य के तीन तेज तर्रार अधिकारियों सचिव दलीप जावलकर व श्रीधर बाबू अदांकी सहित डीआइजी संजय गुंजियाल के नेतृत्व में एक टीम बनाकर हरिद्वार में खनन की जानकारी के लिए छापे मारने भेजी तो मामले सामने आये उनसे मुख्यमंत्री तो क्या समूचे प्रदेषवासियों की आंखें फटी की फटी रह गयी, इस टीम ने एक साथ 45 स्थानों पर चल रहे स्टोन क्रेषरों पर छापेमारी की जिसमें करोड़ों की खनन सामग्री पकड़ी गयी। हालांकि माफियाओं में से किसी ने पौड़ी तो किसी ने देहरादून से खनन सामग्री लाने की पर्चियां दिखायी लेकिन यह बात टीम की समझ में साफतौर पर आ गयी कि आखिर यह खनन सामग्री आयी कहां से है। खैर मामले की अभी जांच जांच चल रही है। लेकिन यह बात सबके सामने आ चुकी है कि राज्य के औद्योगिक विकास विभाग का एक आला अधिकारी व खनन विभाग से जुड़े अधिकारी इसके पीछे हैं। वहीं यह बात भी सामने आ चुकी है कि हरिद्वार में खनन न होने की बात कहने वाले अधिकारी मुख्यमंत्री सहित समूची सरकार को बरगला रहे थे। वहीं हरिद्वार के तत्कालीन जिलाधिकारी की भूमिका को भी इस मामले में नजर अंदाज नहीं किया जा सकता जिसने राज्य सरकार द्वारा 76 खनन पट्टों की अधिकारिक स्वीकृती के बाद भी उनको हरिद्वार क्षेत्र में वैधानिक रूप से खनन करने की स्वीकृति नहीं दी। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि तत्कालीन जिलाधिकारी व सरकार में बैठे एक आला अधिकारी की षह पर ही अब तक हरिद्वार में अवैध खनन चल रहा है। जिसमें सहारनपुर जिले सहित हरियाणा के कुछ खनन माफियाओं की इनसे सांठ-गांठ रही है और इस गोरखधंधे में एक अपर मुख्यसचिव का मुंह लगा खनन अधिकारी भीषामिल है। छापेमारी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि जब हरिद्वार जिले में खनन पर पूर्णतः रोक है तो करोड़ों की खनन सामग्री कैसे हरिद्वार में आ गयी और इसका जिम्मेदार कौन है। क्योंकि राज्य सरकार द्वारा एक आदेष के तहत जिस जिले में खनन कार्य किया जा रहा है वहां की खनन सामग्री दूसरे जनपदों में ले जाना प्रतिबंधित है। इस छापेमारी के बाद क्या उन खनन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाही होगी अथवा जिनके संरक्षण में राज्य में अवैध खनन चल रहा है उन आला अधिकारियों का क्या होगा यह सवाल राज्य में गूंज रहा है। नैनीताल व उधमसिंह नगर सहित हरिद्वार में खनन को लेकर वर्तमान में जो माहौल खूनी माहौल है वह राज्यवासी देख चुके हैं। लेकिन खनन के इस खेल से उत्तराखण्ड कीषांत फि़जांओं का माहौल अब खनन के खेल खेलने वाले बर्वाद करने वाले हैं क्योंकि एक जानकारी के अनुसार राज्य के टिहरी, चमोली व पौड़ी सहित बागेष्वर चम्पावत व अल्मोड़ा जिलों तक की नदियों में खनन माफियाओं की नजर लग चुकी है और इनको वहां जाने की इजाजत तक मिल चुकी है। 

2018 में होने वाले राष्ट्रीय खेल राज्य के लिए एक बड़ा अवसर: मुख्यमंत्री

uttrakhand news
देहरादून 20 जनवरी (निस)।  अगले दो तीन वर्ष खेलों को समर्पित होंगे। वर्ष 2018 में उŸाराखण्ड में होने वाले राष्ट्रीय खेल राज्य के लिए एक बड़ा अवसर है। महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज, रायपुर में एथलेटिक सिंथेटिक ट्रेक का लोकार्पण करते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि आगामी दो तीन वर्षाें में राज्य में विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। राष्ट्रीय खेलों से उŸाराखण्ड खेल के क्षेत्र में उभरेगा। राज्य में ग्रामीण, स्कूली, एनसीसी, महिला, वेटरन आदि खेल प्रतियोगिताएं आयोजित कर खेल का माहौल बनाया जाएगा। इसके लिए ब्लूप्रिन्ट तैयार किया जा रहा है। सीएम ने कहा कि विकास के लिए जनता की भागीदारी आवश्यक है। इसके लिए सरकार ने योजनाएं तैयार की हैं। स्मार्ट सिटी के साथ ही स्मार्ट विलेज विकसित किए जाएंगे। गांवों में आवश्यक सुविधाएं जुटाई जाएंगी। स्मार्ट विलेज के लिए स्थानीय जनप्रतिधियों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी बढ़ चढ़कर भागीदारी करनी होगी। गांवों में सामुदायिक सुविधाओं जैसे कि आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूल भवनों, के लिए स्थानीय लोग भवन बनाकर सरकार को किराए पर दे सकते हैं। सरकार द्वारा इसका बेहतर प्रतिफल दिया जाएगा। वृद्ध महिलाओं के एकाकीपन को देखते हुए आंगनबाड़ी केंद्रों पर उनके लिए दोपहर के भोजन की योजना प्रारम्भ की गई है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून का रायपुर क्षेत्र खेलों से जुड़ रहा है। एक समय आएगा खेलों से रायपुर की पहचान होगी। राज्य सरकार यहां अवस्थापनात्मक सुविधाएं विकसित कर रही है। इसमें स्थानीय लोगों का सहयोग भी जरूरी है। प्रारम्भ में कुछ कठिनाई आ सकती है परंतु जब ये सुविधाएं विकसित हो जाएंगी, क्षेत्रवासियों को इससे लाभ होगा। योजनागत विकास में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सीएम ने कहा कि हमने एमडीडीए के नजरिए को बदला है। एमडीडीए को केवल चालान की भूमिका तक न रखकर इसे निर्माण कार्यों का जिम्मा दिया गया है। सीएम ने कहा कि राज्य सरकार ने खेलों की बहुत सी सुविधाएं विकसित की हैं। परंतु इनका उपयोग भी होना चाहिए। एक के बाद एक खेलों का आयोजन किया जाएगा। वर्ष 2018 के राष्ट्रीय खेलों के लिए सरकार ने कमर कस ली है। इसमें खेल प्रशिक्षकों, खिलाडि़यों व खेल से जुड़े अन्य लोगों को भी आगे आना होगा। आशा है कि इससे यहां के खिलाडि़यों को बढ़ावा मिलेगा। सरकार ने खेलों के विकास के लिए खेल नीति बनाई है। इसमें इस तरह के प्राविधान किए जा रहे हैं जिससे यहां अच्छे खिलाड़ी तैयार हों व खिलाडि़यों को रोजगार के पर्याप्त अवसर मिल सकें। सीएम ने महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज प्रबंधन को छात्रों की डाईट बढ़ाने के भी निर्देश दिए। खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रयासों से 2018 के राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी का अवसर उŸाराखण्ड को मिला है। पूरा खेल विभाग इसकी तैयारियों में जुट गया है। पूरा प्रयास किया जाएगा कि राष्ट्रीय खेल पूरी भव्यता से आयोजित हों व इसमें उŸाराखण्ड राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी खेल शक्ति के रूप में उभर कर सामने आए। महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज को सेंटर आॅफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा। क्षेत्रीय विधायक व संसदीय सचिव उमेश शर्मा काउ ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया। अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, सचिव खेल शैलेश बगोली, सीएम के सलाहकार संजय चैधरी व अन्य विशिष्टजन मौजूद थे। इस अवसर पर गोल्डन माईल रेस का आयोजन हुआ। सीएम ने इसके विजेताओं को पुरस्कृत किया।

रोडवेज बस ने युवक को रौंदा, मौत

देहरादून, 20 जनवरी(निस)। सड़क सुरक्षा सप्ताह का ढोल पीटने के बाद राजधानी के अंदर बेकाबू वाहनों की रफ्तार पर आरटीओ और दून पुलिस की खामोशी नहीं टूटी है। यही कारण है कि रफ्तार के चलते सड़क दुर्घटनाओं में आए दिन गंभीर घटनांए हो रही है। मंगलवार दोपहर अजबपुर खुर्द के पास एक रोडवेज बस की टक्कर से एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद बस चालक फरार हो गया। पुलिस ने मौके पर पंहुचकर स्थिति का जायजा लिया और शव का पंचनामा कर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया। उत्तराखंड राज्य में सिस्टम की सुस्ती टूटने का नामा नहीं ले रही है। मंगलवार दोपहर को तेज रफ्तार बस की चपेट में आने से एक 30 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। जबकि हाल ही में आरटीओ और पुलिस द्वारा सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सड़क सुरक्षा सप्ताह चलाया गया था। लेकिन अफशोस की बड़े वाहनों और कर्मशियल वाहनों को आरटीओ और यातायात पुलिस जागरूक नहीं कर पाई। जानकारी के अनुसार अजबपुर फाटक के पास रोडवेज बस यूए07-क्यू7345 ने पैदल चल रहे राकेश यादव (30) पुत्र बाबूलाल निवासी अजबपुर खुर्द को टक्कर मारी। जिसमें राकेश की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना होने के बाद बस चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर दिया है। बताया जा रहा है कि बस चालक ने बस को रोके बिना ही राकेश को बस से उतार दिया। इसी दौरान राकेश को झटका लगने के कारण वह नीचे गिर गया। वहीं बस का पिछला टायर राकेश के ऊपर आ गया। जिससे उसको गंभीर चोट लग गई। चोट अधिक होने के कारण राकेश की मौके पर ही मौत हो गई।

गैस एंजेसियों के खिलाफ प्रदर्शन 

देहरादून, 20 जनवरी(निस)। शिव सेना ने गैस एजेन्सियों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए जिलापूर्ति कार्यालय में प्रदर्शन कर ज्ञापन सौपा। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे प्रदेश महासचिव सतेन्द्र सिंह यादव ने कहा कि आज राजधानी क्षेत्र की सभी गैस एजेसियां जनता का शोषण कर रही है। मनमाने दामों पर सिलेंडर बेचना, सिलेडर के साथ अनिवार्य चूल्हा खरीदने हेतु बाध्य करना एवं ऐसा न करने पर उपभोक्ता को गैस ना देना और अगर कोई उपभोक्ता ऐसा करने से मना करनें तो वहां के कर्मचारी मारपीट पर उतारू हो जाते है जिससे आम उपभोक्ता के बीच में असंतोष है। यादव ने कहा कि गैस गोदामों के संचालकों द्वारा सब्सिडी की गैस को कर्मर्शियल सिलेंडरों में भरकर भारी दामों में बेचा जा रहा है। इससे जहां आम जनता को परेशानी हो रही है। वहीं सरकार द्वारा उपलब्ध सब्सिडी, गैस गोदाम मालिकों की तिजोरी में भरी जा रही है। शिवसेना जिला उप प्रमुख विशाल बेदी ने कहा कि आज राजधानी में गैस एजेन्सियां गुण्डागर्दी पर उतारू है। अगर जनता द्वारा इनकी अनुचित बातों को ना माना जाये तो ये लोग लडने को उतारू हो जाते है। इसका जीता-जागता उदाहरण अमरदीप गैस एजेन्सी, जनरल महादेव सिंह रोड पर देखा जा सकता है। इस गैस एजेन्सी के संचालक शैलेश द्वारा खुलेआम जनता का शोषण किया जा रहा है। बेदी ने मांग की कि जिलापूर्ति अधिकारी ऐसी एजेन्यिों के खिलाफ जल्द कार्यवाही की मांग की। उन्होंने मांग की कहा कि जिलापूर्ति अधिकारी स मामले में कार्यवाही नहीं करते तो वे उग्र आंदोलन करने में बाध्य होगे। इस मौके विरेन्द्र सिंह रावत, पंकज तायल, रोहित बेदी, अमन आहूजा, शिवम गोयल, रजनीश गर्ग, नितिन कुमार, ललित श्रीवास्तव, अमन अरोड़ा, भूपेन्द्र ठाकुर, कैलाश ठाकुर, विकास कुमार, दीपक सैनी, विजय गुलाटी, अजय साहनी, अभिनव बेदी, विकास, बासु परविन्दा, सुभाष गुप्ता , समीर, रामअवतार गुप्ता, संदीप, अंकित, बंटी आदि मौजूद थे।

मिशन भूरा में हाथ लगी सिर्फ निराशा, वापस लौटी टीम

देहरादून, 20 जनवरी(निस)। मिशन भूरा के तहत नेपाल गई मित्र पुलिस निराशा हाथ लगने के बाद वापस लौट आई है। जानकारी देते हुए डीआईजी पुष्पक ज्योति ने बताया कि पुलिस की पांच टीम काफी समय से भूरा को नेपाल में तलाश रही थी। जब भूरा का वहां कुछ पता नहीं लगा तो पुलिस टीम को वापस बुला लिया गया है। साथ ही बताया कि अब दूसरे सिरे से भूरा को तलाश किया जायेगा। वहीं सूत्रों की मानें तो पुलिस भूरा को एक ओर निश्चिंद करना चाहती है। जिससे उसे अचानक से फिर पकड़ा जा सके। पुलिस अधिकारी इस बात को भलीभांति को जानते हैं कि भूरा को पकडने के लिए अलग से गुपचुप तरह से रणनीति बनाना जरूरी है। जिससे भूरा को पुलिस की प्रत्येक कार्यवाही का पता न लग सके।

बुर्जुग को लूटने वाला लूटेरा चढ़ा पुलिस के हत्थे 

देहरादून, 20 जनवरी(निस)। डालनवाला थाना क्षेत्र के अंतर्गत घर में पुताई करने गये युवक द्वारा बुजुर्ग महिला सर्वेश्वरी को लालच के चलते बेहोश करते हुए वहां से सोने के करीब ढ़ाई लाख रूपये के जेवर लेकर फरार हो गया था। जिसके बाद पुलिस आरोपी लूटेरे को तलाश कर रही थी। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को मुखबिर की सूचना पर माल सहित गिरफ्तार कर लिया गया है। जिसके बाद उसे कोर्ट से जेल भेज दिया गया है। पत्रकार वार्ता के दौरान पुलिस कार्यालय में एसपी देहात मणिकांत मिश्रा ने बताया कि प्रीतम रोड़ स्थित सीनियर सीटिजन बृद्ध महिला सर्वेश्वरी देवी के साथ उनके घर पुताई का काम कर रहे हिमांशु पुत्र महाराजदीन निवासी बलदेवदास पुर्वा जनपद बाराबंकी उत्तर प्रदेश के द्वारा बुजुर्ग को घर में अकेले पाकर मारपीट कर उसके पहने सोने की अंगूठी लेकर भाग गया। इस घटना को थाना डालनवाला मेें एसएसपी के आदेश पर दर्ज किया गया। वहीं मामले को गंभीरता से लेते हुए डालनवाला एसओं अनिल जोशी के नेतृत्व में टीम तैयार की गई। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने आरोपी हिमांशु को लूटे गये माल के साथ कर्जन रोड तिराहा से नौं बजे गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपी के हवाले से बताया की उसके पिता की दो शादिया हैं। उसके पिता लखनऊ जल संस्थान में तैनात है। उसकी शौतेली मां शंतिदेवी के जरिये ही वो सर्वेश्वरी के घर पुताई करने पहुंचा। बुजुर्ग के गले व कान में सोने के जेवरात देखकर उसने लूट करने का फैसला किया। जिसके बाद आरोपी ने मारपीट करते हुए भारी वस्तु से बुजुर्ग के सिर पर वार करते हुए जेवरात लूटकर फरार हो गया। जानकारी एसओ अनिल कुमार ने बताया कि आरोपी की अपनी मां लखनऊ में रहती है। पिता भी वहीं रह रहे हैं। आरोपी पर लखनऊ में भी चोरी व लूट के मुकदमें दर्ज हैं इसके अलावा बाराबंकी में उस पर अपहरण का मुकदमा चल रहा है। पुलिस ने बताया कि आरोपी हिमांशु उम्र-२१ शादीशुदा है। आरोपी का अन्य आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है।वहीं भूरा के तलाश में नेपाल गई मित्र पुलिस की पांच टीम मायूस वापस लौट आई है। जानकारी देते हुए डीआईजी पुष्पक ज्योति ने बताया कि पांच टीम काफी समय से भूरा को नेपाल में तलाश रही थी। जब भूरा का वहां कुछ पता नहीं लगा तो पुलिस टीम को वापस बुला लिया गया। साथ ही बताया कि अब दूसरे सिरे से भूरा को तलाश किया जायेगा।

हरिद्वार अर्द्धकुंभ के 12 कामों में दो ही स्थाई काम 

देहरादून, 20 जनवरी(निस)।  अर्द्धकुंभ के सत्तर फीसद कामों के स्थाई करने के दावों के बीच जिन 12 कामों के शासनादेश जारी हुए हैं उसमें से नौ अस्थाई काम हैं। केवल दो ही स्थाई काम होने हैं। इसमें से एक कार्य ऋ षिकेश में प्रस्तावित है। जबकि एक काम अर्द्ध  स्थाई प्रवृत्ति का है। एक सप्ताह पूर्व इन कार्यो के जीओ जारी हुए थे। अर्द्ध कुंभ 2016 में होने वाले कामों में पहले ही देर हो चुकी है। शासन की ओर से लोक निर्माण विभाग के कामों को दिसंबर में स्वीकृति दी गई थी। लेकिन शासनादेश जारी होने में एक माह लग गया। पिछले सप्ताह ही एक दर्जनभर कामों को स्वीकृति मिली है। इसमें से ग्यारह काम हरिद्वार व एक काम ऋषिकेश में होना है। खासबात यह है कि 12 कामों में से केवल दो ही स्थाई काम हैं। इसमें से एक स्थाई काम ऋषिकेश व एक स्थाई काम हरिद्वार में है। एक काम अर्द्ध स्थाई है। बाकी के नौ काम अस्थाई हैं। जबकि मेले की तैयारियों को लेकर हुई दर्जन भर बैठकों में सत्तर फीसद काम स्थाई करने के दावे किए जा रहे थे। अब शुरूआत में ही अस्थाई काम के आदेश हुए हैं। मेले के कामों के लिए वैसे भी बहुत अधिक समय नहीं रह गया है। केंद्र सरकार से भी अभी तक मेले के लिए धन नहीं मिला है। ऐसे में विभागों के लंबे चैड़े प्रस्तावों के बजाय केवल जरुरी काम ही होंगे वो भी अस्थाई प्रवृत्ति के। ईई मोहम्मद युसूफ का कहना है कि यह अलग बात है कि पहले अस्थाई काम स्वीकृत हुए हैं, लेकिन ये काम भी महत्वपूर्ण है। विभाग के अधिकांश काम स्थाई हैं। जो काम स्वीकृत हुए हैं उनके लिए बांड भराने व अन्य प्रक्रिया की जा रही है।

ज्वालापुर पुल का प्रस्ताव बदला
अर्द्ध कुंभ के प्रस्तावों में ज्वालापुर में पहले झूला पुल बनना था। इसकी लागत 4.90 करोड़ आंकी गई थी। अब प्रस्ताव में बदलाव कर मोटर पुल का प्रस्ताव बनाया गया है। इसकी लागत 7.50 करोड़ आंकी गई है। प्रस्ताव में हुए बदलाव के चलते इसकी स्वीकृति भी फंस गई है।

हिल बाईपास नहीं स्वीकृत
हिल बाईपास मार्ग पर कुंभ से लेकर अब तक 18 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। अर्द्ध कुंभ मेले के कामों के प्रस्ताव में यह काम सबसे प्राथमिकता का था। लेकिन, इसे भी अब तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। जबकि भीड़ बढने पर यही एकमात्र वैकल्पिक मार्ग है।

पाइप के अंदर डाले जायेगें तारों के जाल

देहरादून, 20 जनवरी(निस)। ऊर्जा निगम ने कुंभ क्षेत्र से झूलते हुए तारों को हटाने की योजना तैयार की है। झूलते हुए तारों को पाइप के अंदर डाला जाएगा। यह कार्य ऊर्जा निगम के स्थाई कार्यो में होगा। इस योजना के लिए ऊर्जा निगम को हरी झंडी भी मिल चुकी है। धर्मनगरी में एक ओर आबादी बढ़ रही है वहीं स्नान पर्व पर यहां भीड़ कई गुना बढ़ जाती है। अर्द्ध कुंभ व कुंभ के समय में तो हाल यह रहता है कि बड़ी सड़कों पर भीड़ का नियंत्रित करना भी मुश्किल होता है। ऐसे में सबसे अधिक खतरा बिजली की पुरानी और जर्जर लाइन का रहता है, जो कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकती हैं। हरकी पैड़ी और आस पास के क्षेत्र का हाल तो यह है कि यहां सभी स्थानों पर विद्युत तार की ऊंचाई भी निर्धारित मानक से काफी कम है। हर वक्त दुर्घटना का अंदेशा रहता है। यहां झूलते तार लोड नहीं झेल पाते और अक्सर टूट जाते हैं। तार टूटने से भगदड़ तक मच जाती है। 23 जून 2012 में रामघाट के पास तार टूटने से भगदड़ मच गई थी। उस समय यहां हादसा होने से बाल-बाल बचा। ऊर्जा निगम झूलते हुए तारों से निजात दिलाने के अलावा हादसों को रोकने के लिए तारों को भूमिगत करने की योजना तैयार कर रहा है। इस योजना को अर्द्ध कुंभ के प्रथम प्राथमिकता में आने वाले कार्यो में रखा गया है। इस योजना के तहत सबसे पहले पूरे क्षेत्र की झूलती हुई तारों की जगह एरियल बंच केबिल डाली जाएगी और वह भी जमीन के अंदर पाइपों में। इससे हरकी पैड़ी क्षेत्र की किसी भी सड़क गली और घाटों में कहीं भी बिजली के तार नजर नहीं आएंगे। ऊर्जा निगम के अधिकारियों के अनुसार इस योजना में एरियल बंच केबिल तो निगम के पास है। लेकिन, केवल केबिल डालने व पाइप का खर्चा आना है। हरकी पैड़ी क्षेत्र, रोडीबेलवाला क्षेत्र, सुभाष घाट सहित अन्य घाट क्षेत्र में इस योजना का सबसे पहले काम होना है। उत्तराखंड में अब तक भूमिगत बिजली लाइन कहीं नहीं है। केवल, मसूरी में कुछ स्थानों पर भूमिगत केबिल डालने का कार्य हो रहा है।

रवन्ना प्रपत्र से सरकार को लगा रहे चूना

देहरादून, 20 जनवरी(निस)। स्टोन क्रशर संचालक रवन्ने में खेल कर सरकार को राजस्व का चूना लगा रहे हैं। क्रशरों के रवन्ना प्रपत्र में परिवर्तन का प्रस्ताव भी अटका हुआ है। इसलिए एक ही रवन्ने पर क्रेषरों से माल निकल जाता है। स्टोन क्रशरों को लेकर विवाद लंबा रहा है। हरिद्वार जिले में 42 स्टोन क्रशर हैं। स्टोन क्रशर पर अवैध खनन को बढ़ावा देने के आरोप भर ही नहीं हैं, बल्कि इसकी पुष्टि भी समय-समय पर होती रहती है। अवैध खनन का माल क्रशरों में ही खपता है। स्टोन क्रशरों पर वाणिज्य कर विभाग, एंटी माइनिंग फोर्स के छापों में सेल्स टैक्स चोरी तो पकड़ी ही गई साथ ही प्रपत्रों में गड़बड़ी भी जांच में सामने आयी है। दरअसल, क्रशरों को खनन भंडारण की बिक्री के लिए शासन की ओर से रवन्ना प्रपत्र दिए जाते हैं। प्रपत्र सीमित संख्या में दिए जाते हैं। क्रशर से जब भी माल निकलता है तो उसके साथ वाहन चालक को रवन्ना प्रपत्र में तारीख डालकर दिया जाता है। लेकिन एक ही रवन्ना प्रपत्र का बार-बार प्रयोग किया जाता है। प्रपत्र मे अलग प्रकार की स्याही का प्रयोग किया जाता है। इस स्याही की विशेषता यह होती है कि ऊष्मा (हीट) मिलते ही यह स्याही गायब हो जाती है। इससे एक ही रवन्ने का कई बार प्रयोग किया जाता है और सरकार को राजस्व का नुकसान होता है। कुछ माह पूर्व प्रशासन ने मिस्सरपुर स्थित गणेश स्टोन क्रशन पर छापा मारा। इस दौरान रवन्ने में ऐसी ही गड़बड़ी पकड़ी गई थी। इसके बाद हरिद्वार प्रशासन की ओर से शासन को रवन्ना प्रपत्र में बदलाव का प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन प्रपत्रों में बदलाव नहीं हुआ। इसलिए अब भी क्रशरों से फर्जी रवन्ने पर माल निकल रहा है। जांच के दौरान भी यह फर्जी रवन्ने आसानी से पकड़ में नहीं आ पाते हैं। एसडीएम सदर बीर सिंह बुदियाल का कहना है कि रवन्ने की जांच समय-समय पर की जाती है। क्रशरों पर छापे के दौरान भी रवन्ना प्रपत्रों की जांच की जाती है।

मनेरी में बाढ़ के मलबे पर ही भरी जा रही सुरक्षा दीवार की नींव

देहरादून , 20 जनवरी(निस)। मनेरी में बाढ़ सुरक्षा कार्यो के नाम पर लीपापोती की जा रही है। नदी में जमा बाढ़ के मलबे में ही सुरक्षा दीवार की नींव भरी जा रही है। इसे देखकर कार्यो की गुणवत्ता का सहज अंदाज लगाया जा सकता है। निर्माण के तरीके को लेकर सवाल उठने लगे हैं, लेकिन इसके बावजूद निर्माण एजेंसियों का ध्यान इस ओर नहीं है। बीते साल जून माह की बाढ़ में मनेरी में सिलकुरा से लेकर इंटरकॉलेज तक करीब एक किमी हिस्सा बुरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गया था। इस हिस्से में सिलकुरा बस्ती समेत, मनेरी बस्ती, सेवाश्रम व इंटर कॉलेज को खतरा पैदा हो गया था। इसे देखते हुए सिंचाई विभाग अवस्थापना खंड को करीब सात करोड़ रुपये की लागत से एक किमी लंबी सुरक्षा दीवार के निर्माण का जिम्मा सौंपा गया। अनुबंध के तहत यह कार्य अप्रैल माह तक पूरा होना है, लेकिन अभी तीस फीसदी कार्य भी नहीं हो सका है। हालत यह है कि नदी में जमा बाढ़ के मलबे में ही नींव तैयार की जा रही है, जबकि बाढ़ सुरक्षा दीवार के डिजाइन के मुताबिक नदी तल से तीन मीटर नीचे नींव तैयार करना जरूरी है। एक ओर सुस्त कार्य और दूसरी ओर गुणवत्ता को ताक पर रखे जाने से ग्रामीण बाढ़ सुरक्षा के कार्य को लेकर आशंकित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बुनियाद में बिना रोड़ी के ही सीमेंट व बड़े पत्थर भरकर उसके बाद लीपापोती की जा रही है। इस स्थिति से स्थानीय लोग पहले भी जिला प्रशासन को अवगत करा चुके हैं। वहीं मनेरी सेवाश्रम की ओर से भी बाढ़ सुरक्षा कार्यो को लेकर आपत्ति जताई गई है, लेकिन प्रशासन की ओर से निर्माण ऐजेंसी की मनमानी रोकने को कोई कार्यवाही नहीं की गई है। अधिशासी अभियंता करतार सिंह का कहना है कि मनेरी में ठेकेदार को गुणवत्ता पर ध्यान देने को कहा गया है और हमारे इंजीनियर मौके पर हर समय हैं। इसके अलावा नमूने भी जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

आंदोलन की चेतावनी
मनेरी की प्रधान संजीता रावत ने बताया कि दीवार का निर्माण देरी से शुरू कराया गया और उसके बाद घटिया निर्माण किया जा रहा है। लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए रात के समय ही दीवार निर्माण कर लीपापोती की जा रही है, जबकि दिन के समय यह काम नहीं किया जा रहा। इस स्थिति में अगर जल्द ही सुधार नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन को मजबूर होंगे।

ग्रामीणों ने डीएफओ कार्यालय पर मचाया हंगामा

देहरादून , 20 जनवरी(निस)। कैंट क्षेत्रान्र्तगत बाजावाला में गुलदार की धमक से ग्रामीणों में हाहाकार मचा हुआ है और अभी तक वन विभाग द्वारा गुलदार न मार गिराये जाने से उत्तेजित ग्रामीणों ने डीएफओ कार्यालय पर धावा बोलते हुए वहां पर जमकर प्रदर्शन किया और वहा पर हंगामा किया। हंगामें के कारण डीएफओ कार्यालय का गेट बंद कर दिया और लोगों भी भीतर नहीं आने दिया, लोगों ने वही सडक पर डीएफओ के खिलाफ प्रदर्शन किया और वहां पर धरना दिया, जिससे वहां पर जाम की स्थिति बनी रही।  यहां बाजावाला के ग्रामीण तिलक रोड़ स्थित डीएफओ के कार्यालय पहुंचे और वहां पर प्रदर्शन कर धरना दिया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि विभाग इस ओर त्वरित कार्यवाही नहीं कर रहा है और न ही गुलदार को अभी तक मार गिराया है जिससे लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। देर रात घर के बाहर हाथ धोने आई एक महिला व उसके बच्चे पर गुलदार ने हमला कर दिया और उसके बाद वह मासूम को उठाकर अपने साथ ले गया। देर रात तक मासूम को खोजने का मिशन चलता रहा लेकिन बच्चे का कुछ पता नहीं चल पाया और न ही गुलदार की कोई जानकारी पुलिस व वन विभाग को लग पाई। मासूम की लाश मिलने से गुस्साये लोग जब बवाल व हंगामा मचा रहे थे तो इलाके वासियों का गुस्सा और भड़क गया और उनका साफ आरोप था कि गुलदार को पकडने के लिए कोई मिशन नहीं चलाया जा रहा है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर खासी नाराजगी थी कि इलाके में गुलदार को पकडने के लिए कोई अभियान ठीक ढंग से नहीं चलाया जा रहा है, जिससे आम आदमी के सामने एक बड़ा संकट आकर खड़ा हो गया है। ग्रामीण बच्चे की मौत के मुआवजे की मांग पर अड़े हुए थे। इसी बीच कई ग्रामीणों को एक बार फिर गुलदार नजर आ गया और उनका कहना था कि यह गुलदार नरभक्षी हो गया है इसलिए पकडना अब जरूरी हो गया है क्योंकि उसकी वजह से लोगों का घर से निकलना दुभर हो जायेगा। बाजावाला, मसन्दावाला, जामुनवाला, फुलसनी, चानमारी व कंडोली गांव में नियमित गश्त किये जाने की जरूरत है। इस दौरान जोगेन्द्र सिंह पुंडीर, गायत्री ध्यानी, महेन्द्र रौथाण, राकेश मल्होत्रा, मुकेश डबराल, रीता देवी, पूनम देवी, सीता देवी, सुमन देवी, पूजा, आरती, मोहिनी, गीता, अमृता देवी, आशा देवी, मंजू देवी, सुनीता, पार्वती, अनिता देवी सहित अनेक ग्रामीण मौजूद थे।

फ्लाईओवर निर्माण कार्य में देरी पर भड़के भाजपाई

देहरादून , 20 जनवरी(निस)। कैंट विधायक हरबंस कपूर ने अपनी विधानसभा के अंतर्गत व्याप्त अनेक समस्याओं के समाधान के लिए मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग के कार्यालय पर समर्थकों के साथ प्रदर्शन करते हुए धरना दिया, उनका कहना है कि बल्लीवाला चैक एवं बल्लूपुर चैक पर लंबे समय से निर्माणाधीन फ्लाईओवर का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य नहीं किया जा रहा है और इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड रहा है। यहां कैंट विधायक हरबंस कपूर अपने समथकों के साथ यमुना कालोनी स्थित लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता के कार्यालय में पहुंचे और वहां पर प्रदर्शन करते हुए धरना दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कहा कि गत डेढ वर्षों से भी अधिक समय पूर्व बल्लीवाला एवं बल्लूपुर चैक पर फ्लाईओवर का कार्य आरंभ हुआ था, इतना समय बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य की प्रगति प्रायरू शून्य मात्र ही है यदि कार्य नियमित रूप से चलता तो वर्तमान में फ्लाईओवर का कार्य पूर्ण होने की स्थिति में रहता लेकिन आज तक इस ओर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य का ढोंग रचकर चैराहों के दोनों ओर रास्ते अवरूद्ध किये गये है जिस कारण जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड रहा है और वहां पर घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है। उनका कहना है कि यहां तक की जाम से एम्बुलेंस जैसी आवश्यक सेवा भी बाधित हो जाती है, क्योंकि उनके लिए कोई भी अलग मार्ग निर्धारित नहीं किया गया है।  वक्ताओं ने कहा कि फ्लाईओवर का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय के राजमार्ग अधिनियम 1956 के अनुसार मानकों के तहत किया जाये और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 के तहत भू अधिग्रहण की कार्यवाही की जाये। उनका कहना है कि जिलाधिकारी का निरीक्षण के उपरांत तीन दिन में कार्य प्रारंभ करने का आदेश विधि व्यवस्था के विपरित है। वक्ताओं ने कहा कि ईपीआईएल कंपनी द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 के समस्त प्रावधान को ठेंगा दिखाकर भू उपलब्धता के निर्माण कार्य प्रारंभ कर राज्य सरकार द्वारा किये गये करार का उल्लंधन कर केवल अग्रिम धनराशि को हज्म करने की नियती से कार्य प्रारंभ कर अब भूमि की उपलब्धता न कारण दिखाकर जनता की रकम हजम कर केवल क्षेत्रीय जनता को यातायात में बडे बडे बोर्ड लगाकर अवरोध तथा रात को अंधरा दिया गया है किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई तो सडकों पर उतरकर आंदोलन किया जायेगा। इस दौरान मुख्य अभियंता के जरिये मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर कार्यवाही किये जाने की मांग की गई। इस दौरान धरने में विधायक हरबंस कपूर, विनय गोयल, हरिओम अग्रवाल, विनोद शर्मा, हरीश कोहली, अरूण गोयल, नंदिनी शर्मा, कंचन ठाकुर, सुनील उनियाल गामा, राजेन्द्र ढिल्लो, सोहनवीर सिंह धीरवान, आशा भाटी, मीरा कठैत, सचिन गुप्ता, अनिल डबराल, सुरेश छाबडा, अनिल कुमार, संजय गुप्ता, सुरेन्द्र घेल, चैधरी अजित सिंह, श्याम अग्रवाल, सविता ओबराय, अमरदीज जायसवाल, धर्मपाल घाघट, जितेन्द्र रावत मोनी, कमल राज सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे।

किसान सभा ने गन्ना फूंककर जताया रोष, रैली निकाली

देहरादून , 20 जनवरी(निस)। प्रदेश की सरकार द्वारा गन्ने का मूल्य कम किये जाने के खिलाफ जिला किसान सभा ने रैली निकालकर सचिवालय कूच करते हुए सचिवालय के पास गन्ना फूंककर अपना विरोध दर्ज किया। इस दौरान उन्होंने शीघ्र ही गन्ने का उचित मूल्य दिलाये जाने की मांग की। यहां जिला किसान सभा से जुडे हुए कार्यकर्ता परेड ग्राउड में इकठठा हुए और वहां से प्रदेश सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ रैली निकालकर सचिवालय कूच किया और पुलिस ने मीडिया सेंटर के बाहर सभी को बैरीकैडिंग लगाकर रोक लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारी अपने साथ गन्ने लेकर आये और जब पुलिस ने रोका तो उन्होंने वहीं पर गन्ने को फूंककर अपना विरोध दर्ज किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने साढे तीन सौ रूपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य दिये जाने की बात की लेकिन सरकार ने 295 रूपये किया है और साढे तीन सौ रूपये गन्ने का मूल्य किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कांटों पर भी घटतौली हो रही है और इस पर भी रोक लगाये जाने की आवश्यकता है, सरकार को इस दिशा में ठोस कार्यवाही किये जाने की आवश्यकता है अन्यथा आंदोलन को तेज किया जायेगा। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी के जरिये मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर कार्यवाही किये जाने की मांग की गई।

स्टोन क्रशर संचालन की अनुमति को निरस्त करने की मांग, भुखहड़ताल पर बैठी ग्रामीण 

देहरादून, 20 जनवरी(निस)। श्रीनगर के मलेथा क्षेत्र में लगे पांच स्टोन क्रेशर संचालन की अनुमति को निरस्त करने की मांग को लेकर स्थानीय ग्रामीण सीता देवी मंगलवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गई। उनके समर्थन में पांच अन्य महिलाओं ने क्रमिक उपवास किया। इस दौरान ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए क्षेत्र में लगे स्टोन क्रशर को हटाने की मांग दोहराई। मलेथा के चार व चैपडियां में स्थापित एक स्टोन क्रशर संचालन की अनुमति निरस्त करने की मांग को लेकर बीते 21 दिनों से ग्रामीण आंदोलन पर हैं। मांगों पर कार्रवाई न होते देख ग्रामीणों ने अब भूख हड़ताल का रास्ता अख्तियार कर लिया है। अपनी सात सूत्रीय मांगों को लेकर मंगलवार को वीर शिरोमणि माधो सिंह भंडारी जन जागरण समिति के बैनर तले स्थानीय ग्रामीण सीता देवी बिष्ट ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि उनका यह आंदोलन गांव को बचाने का प्रयास है। जब तक क्रशर हटाने की मांग पूरी नहीं होती आंदोलन जारी रहेगा। उनके समर्थन में लक्ष्मी गैरोला, हेमवंती नेगी, रेखा देवी, सुशीला देवी व बिमला देवी क्रमिक उपवास पर बैठी हैं। प्रधान शूरवीर सिंह बिष्ट ने बताया कि भूख हड़ताल पर बैठी सीता देवी के साथ हर दिन गांव की पांच महिलाएं दिन रात बारी-बारी से क्रमिक उपवास पर रहेंगी। इस मौके पर हिमालय बचाओ आंदोलन के समीर रतूड़ी, भूपत सिंह राणा, खेम सिंह चैहान, महिपाल बुटोला, देव सिंह नेगी, जगदंबा प्रसाद रतूड़ी, दलपतराम तिवाड़ी, पीपी डोभाल, सच्चिदानंद, सुरेश नेगी आदि मौजूद थे।

संवादहीनता का परिणाम है आंदोलन
मलेथा में स्टोन क्रेशरों के खिलाफ चल रहे आंदोलन संवादहीनता का परिणाम है। पर्वतीय विकास शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ. अरविंद दरमोड़ा ने कहा कि किसी भी परियोजना को बिना ग्रामसभा की सहमति से प्रारम्भ नहीं किया जा सकता। फिर मलेथा में एक साथ पांच स्टोन क्रेशरों को स्वीकृति दे देना आश्चर्यजनक भी है। सरकार को इस पर गंभीरता से सकारात्मक कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा में संचालित होने वाली परियोजनाओं में प्रभावित ग्रामीणों को भी शेयरधारक बनाया जाना चाहिए।

देश व दुनिया में सुरक्षित केदारनाथ व सुरक्षित उत्तराखण्ड का गया संदेश

  • एमआई-26 हैलीकाप्टर की 26 सदस्यीय टीम को मुख्यमंत्री ने किया गौचर में सम्मानित
  • एमआई-26 से केदार पहुंचाई गई मषीनों से पुर्नर्निमाण कार्यो में आयेगी तेजी: मुख्यमंत्री

uttrakhand news
देेहरादून,20 जनवरी(निस) - मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंगलवार को गौचर में केदारनाथ पुर्नर्निमाण के लिए आवश्यक भारी मशीनरी पहुचानें वाले वायु सेना के एमआई-26 हैलीकाप्टर की 26 सदस्यीय टीम के विदाई समारोह में टीम के सदस्यों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि केदारनाथ के पुर्नर्निमाण कार्यो में दिये जा रहे सहयोग के लिए भारतीय वायुसेना, निम व स्थानीय प्रशासन ने जो कार्य किया है, वह निश्चित रूप से सराहनीय है। उन्हांेने कहा कि एमआई-26 के माध्यम से पुर्नर्निमाण कार्यो के लिये जो मशीनें केदारनाथ पहुंचाई गई है, उससे पुर्नर्निमाण कार्यो में तेजी आयेगी। इससे देश व दुनिया में सुरक्षित केदारनाथ व सुरक्षित उत्तराखण्ड का संदेश भी गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वायु सेना के इस सराहनीय प्रयास से केदारनाथ में आस्था और विश्वास का नया वातावरण सृजित होगा। अब पुनर्निर्माण के प्रथम चरण के कार्यो को तीन वर्ष से पहले पूर्ण करने में निश्चित रूप से मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि केदारनाथ पुर्नर्निमाण का कार्य राष्ट्रीय प्रतिष्ठा से भी जुडा है। इससे यह भी संदेश गया है कि उत्तराखण्ड अपनी धरोहरों की सुरक्षा के प्रति सजग है। केदारनाथ पुर्नर्निमाण में निम के साथ ही स्थानीय प्रशासन व पुलिस के जवानों ने जिस कर्मठता व जीवटता के साथ माइनस डिग्री तापमान में कार्य कर रहे हैं, वह निश्चित रूप से उत्तराखण्ड के निर्माण का भी संकल्प बन गया है। इससे यह भी सावित हुआ है कि उत्तराखण्ड आपदा की पीडा को भूलकर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अच्छाई के इस कार्य में सभी की भागीदारी है। उन्होंने कहा कि वायुसेना के जांवाजों ने आपदा के समय भी मानवता की सेवा की और अब पुर्नर्निमाण कार्यो के सहयोगी बने हैं। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि केदारनाथ की आगामी यात्रा से पूर्व सभी आवश्यक संसाधन तैयार कर लिये जायेंगें। केदारनाथ में कम से कम 4 हजार लोगों के ठहरने व खाने-पीने की व्यवस्था वहां पर की जा रही है। यात्रा मार्ग पर बिजली, शौचालय, मोबाइल टावर, पुजारियों के आवास, छोटी दुकाने बनाई जा रही हैं। पुलों का निर्माण भी किया जा रहा है। पुर्नर्निमाण के अगले चरण में केदारनाथ में रोप वे के साथ ही वैष्णो देवी की भांति यात्रा संचालित हो, इसके लिये भी प्रयास किये जा रहे हैं।  केदारनाथ में आयी आपदा के बाद इस वर्ष हम यात्रा संचालित करने में सफल रहे हैं। शीतकाल में इतनी ऊंचाई पर कार्य आरम्भ कर देश को यह भी संदेश देने में सफल रहे हैं कि भगवान शिव सभी पर कृपावान है। हम वर्ष 2013 को दुर्भाग्य समझकर नये उत्साह के साथ आगे बढ़े हैं। मुख्यमंत्री श्री रावत ने एमआई-26 की तकनीकी जानकारी भी ली तथा हैलीकाप्टर के अन्दर जाकर उसका निरीक्षण भी किया। उन्होंने हैलीकाप्टर के अन्दर विंग कमाण्डर ए0एस0बाजवा के जन्म दिन का केक काटकर उन्हें जन्मदिन की बधाई भी दी। इस अवसर पर एमआई-26 के टीमलीडर विंग कमाण्डर जीएस तुंग ने कहा कि निम व स्थानीय प्रशासन की मदद से उनकी टीम द्वारा 16 दिन के इस अभियान में लगभग 125 टन मशीनरी सामग्री केदारनाथ पहॅुचाई। उन्होंने कहा कि दुनिया के इस सबसे बडे हैलीकाप्टर से इतनी ऊंचाई पर तंग घाटियों से गुजरना काफी चुनौतीपूर्ण था। सभी के सहयोग से यह कार्य पूरा किया गया, जिसका उन्हें संतोष है। कार्यक्रम में वायुसेना के विंग कमाण्डर जीएस तुंग, विंग कमाण्डर एस विनय कुमार, विंग कमाण्डर एएस बाजवा, स्क्वाईड्रन लीडर टी0 खरे, एमएस अली, एके डोडी प्रमुख थे। इस अवसर पर विधान सभा उपाध्यक्ष अनूसुइया प्रसाद मैखुरी तथा अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम में निम के प्रधानाचार्य कर्नल अजय कोठियाल, रूदप्रयाग के डीएम डाॅ0 राघव लंगर, डीएम चमोली अशोक कुमार, रूद्रप्रयाग एसपी वीजे सिंह, चमोली एसपी एसके मीणा सहित रूद्रप्रयाग एवं चमोली जिले के अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। 

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