विशेष आलेख : यूपी में आजम जैसी सुविधा दुसरों को क्यों नहीं? - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

गुरुवार, 19 फ़रवरी 2015

विशेष आलेख : यूपी में आजम जैसी सुविधा दुसरों को क्यों नहीं?

जी हां, यूपी सरकार का दोहरा चरित्र या यूं कहें मंत्री व बाहुबलियों के लिए कुछ और जबकि आम आदमी के लिए कुछ और है। यह तो बहुत पहले से ही जगजाहिर है, लेकिन ताजा मामला ने व्यवस्था की ही पूरी पोल खोल कर दी है। सरकार के कैबिनेट मंत्री आजम खां की निजी संस्था को लीज पर दी जाने वाली जमीन की कीमत मात्र 100 रुपये प्रति वर्ष है, जबकि अन्य के लिए कोई सीमा ही नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि जिस जमीन या भवन का सालिना किराया 100 रुपये है उसी भूमि और भवन के लिए वार्षिक शुल्क 1000 गुणा अधिक देने वालों को क्यों नहीं दी जा सकती। जबकि उक्त संस्था शिक्षा समेत हर कार्य के लिए बेहतर क्वालिटी देने का दावा की है। फिलहाल मामला लोकायुक्त के पास है औा उन्होंने उच्चस्तरीय जांचकर कार्यवाही की बात कहीं है, अब देखना है इस जंगलराज सरकार में कार्यवाही पर अमल कब तक हो पाता है 

azam khan
मामला मौलाना जौहर अली शोध संस्थान, रामपुर का है। इस संस्थान के कर्ताधर्ता यूपी सराकर के कैबिनेट मंत्री आजम खां है। अल्पसंख्यक विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के अधीन मौलाना जौहर अली शोध संस्थान, रामपुर को आजम खा द्वारा संचालित एक निजी संस्था मौलाना जौहर अली ट्रस्ट, जो सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट में पंजीकृत एक संस्था है, को रामपुर शहर के बीचोंबीच लगभग 1500 वर्ग गज जमीन अगले 30 सालों तक के लिए लीज पर दी गयी है। वित्तीय वर्ष 2005-2006 से अब तक कुल 983 लाख रुपये जौहर अली ट्रस्ट को सरकार द्वारा दिया जा चुका है। खास बात यह है कि यह भूमि और भवन 30 सालों की लीज पर मात्र 100 रुपये के वार्षिक किराये पर इस शर्त पर दी गयी है कि इस शोध संस्थान में रामपुर की लड़कियों को शिक्षा दी जायेगी। बेशक आज के बदलते दौर में अगर लड़कियों को शिक्षा की बात कही जा रही है या विश्व विद्यालय खोले जा रहे है, तो सराहनीय है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर इस तरह की सुविधाएं अन्य इलाकों या यूं कहें जिलों के स्वयंसेवी संस्थाओं की दी जाय तो रामपुर ही क्यों पूरे उत्तर प्रदेश में लड़कियों को बेहतर शिक्षा दी जा सकती है, जो नहीं किया जा रहा। कुछ इसी तरह की भावनाओं के साथ पीपल्स फोरम नामक एक ट्रस्ट के कर्ताधर्ताओं ने सचिव अल्पसंख्यक आयोग से मांग की है कि अगर कुछ इसी तरह की सहूलियतें उन्हें भी मिलें तो वे न सिर्फ उस शुल्क दर से एक हजार गुना यानी एक लाख रुपया सालिना देंगे, बल्कि अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस स्कूल का निर्माण कर बेहतर शिक्षा भी देंगे। 

लेकिन इतनी कम दर पर शायद आजम खां कैबिनेट मंत्री न होते तो उन्हें भी नहीं दिया जा सकता था, लेकिन इस वक्त वह सरकार में सर्वेसर्वा है तो कुछ भी नामुमकिन नहीं। फिरहाल पीपल्स फोरम नामक संस्था चाहती है कि उक्त शोध संस्थान की भूमि और भवन सामाजिक कार्यों हेतु उन्हें दी जाय। जहां श्री आजम खान की निजी संस्था इस लीज के बदले 100 रुपये प्रति वर्ष दे रही है। वह उसी भूमि और भवन के लिए श्री खान द्वारा दिए जाने वाले वार्षिक शुल्क से 1000 (एक हजार) गुणा अधिक अर्थात 1,00,000 रुपये प्रति वर्ष के वार्षिक शुल्क देंगे। जितनी अच्छी शिक्षा आजम की संस्था द्वारा दी जायेगी, उससे कहीं बेहतर शिक्षा कम दर या शुल्क में पीपल्स फोरम द्वारा दी जायेगी। जितना अधिक सामाजिक और सार्वजनिक लाभ जौहर अली ट्रस्ट को यह भूमि और भवन देने से मिलेगा, उससे कहीं बहुत ज्यादा पीपल्स फोरम यह भूमि और भवन प्राप्त कर के समाज को देगा। इन तथ्यों के आधार पर पीपल्स फोरम ने एक लाख रुपये वार्षिक शुल्क पर उक्त शोध संस्थान 30 वर्ष या जितनी अवधि उचित समझी जाए, उतनी अवधि के लिए उक्त शोध संस्थान की भूमि और भवन दी जाय। चूंकि पीपल्स फोरम में अन्य लोगों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता डाॅ नूतन ठाकुर भी हैं, और इसके अलावा इससे कई अन्य सदस्य भी जुड़ें है। 

up IPS couple
डाॅ नूतन ठाकुर के पति अमिताभ ठाकुर का कहना है कि वह अलग से इस शोध संस्थान को लीज पर प्राप्त करने हेतु प्रस्ताव बना कर शासन को प्रस्तुत कर चुके हैं। उनका मानना है कि यदि कोई संस्था दूसरी संस्था से एक हजार गुणा अधिक शुल्क सरकार को दे रही हो और अधिक बेहतर सामाजिक योगदान की बात रख रही हो, तो निश्चित रूप से उसके जैसा विवेकवान और राजकीय हित में प्रतिबद्ध व्यक्ति द्वारा शासकीय हित में पहली संस्था से हुए करार को निरस्त कर तत्काल राजकोष में उससे अधिक शुल्क देने वाले और उससे अधिक सामाजिक योगदान देने वाली संस्था को ही सरकार की भूमि और भवन दिया जाना चाहिए। भले ही उस पहली संस्था से सरकार का कोई व्यक्तिगत लगाव ही क्यों न हो, क्योंकि प्रदेश के मंत्री के रूप में उनकी प्रतिबधता निश्चित रूप से स्वयं द्वारा संचालित मौलाना जौहर अली ट्रस्ट से कई गुणा अधिक प्रदेश की जनता और प्रदेश के हित के प्रति जवाबदेही है। इस बाबत श्री ठाकुर ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश शासन को पत्र भेंजकर पीपल्स फोरम द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को मंजूर कर लीज की जमीन उसे ही दिए जाने की मांग की है। देखा जाय तो अमिताभ ठाकुर के इस बात में दम है, क्योंकि पीपल्स फोरम ने न सिर्फ हजार गुणा अधिक शुल्क देने की बात कही है बल्कि आजम खान के ट्रस्ट द्वारा आम जनता को दी जाने वाली सुविधा से कहीं बेहतर सुविधा देने व उनसे कम धनराशि में रामपुर की बच्चियों को कई गुणा बेहतर शिक्षा देने की बात कहीं है। इससे सरकार के राजकोष को 99,900 रुपये प्रति वर्ष अधिक प्राप्त तो होगा ही लड़कियों को बेहतर व आधुनिक शिक्षा भी मिल सकेगी।  

हालांकि इस गंभीर मसले पर उत्तर प्रदेश सरकार या संबंधित विभाग भले ही अभी तक कुछ नहीं किया लेकिन लोकायुक्त शिकायत मिलने पर सजग जरुर हो गए है। लोकायुक्त ने भी माना है कि कहीं न कहीं गड़बड़ी जरुर है। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने सरकारी मौलाना अली जौहर शोध संस्थान, रामपुर को आजम खान की संस्था मौलाना जौहर अली ट्रस्ट को लीज पर दिए जाने के परिवाद में लोकायुक्त जस्टिस एन के मल्होत्रा से मिल कर शीघ्र जांच करने का अनुरोध किया। लोकायुक्त द्वारा शीघ्र ही जांच कर कार्यवाही का आश्वासन दिया है। लोकायुक्त ने उन्हें बताया कि अब उनके सचिव छुट्टी से वापस आ गए हैं और वे अब इस परिवाद में कार्यवाही शुरू करेंगे। परिवाद में बिना किसी नियम, शर्त और प्रक्रिया के अल्प संख्यक विभाग के शोध संस्थान रामपुर की 1500 वर्गगज बेशकीमती भूमि और 9.83 करोड़ में बने सरकारी भवन को मंत्री की निजी संस्था को 100 रुपये के वार्षिक शुल्क पर 30 सालों दिए जाने को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सौरभ गांगुली, सुभाष घई और कुशाभाई ठाकरे ट्रस्ट मामलों में प्रतिपादित सिद्धांतों के खिलाफ बताया गया है। साथ ही इसे हितों का टकराव बताते हुए पद का सीधा दुरुपयोग बताते हुए इस आवंटन को निरस्त करने और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही किये जाने की मांग की है। 






liveaaryaavart dot com

सुरेश गांधी 
लेखक आज तक टीवी न्यूज चैनल से संबंद्ध है 

कोई टिप्पणी नहीं: